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छत्तीसगढ़ में 30 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र, विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाएगी सरकार

CG Assembly Special Session: छत्तीसगढ़ में 30 अप्रैल को विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाया गया है। इसे लेकर विधानसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके मुताबिक इस सत्र में एक बैठक होगी, जिसमें सरकारी कामकाज संपादित किए जाएंगे। हालांकि सरकार ने पहले ही कहा था कि इस सत्र में नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम का समर्थन नहीं करने पर विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया जाएगा। 20 अप्रैल को महिला आरक्षण विधेयक को समर्थन नहीं देने पर विपक्ष के खिलाफ आयोजित ‘जन आक्रोश रैली’ के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा था कि उनकी सरकार इसे लेकर विशेष सत्र बुला रही है, जिसमें विपक्ष के रुख की निंदा करने वाला प्रस्ताव पारित किया जाएगा।

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वहीं कांग्रेस भी इसी मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर रही है और सदन में जोरदार विरोध दर्ज कराने की तैयारी में है। सत्र के दौरान महिला आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा विपक्ष से जवाब मांग सकती है, जबकि कांग्रेस इसे जनहित और अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता से जोड़कर पेश करेगी। ऐसे में एक दिवसीय सत्र होने के बावजूद सदन में तीखी बहस और हंगामे की पूरी संभावना जताई जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का सपना विपक्ष के रवैये के कारण पूरा नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि इस फैसले से देश की करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों को ठेस पहुंची है। (CG Assembly Special Session)

CM साय ने इसे सिर्फ राजनीतिक विषय न मानते हुए महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में पंचायती राज व्यवस्था के तहत महिलाओं को लगभग 57 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, जबकि विधानसभा में भी 20 प्रतिशत से ज्यादा महिला विधायक हैं। इससे राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर समाज को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार आगे भी महिला आरक्षण के लिए सकारात्मक कदम उठाती रहेगी। (CG Assembly Special Session)

नेता प्रतिपक्ष ने किया पलटवार

नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने विशेष सत्र को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है, जब निंदा प्रस्ताव पारित कराने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जा रहा है। महंत ने आरोप लगाया कि यह सत्र केंद्र सरकार के दबाव में आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार झूठ को सच साबित करना चाहती है तो एक दिन के बजाय दो दिन का सत्र बुलाया जाना चाहिए, ताकि विपक्ष को भी जवाब देने का पर्याप्त अवसर मिल सके। महंत ने कहा कि आमतौर पर विधानसभा सत्र प्रदेश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाए जाते हैं, लेकिन इस बार का एजेंडा समझ से परे है। इस पर डिप्टी CM अरुण साव ने कहा कि विपक्ष ने आधी आबादी के संवैधानिक अधिकार को छीनने का काम किया है। कांग्रेस पार्टी ने शुरू से ही महिला आरक्षण का विरोध किया। इसलिए हम विपक्ष के नेताओं को एक्सपोज करने का काम करेंगे।

सियासी मायने और आगे की राह

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विशेष सत्र भले ही समय में छोटा हो, लेकिन इसके जरिए बड़े राजनीतिक संदेश देने की कोशिश होगी। महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में 30 अप्रैल को होने वाला यह एक दिवसीय सत्र छत्तीसगढ़ की राजनीति में दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में यह सत्र न सिर्फ सदन के भीतर बहस और रणनीतियों का मंच बनेगा, बल्कि आने वाले समय की सियासी दिशा भी तय कर सकता है। सभी की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि इस सीमित समय के सत्र में कौन सा पक्ष अपनी बात ज्यादा प्रभावी ढंग से रख पाता है। (CG Assembly Special Session)

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