Iran Israel US War : पहले ‘सिंदूर’, अब ईरान- दूसरी बार फेल हुई चीन का एयर डिफेंस सिस्टम

Iran Israel US War : अमेरिका और इज़राइल के समन्वित हवाई हमलों के बाद ईरान की वायु रक्षा क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, तेहरान की प्रमुख सैन्य अवसंरचना को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे उसकी एयर डिफेंस प्रणाली की प्रभावशीलता पर बहस तेज हो गई है।
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ईरान की वायु रक्षा व्यवस्था रूसी और चीनी तकनीक के साथ स्वदेशी प्रणालियों के मिश्रण पर आधारित है। इसमें प्रमुख रूप से S-300, HQ-9B और ईरान की स्वदेशी Bavar 373 शामिल हैं। इसके बावजूद उन्नत स्टेल्थ विमानों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध रणनीतियों के सामने यह ढांचा प्रभावी प्रतिरोध खड़ा नहीं कर सका। (Iran Israel US War )
S-300: शीत युद्ध की विरासत
रूस की S-300 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है, जिसे दुश्मन के लड़ाकू विमानों और बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए विकसित किया गया था। कई देशों में आज भी यह तैनात है, लेकिन आधुनिक स्टेल्थ तकनीक और जटिल इलेक्ट्रॉनिक हमलों के सामने इसकी सीमाएं उजागर होती दिखीं।
HQ-9B: चीन की उन्नत लेकिन चुनौतीपूर्ण परीक्षा
चीन द्वारा विकसित HQ-9B प्रणाली को रूसी S-300 PMU और अमेरिकी पैट्रियट PAC-2 से प्रेरित माना जाता है। इसकी मारक क्षमता लगभग 260 किलोमीटर बताई जाती है। इसे चीन ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों—बीजिंग, तिब्बत, शिनजियांग और दक्षिण चीन सागर—में तैनात कर रखा है। ईरान ने भी हाल के वर्षों में अपनी मिसाइल रक्षा क्षमता मजबूत करने के लिए इसे शामिल किया था।
हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार, यह प्रणाली अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों को रोकने में विफल रही। इससे पहले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी इसी प्रणाली की प्रभावशीलता पर सवाल उठे थे।
स्टेल्थ और नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर का प्रभाव
बताया जा रहा है कि हमलों में F-35 Lightning II जैसे अत्याधुनिक स्टेल्थ लड़ाकू विमानों और स्वार्म ड्रोन रणनीति का उपयोग किया गया। सबसे पहले ईरान के वायु रक्षा रडार और कमांड नेटवर्क को निशाना बनाया गया, जिससे मिसाइल लॉन्चर और कमांड सेंटर के बीच समन्वय टूट गया।
रडार और सेंसर नेटवर्क निष्क्रिय होते ही पूरी रक्षा प्रणाली लगभग अंधी हो गई। कम ऊंचाई पर तेज गति से आने वाली सटीक निर्देशित मिसाइलों और इलेक्ट्रॉनिक जामिंग तकनीकों ने प्रतिक्रिया का समय बेहद सीमित कर दिया।
सामरिक संकेत और व्यापक असर
यह घटनाक्रम दिखाता है कि मिश्रित तकनीक पर आधारित वायु रक्षा ढांचा, यदि पूर्णतः एकीकृत और नेटवर्क-केंद्रित न हो, तो संकट की घड़ी में कमजोर पड़ सकता है। आधुनिक युद्ध में केवल लंबी दूरी की मारक क्षमता ही पर्याप्त नहीं, बल्कि सेंसर, डेटा लिंक, इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र की मजबूती भी उतनी ही जरूरी है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस विफलता से चीन और रूस की रक्षा निर्यात छवि पर असर पड़ सकता है। साथ ही पश्चिम एशिया में सामरिक संतुलन अमेरिका और इज़राइल के पक्ष में झुकने की संभावना बढ़ सकती है। (Iran Israel US War )



