America Israel Iran War : इज़राइल–ईरान युद्ध के बीच तेल संकट की आशंका, क्या भारत बढ़ाएगा रूस से आयात?

America Israel Iran War : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत समेत दुनिया भर के देशों में कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य कुछ समय के लिए बंद भी होता है, तब भी भारत को निकट भविष्य में बड़े व्यवधान का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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अधिकारियों के अनुसार, देश के पास फिलहाल इतना कच्चा तेल भंडार मौजूद है जो कम से कम 10 दिनों की जरूरतों को पूरा कर सकता है।
भारत के पास आकस्मिक योजनाएं तैयार
ईरान पर अमेरिका और इज़राइल की सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हालात तेजी से बदल रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि तनाव लंबा खिंचता है, तो भारत के पास वैकल्पिक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई आकस्मिक योजनाएं मौजूद हैं। (America Israel Iran War)
रूस से आयात बढ़ाने पर विचार
ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, मिसाइल हमलों के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की बात कही गई थी। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है, तो भारत रूस से तेल आयात बढ़ाकर अपने स्रोतों में बदलाव कर सकता है।
तेल की कीमतों पर असर
तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिख रहा है। ब्रेंट क्रूड इस सप्ताह लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल के सात महीने के उच्च स्तर पर बंद हुआ। यदि आपूर्ति बाधित होती है, तो कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं।
एक अधिकारी के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों के पास टैंक और पारगमन में मिलाकर 10–15 दिन का कच्चा तेल भंडार है। इसके अलावा, तैयार ईंधन का स्टॉक देश की 7–10 दिन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
अन्य देशों से भी खरीद संभव
जरूरत पड़ने पर भारत वेनेजुएला, ब्राजील और अफ्रीका के देशों से भी तेल खरीद सकता है, जिससे आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखी जा सके। (America Israel Iran War)



