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Chhattisgarh Naxalite surrender: छत्तीसगढ़ में पहली बार SZCM कैडर के बड़े नक्सली ने किया सरेंडर, 66 नक्सलियों ने एक ही दिन में हथियार डाले

Chhattisgarh Naxalite surrender: बस्तर/बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे “पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान का बड़ा असर देखने को मिला है। पहली बार SZCM (Special Zonal Committee Member) कैडर के किसी इनामी नक्सली ने छत्तीसगढ़ में ही सरेंडर किया है। इससे पहले इस स्तर के नक्सली तेलंगाना में जाकर सरेंडर करते थे।

बीजापुर जिले का रहने वाला 25 लाख का इनामी नक्सली रामन्ना इरपा उर्फ जगदीश उर्फ विकेश ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। वह साल 2002 से नक्सल संगठन से जुड़ा था और ओडिशा राज्य कमेटी सदस्य, कंपनी नंबर-8 का इंचार्ज, कमांडर और पूर्वी सब जोनल ब्यूरो का कमांडर इन चीफ जैसे पदों पर रह चुका है।

66 नक्सलियों ने एक दिन में किया आत्मसमर्पण

24 जुलाई को बस्तर संभाग के 5 जिलों—बीजापुर, कांकेर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा और सुकमा—में कुल 66 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। इन सभी पर कुल 2 करोड़ 54 लाख रुपए का इनाम घोषित था।

  • बीजापुर में 25 नक्सलियों ने सरेंडर किया, जिनमें से 23 पर 1.15 करोड़ का इनाम था।

  • कांकेर में 13 नक्सलियों पर 62 लाख,

  • नारायणपुर में 8 नक्सलियों पर 33 लाख,

  • दंतेवाड़ा में 16 नक्सलियों में से 5 पर 17 लाख,

  • सुकमा में 5 इनामी नक्सलियों ने हथियार डाले।

सरेंडर करने वालों में मिलिट्री कंपनी नंबर 1 का कमांडर, DVCM, ACM जैसे उच्च रैंक के नक्सली शामिल हैं।

छोटी उम्र में बना था नक्सली, अब विचारधारा से टूटा भरोसा

रामन्ना ने कहा, “छोटी उम्र में नक्सलवाद की विचारधारा से प्रभावित होकर संगठन में शामिल हो गया था। पहले वे जल-जंगल-जमीन की बात करते थे, लेकिन अब उनका मकसद बदल गया है। दोहरी नीति और निर्दोष लोगों की हत्या से मन टूट गया। अब हम विकास चाहते हैं, इसलिए हथियार डाल दिए।”

ओडिशा, आंध्र, तेलंगाना में रहा सक्रिय

सरेंडर करने वाला रामन्ना न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि ओडिशा, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी सक्रिय था। उसे ट्रेनिंग के बाद ओडिशा भेजा गया था जहां उसने लंबे समय तक काम किया। वह कई बड़ी नक्सल घटनाओं में भी शामिल रहा है। उसके पास से पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है।

IG की अपील: लौट आएं मुख्यधारा में

बस्तर IG सुंदरराज पी ने कहा कि यह नक्सल संगठन के लिए बड़ा झटका है। उन्होंने कहा कि बड़े कैडर के नक्सलियों का आत्मसमर्पण होना इस बात का संकेत है कि संगठन के भीतर विश्वास टूट रहा है। IG ने अन्य नक्सलियों से भी अपील की है कि वे हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटें और सरकारी योजनाओं का लाभ लें।

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