विधानसभा में गरमाई बहस! केंद्र के नियमों का इंतजार…तब तक असुरक्षित रहेंगे गिग वर्कर्स?

Chhattisgarh Budget Session 2026: छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र के तीसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान गिग इकोनॉमी में काम कर रहे हजारों युवाओं की सुरक्षा, अधिकार और संभावित शोषण का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा।

यह भी पढ़े :- Chhattisgarh Budget 2026 : विधानसभा में घमासान तय! प्रश्नकाल से राज्यपाल अभिभाषण तक गरमाएगा सदन

भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन से सवाल किया कि Swiggy, Zomato, Blinkit और Rapido जैसी कंपनियों में कार्यरत गिग वर्कर्स को संगठित मजदूरों की श्रेणी में रखा जाएगा या असंगठित में?

चंद्राकर ने कहा, “गिग वर्कर मर रहे हैं और कंपनियां ऐश कर रही हैं। 10 मिनट डिलीवरी के दबाव में कई बार युवाओं की जान जोखिम में पड़ती है। मानवाधिकार संगठन भी लगातार चिंता जता रहे हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि आउटसोर्सिंग कंपनियों के मामले में भी सरकार ने स्पष्ट कानून न होने का हवाला दिया था और आज गिग वर्कर्स के साथ भी वही स्थिति है। (Chhattisgarh Budget Session 2026)

उन्होंने सदन को याद दिलाया कि सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 लागू होने के बावजूद छत्तीसगढ़ में अब तक स्पष्ट नियम नहीं बनाए गए हैं। उनका कहना था कि 2025 में भारत सरकार को नोटिफिकेशन जारी करना पड़ा क्योंकि राज्यों में नियम नहीं बन सके थे, जबकि कुछ राज्यों ने अपने स्तर पर पहल की है। उन्होंने पूछा कि क्या राज्य सरकार समवर्ती सूची के अधिकार का उपयोग कर गिग वर्कर्स के लिए अलग अधिनियम या नियम बनाने पर विचार करेगी?

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया:

  • फिलहाल गिग वर्कर्स को न तो संगठित क्षेत्र में रखा गया है और न ही असंगठित क्षेत्र में।
  • सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अंतर्गत गिग एवं प्लेटफॉर्म वर्कर्स को शामिल किया गया है।
  • जैसे ही केंद्र सरकार संबंधित नियम अधिसूचित करेगी, राज्य सरकार उसका अनुसरण करेगी।
  • राज्य सरकार ने एक समिति गठित की थी, लेकिन चार श्रम संहिताएं लागू होने के बाद आगे की कार्यवाही केंद्र के अधिनियम के अनुरूप की जा रही है।

मंत्री ने दोहराया कि राज्य स्तर पर अलग नियम नहीं बनाए जाएंगे और केंद्र के दिशा-निर्देशों के तहत ही प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

इस जवाब पर विधायक अजय चंद्राकर ने असंतोष जताते हुए कहा कि केंद्र के नियमों में देरी का खामियाजा छत्तीसगढ़ के युवाओं को भुगतना पड़ रहा है और वे शोषण का शिकार होते रहेंगे। सदन में इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिली। (Chhattisgarh Budget Session 2026)

Back to top button
error: Content is protected !!