वेंस-अराघची में तीखी बहस, बेंजामिन नेतन्याहू ने जंग जारी रखने का ऐलान
पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का पहला दौर खत्म हो गया है। इस दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तीखी बहस हो गई, जिससे वार्ता का माहौल गरमा गया।
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ऐतिहासिक बातचीत, लेकिन तनाव बरकरार
इस वार्ता को 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद दोनों देशों के बीच पहली उच्चस्तरीय आमने-सामने बातचीत माना जा रहा है। बैठक में ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने किया, जबकि अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व वेंस कर रहे थे।
दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से अलग-अलग मुलाकातें भी कीं, जिसके बाद सीधी बातचीत शुरू हुई।
नेतन्याहू का सख्त रुख
इसी बीच, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा कि उनका देश ईरान के खिलाफ अभियान जारी रखेगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि इजराइल “ईरान के आतंकवादी शासन और उसके सहयोगियों के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगा।”
नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि इजराइल ने ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को बड़ा झटका दिया है और अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है।
परमाणु कार्यक्रम पर बड़ा दावा
नेतन्याहू के अनुसार, ईरान परमाणु हथियार बनाने के बेहद करीब पहुंच चुका था और उसके पास प्रतिदिन सैकड़ों मिसाइल बनाने की क्षमता थी। उन्होंने दावा किया कि ईरान के पास अब भी 400 किलोग्राम से ज्यादा संवर्धित यूरेनियम मौजूद है, जिसे कूटनीति या बल प्रयोग से हटाया जाएगा।
पाकिस्तान की मध्यस्थता अहम
इस पूरी वार्ता में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उम्मीद जताई कि इस बातचीत से पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की दिशा में प्रगति होगी।
ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा कि अगर बातचीत “निष्पक्ष” रही तो समझौता संभव है, लेकिन “इजराइल फर्स्ट” सोच के साथ कोई डील नहीं हो सकती।
लेबनान पर हमले से बढ़ा तनाव
वार्ता के बीच ही लेबनान पर इजराइल के हमलों में 300 से ज्यादा लोगों की मौत ने हालात को और बिगाड़ दिया। ईरान ने इसे युद्धविराम का उल्लंघन बताया, जबकि अमेरिका और इजराइल ने कहा कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं था।
अमेरिका-ईरान वार्ता से शांति की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन जमीनी हालात और इजराइल के सख्त रुख के चलते पश्चिम एशिया में तनाव अभी भी बरकरार है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि बातचीत शांति की ओर बढ़ेगी या संघर्ष और गहरा होगा।



