Pariksha Pe Charcha: ‘पढ़ाई बोझ नहीं, जीवन निर्माण का माध्यम है’ – परीक्षा पे चर्चा में छात्रों को पीएम मोदी की बड़ी सीख

Pariksha Pe Charcha: परीक्षा के दबाव और पढ़ाई से जुड़े तनाव को कम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ (Pariksha Pe Charcha) कार्यक्रम के दौरान छात्रों को एक खास गुरु मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि पढ़ाई शुरू करने से पहले मन को तैयार करना सबसे जरूरी है। पीएम मोदी के शब्दों में—पहले मन को अनुशासित करें, फिर उसे लक्ष्य से जोड़ें और उसके बाद जिन विषयों को पढ़ना है, उन्हें व्यवस्थित रूप से रखें। जब मन सही दिशा में काम करता है, तो पढ़ाई अपने आप आसान और प्रभावी हो जाती है।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि जीवन में लक्ष्य ऐसे होने चाहिए जो देखने और समझने में आसान हों, लेकिन उन्हें हासिल करने के लिए निरंतर मेहनत करनी पड़े। लक्ष्य हमेशा ऐसा होना चाहिए जो आपकी पहुंच में हो, मगर तुरंत हाथ न आए, ताकि आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा बनी रहे।

अलग-अलग राज्यों में संवाद, बदला कार्यक्रम का तरीका

कई राज्यों से आए छात्रों से बातचीत करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि जब ‘परीक्षा पे चर्चा’ की शुरुआत हुई थी, तब इसका एक तय फॉर्मेट था। समय के साथ इसमें बदलाव किए गए हैं। इस बार उन्होंने अलग-अलग राज्यों में जाकर भी छात्रों से संवाद किया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम का मूल उद्देश्य वही है—छात्रों को परीक्षा के तनाव से बाहर निकालना और उनमें आत्मविश्वास भरना।

प्रधानमंत्री ने कहा कि समय के साथ बच्चों की चुनौतियां, माहौल और जरूरतें बदलती रहती हैं। इसलिए संवाद के तरीकों में बदलाव जरूरी है, लेकिन छात्रों को प्रेरित करने का मूल भाव हमेशा एक जैसा रहना चाहिए।

‘गमोसा’ से छात्रों का स्वागत, नॉर्थ-ईस्ट की संस्कृति पर जोर

कार्यक्रम की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों का स्वागत असमिया ‘गमोसा’ देकर किया। उन्होंने बताया कि गमोसा केवल सांस्कृतिक प्रतीक नहीं है, बल्कि नॉर्थ-ईस्ट और खासकर असम में महिला सशक्तिकरण का उदाहरण भी है।

पीएम मोदी ने कहा कि गमोसा घरों में महिलाएं मेहनत और प्रेम से बुनती हैं। इससे स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा मिलता है और महिलाओं के श्रम व हुनर को सम्मान मिलता है। इसी भावना के साथ उन्होंने छात्रों को गमोसा भेंट किया।

शिक्षा को बोझ नहीं, जीवन निर्माण का माध्यम बनाएं

प्रधानमंत्री ने छात्रों को पढ़ाई को बोझ की तरह लेने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अंक लाना नहीं, बल्कि जीवन को बेहतर बनाना है। यदि पढ़ाई अधूरी रह जाए, तो जीवन की तैयारी भी अधूरी रह जाती है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा कक्षा और परीक्षा तक सीमित नहीं होनी चाहिए। असली सीख जीवन के हर अनुभव से मिलती है। इसलिए छात्रों को अंकों की दौड़ में खुद को सीमित करने के बजाय सीखने की प्रक्रिया का आनंद लेना चाहिए।

‘मैं बीते हुए नहीं, बचे हुए साल गिनता हूं’

छात्रों से बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने एक निजी अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके जन्मदिन पर किसी ने उम्र को लेकर टिप्पणी की थी। इस पर उन्होंने कहा कि वह बीते हुए सालों को नहीं, बल्कि आगे बचे हुए समय को देखते हैं।

इस उदाहरण के जरिए उन्होंने छात्रों को संदेश दिया कि जीवन में पीछे देखने के बजाय आगे की संभावनाओं पर ध्यान देना चाहिए। सकारात्मक सोच और भविष्य पर फोकस रखने से व्यक्ति में नई ऊर्जा आती है।

इंटरनेट और गेमिंग पर संतुलित नजरिया

पीएम मोदी ने इंटरनेट के उपयोग को लेकर भी छात्रों को सलाह दी। उन्होंने कहा कि केवल इसलिए समय बर्बाद नहीं करना चाहिए क्योंकि इंटरनेट सस्ता और आसानी से उपलब्ध है।

उन्होंने यह भी कहा कि सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों के खिलाफ कानून बनाए गए हैं और ऐसे गलत रास्तों से दूर रहना जरूरी है। साथ ही उन्होंने माना कि सही तरह का गेमिंग कौशल विकसित कर सकता है, जिससे बच्चों की गति, निर्णय क्षमता और तकनीकी समझ बेहतर होती है।

ज्ञान से ही स्किल की शुरुआत होती है

प्रधानमंत्री ने पढ़ाई और कौशल विकास के बीच संतुलन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि स्किल दो प्रकार की होती हैं—लाइफ स्किल और प्रोफेशनल स्किल।

उनका कहना था कि केवल स्किल पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। ज्ञान, अध्ययन और निरीक्षण के बिना कोई भी कौशल मजबूत नहीं बन सकता। स्किल की नींव हमेशा ज्ञान पर टिकी होती है, इसलिए पढ़ाई को कमतर नहीं आंकना चाहिए। (Pariksha Pe Charcha)

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