जंगल से लोकतंत्र तक: 120 सरेंडर नक्सलियों ने देखी छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही, 1 करोड़ के इनामी रूपेश ने दिए राजनीति में आने के संकेत

Surrender Naxalites in Assembly: जो कभी बंदूक के साए में जंगलों में चलते थे, आज वही चेहरे लोकतंत्र के मंदिर की गैलरी में बैठे नजर आए। छत्तीसगढ़ विधानसभा में उस वक्त इतिहास बनता दिखा, जब 120 सरेंडर नक्सलियों ने सदन की कार्यवाही देखी। उनके साथ मौजूद था 1 करोड़ का इनामी और पूर्व सेंट्रल कमेटी सदस्य सतीश उर्फ रूपेश, जिसने साफ कहा कि हम पहले भी राजनीति में थे और अब लोकतंत्र के दायरे में काम करेंगे। डिप्टी CM विजय शर्मा के निवास पर डिनर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात और फिर सदन का भ्रमण, इस पूरे घटनाक्रम ने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। क्या यह लोकतंत्र की सबसे बड़ी जीत है ? या 2028 से पहले छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नई पटकथा लिखी जा रही है ?

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गुरुवार रात सभी पुनर्वासित नक्सली डिप्टी CM विजय शर्मा के निवास पर डिनर के लिए पहुंचे। अगले दिन यानी 27 फरवरी 2026 को उन्होंने छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही देखी और विधानसभा का भ्रमण किया। इस दौरान उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत मंत्रिमंडल के कई सदस्यों से हुई। डिप्टी CM विजय शर्मा ने सभी पूर्व नक्सलियों का परिचय कराया, जिस पर मुख्यमंत्री ने जोहार कहकर उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अब कुछ छोटे-मोटे नक्सली ही बचे हैं और वे भी जल्द हथियार डाल देंगे। बता दें कि सतीश उर्फ रूपेश ने 210 साथियों के साथ जगदलपुर में आत्मसमर्पण किया था। मुख्यधारा में लौटने के बाद पहली बार विधानसभा पहुंचे रूपेश ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हम पहले भी राजनीति में ही थे। अब लोकतांत्रिक व्यवस्था के दायरे में रहकर जनता के बीच काम करेंगे।

लोकतंत्र की जीत या 2028 की सियासी जमीन ?

रूपेश के साथ राजमन और रमनी जैसे पूर्व नक्सली कमांडरों ने भी संकेत दिए कि वे भविष्य में राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। इस घटनाक्रम को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव 2028 में होने हैं। ऐसे में पूर्व नक्सलियों का राजनीति में आने का संकेत क्या मुख्यधारा में स्थायी वापसी है या नई सियासी जमीन की तैयारी ? विपक्षी दल कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि अगर आत्मसमर्पित नक्सली राजनीति में आने की इच्छा जता रहे हैं तो क्या भारतीय जनता पार्टी उन्हें टिकट देगी ? कांग्रेस ने भाजपा पर लोकतंत्र को लेकर सवाल खड़े करते हुए कहा कि पार्टी को तय करना होगा कि वह लोकतंत्र की हितैषी है या तानाशा ही की ओर बढ़ रही है। (Surrender Naxalites in Assembly)

सभी पूर्व नक्सली पुनर्वास के बाद सामान्य जीवन जी रहे हैं और सरकारी कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या जंगल की राजनीति अब पूरी तरह लोकतंत्र की राजनीति में बदल पाएगी ? बंदूक छोड़ चुके ये चेहरे अब लोकतंत्र की गैलरी में बैठे दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य निश्चित रूप से प्रतीकात्मक है, लेकिन क्या यह बदलाव स्थायी साबित होगा, या छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नई कहानी की शुरुआत है ? आने वाले समय में इसका जवाब प्रदेश की सियासत और बस्तर की जमीनी हकीकत तय करेगी। (Surrender Naxalites in Assembly)

वहीं ओडिशा के बलांगीर-बरगढ़ और छत्तीसगढ़ के महासमुंद क्षेत्र में सक्रिय 15 नक्सलियों ने सरेंडर की इच्छा जताई है। नक्सलियों के पश्चिम सब जोनल ब्यूरो सचिव विकास ने डिप्टी CM विजय शर्मा और महासमुंद SP के नाम पत्र जारी कर मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई है। बता दें कि नक्सली दो या तीन मार्च को आत्मसमर्पण करना चाहते हैं। डिप्टी CM विजय शर्मा ने नक्सलियों से अपील करते हुए कहा है कि वे बिना किसी भय के पुलिस से संपर्क कर आत्मसमर्पण करें। सरकार रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार पुनर्वास की पूरी व्यवस्था करेगी।

बस्तर में ऑपरेशन तेज, निशाने पर पापाराव

इधर, बस्तर में बड़े कैडर के नक्सलियों के आत्मसमर्पण और मारे जाने के बाद अब फोर्स निचले लेकिन महत्वपूर्ण कमांडरों पर फोकस कर रही है। IG सुंदरराज पी ने बताया कि वर्तमान में बस्तर में 100 से 125 नक्सली सक्रिय हैं। इनकी कमान दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के सदस्य और पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी के प्रभारी पापाराव के हाथ में बताई जा रही है। पापाराव पर 25 लाख रुपए का इनाम घोषित है और उसे मंगू दादा-चंद्रन्ना के नाम से भी जाना जाता है। सूत्रों के मुताबिक उसकी आखिरी सक्रियता बीजापुर के इंद्रावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र में दर्ज की गई थी। सुरक्षाबलों ने उसे आत्मसमर्पण का अल्टीमेटम भी दिया है और संभावित ठिकानों पर सघन अभियान चलाया जा रहा है। (Surrender Naxalites in Assembly)

‘टारगेट 26’ की ओर बढ़ते कदम

सरकार को उम्मीद है कि शीर्ष नक्सली कमांडर देवजी के आत्मसमर्पण के बाद ‘टारगेट 26’ जल्द पूरा होगा। डिप्टी CM विजय शर्मा ने दावा किया कि बस्तर में अब कोई बड़ा नक्सली लीडर नहीं बचा है और एक बड़ा नेता झारखंड में सक्रिय है, जिसके खिलाफ भी कार्रवाई जारी है। बता दें कि छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश में नक्सलवाद के अंत के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 का डेट फाइनल किया है। इसके तहत छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। सरकार का कहना है कि बचे हुए नक्सली सरेंडर करके मुख्यधारा में लौटे, नहीं तो उन्हें बंदूक से जवाब दिया जाएगा। अब देखना होगा कि 31 मार्च तक नक्सलवाद का अंत होता है या नहीं।

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