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मिडिल ईस्ट में महा टकराव: इस्लामाबाद वार्ता फेल, पुतिन की एंट्री से बढ़ी सियासी हलचल

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई अमेरिका–ईरान वार्ता विफल रहने के बाद अब वैश्विक स्तर पर शांति प्रयास तेज हो गए हैं। इसी कड़ी में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की पेशकश कर तनाव कम करने की पहल की है।

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जानकारी के मुताबिक, 28 फरवरी से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुआ टकराव अभी नाजुक दौर में है। हालांकि दो सप्ताह का सीजफायर लागू किया गया है, लेकिन इसे स्थायी बनाने की कोशिशें अब तक सफल नहीं हो सकी हैं। इस्लामाबाद में हुई अहम बैठक भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाई।

इस बीच डोनाल्ड ट्रंप की ओर से कड़े रुख और बयानबाजी जारी है, जिससे हालात और संवेदनशील बने हुए हैं। वहीं रूस ने खुद को एक संभावित मध्यस्थ के रूप में पेश करते हुए बातचीत के जरिए समाधान पर जोर दिया है।

क्रेमलिन के अनुसार, पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से फोन पर बातचीत की और क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। रूस का मानना है कि संवाद के जरिए ही इस संकट का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।

दूसरी ओर, ईरान का अमेरिका पर भरोसा अब भी कमजोर नजर आ रहा है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने कहा कि अमेरिका अब तक तेहरान का विश्वास जीतने में नाकाम रहा है। उन्होंने संकेत दिए कि दोनों देशों के बीच गहरा अविश्वास किसी भी समझौते में बड़ी बाधा बना हुआ है।

रूस की पहल इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि उसके ईरान के साथ करीबी संबंध हैं और वह खुद को एक संतुलित मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। हाल ही में यूक्रेन-रूस मुद्दे पर भी ट्रंप द्वारा मध्यस्थता की पेशकश के बीच पुतिन और ट्रंप की अलास्का में मुलाकात चर्चा में रही थी।

इधर, इस संघर्ष का आर्थिक असर भी साफ दिखाई दे रहा है। इजरायल ने बताया है कि युद्ध के चलते उसके रक्षा बजट में करीब 11.5 अरब डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ा है।

कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट का यह संकट अभी निर्णायक मोड़ पर है, जहां कूटनीतिक प्रयासों और वैश्विक दबाव के बीच स्थायी शांति की राह तलाशने की कोशिशें जारी हैं।

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