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उत्तर भारत की बर्फीली हवाओं से ठिठुरा छत्तीसगढ़, कई जिलों में शीतलहर का अलर्ट जारी

Cold Wave in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में मौसम लगातार तेजी से बदल रहा है। मौसम विभाग ने उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ में अगले दो दिनों तक शीतलहर जारी रहने की संभावना जताई है। इसके बाद आने वाले चार दिनों में तापमान में 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी की संभावना है। मौसम विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि ठंड और मौसम के बदलाव के कारण सुकमा और दंतेवाड़ा जिलों में मलेरिया फैलने की आशंका बढ़ सकती है। सरगुजा, बिलासपुर और दुर्ग संभाग के कई जिलों में शीतलहर का असर देखा जा रहा है। कोरिया, सूरजपुर, मनेंद्रगढ़, जशपुर और बिलासपुर जिलों के लिए विभाग ने कोल्ड वेव अलर्ट जारी किया है।

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रायगढ़ में सुबह-शाम की ठंड ने लोगों को घरों में कैद होने पर मजबूर कर दिया है। प्रदेश में ठंड की तीव्रता का मुख्य कारण उत्तर भारत से आ रही बर्फीली हवाएं हैं। इस समय मैदानी क्षेत्रों में दुर्ग सबसे ठंडा जिलों में शामिल है, जहां रात का तापमान 10.8°C, जो सामान्य से 7 डिग्री कम दर्ज हुआ। राजधानी रायपुर में भी नवंबर में रात का तापमान 13°C तक गिरा, जो 9 साल में दूसरी बार इतनी ठंड दर्ज की गई। अंबिकापुर में 10 साल का रिकॉर्ड टूटा। पिछले 24 घंटों में प्रदेश में सबसे अधिक 30.2°C तापमान दुर्ग और न्यूनतम तापमान 7.3°C अंबिकापुर में रिकॉर्ड किया गया। रिकॉर्ड के मुताबिक नवंबर का अब तक सबसे कम तापमान 4.2°C साल 1970 में दर्ज हुआ था।

रायगढ़ में 9 जगहों पर अलाव की व्यवस्था 

ठंड से राहत देने के लिए रायगढ़ नगर निगम ने शहर के 9 जगहों पर अलाव की व्यवस्था की है। इनमें मेडिकल कॉलेज में 2 जगह, चक्रधर नगर ऑटो पार्किंग, रामनिवास टॉकीज चौक, रेलवे स्टेशन, अशर्फी देवी अस्पताल, जिला अस्पताल, केवड़ा बाड़ी बस स्टैंड, मिनी माता चौक और शनि मंदिर के पास व्यवस्था की गई है। इन जगहों पर रात में लोगों की आवाजाही बनी रहती है। लैलूंगा, कापू, छाल और धरमजयगढ़ जैसे क्षेत्रों में शहरी इलाकों की तुलना में अधिक ठंड महसूस की जा रही है। शाम ढलते ही लोग अलाव जलाकर घरों में दुबक रहे हैं और गर्म कपड़ों पर निर्भर हैं।

नवंबर महीना छत्तीसगढ़ में आमतौर पर सर्दी की शुरुआत माना जाता है, लेकिन रिकॉर्ड बताते हैं कि यह महीना कभी तेज ठंड तो कभी गर्मी और बारिश का भी गवाह रहा है। नवंबर का सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान – 35.6°C 2 नवंबर 1935 दर्ज किया गया था। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान – 8.3°C 22 नवंबर 1883 को रिकॉर्ड किया गया था। सबसे ज्यादा मासिक वर्षा 138.2 मिमी साल 1924 में दर्ज हुआ था। एक दिन में सबसे ज्यादा 70.4 मिमी बारिश 2 नवंबर 1930 को हुई थी।  

मलेरिया का बढ़ा खतरा 

नवंबर का मौसम सामान्यत साफ और स्थिर रहता है, तूफान और ओलावृष्टि की घटनाएं दुर्लभ होती हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का अस्थिर मौसम मच्छरों की वृद्धि के लिए अनुकूल होता है, जिससे मलेरिया फैलने का खतरा बढ़ सकता है। रायपुर में इस समय दिन का तापमान प्रदेश में सबसे ज्यादा है, लेकिन शाम होते ही तेज गिरावट दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि ऑफिस जाने वाले लोग, स्कूली बच्चे गर्म कपड़े साथ रखें, ताकि अचानक तापमान गिरने का असर सेहत पर न पड़े। (Cold Wave in Chhattisgarh)

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