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छत्तीसगढ़ के कई जिलों में गहराया पेयजल संकट, जल जीवन मिशन के दावों के बीच ग्रामीण अब भी बूंद-बूंद पानी के लिए मजबूर

Water Problem in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के उत्तरी अंचल के कई जिलों में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट गहराता जा रहा है, जिनमें बलरामपुर, सरगुजा, सूरजपुर और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले शामिल हैं, जहां सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के बावजूद ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग साफ पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हालात यह हैं कि कई गांवों में अधूरे पड़े कार्य, खराब हैंडपंप और बंद पड़ी नल-जल योजनाएं ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा रही हैं। बलरामपुर जिले में आज भी कई ऐसे गांव हैं, जहां लोगों को पीने के साफ पानी के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। जल जीवन मिशन से लोगों को उम्मीद थी कि उनके घरों तक नल के जरिए स्वच्छ पानी पहुंचेगा, लेकिन हकीकत इससे उलट है।

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कई गांवों में योजना का काम अधूरा पड़ा है, जिसके चलते ग्रामीण निजी बोरवेल या अस्थायी जुगाड़ से पानी पीने को मजबूर हैं। इसे लेकर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के कार्यपालन अभियंता पंकज जैन का कहना है कि लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों के टेंडर निरस्त करने की प्रक्रिया जारी है। साथ ही, पूर्व में किए गए कार्यों की गुणवत्ता जांच कराई जा रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरगुजा जिले के मैनपाट विकासखंड के ग्राम पंचायत सुपलगा में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां एक दर्जन से ज्यादा परिवारों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों को मजबूरन कुएं का गंदा पानी पीना पड़ रहा है, जिसे मवेशी भी इस्तेमाल करते हैं। (Water Problem in Chhattisgarh)

सूरजपुर में 40 डिग्री तापमान में पानी के लिए जंग

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने जनपद से लेकर जिला स्तर तक कई बार शिकायत की, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। गांव में हैंडपंप की मांग लंबे समय से की जा रही है। वहीं स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारी ओमकार सिंह का दावा है कि जिले में युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है और गर्मी को देखते हुए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर निगरानी बढ़ाई गई है। सूरजपुर जिले में तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है और इस भीषण गर्मी में ग्रामीणों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। कर्री ग्राम पंचायत में हजारों लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। गांव में कई हैंडपंप हैं, लेकिन ज्यादातर खराब पड़े हैं। जो चालू हैं, उनमें से निकलने वाला पानी आयरनयुक्त और लाल रंग का है। ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर जाकर डबरी का गंदा पानी लाना पड़ता है।

आदिवासी गांवों में बदहाल हालात

बीडीसी प्रतिनिधि राम प्रताप सिंह के मुताबिक दूषित पानी के कारण बच्चों में बीमारियां बढ़ रही हैं। हालांकि जिला पंचायत सीईओ बिजेंद्र सिंह पाटले का कहना है कि क्षेत्र में पेयजल की कोई कमी नहीं है और खराब हैंडपंपों को तत्काल ठीक किया जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि जल जीवन मिशन के तहत तेजी से काम हो रहा है, लेकिन जमीनी तस्वीर इससे अलग नजर आती है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में बैगा आदिवासी समुदाय भीषण जल संकट से जूझ रहा है। यहां कई गांवों में नल कनेक्शन तो लगाए गए हैं, लेकिन वर्षों से उनमें पानी नहीं आया। गौरेला विकासखंड के पीपरखूंटी गांव में करीब 35 बैगा परिवार रहते हैं। यहां ग्रामीणों को कुएं में उतरकर मटमैला पानी निकालना पड़ता है। यह पानी छानकर पीने और घरेलू उपयोग में लाया जाता है।

उपसरपंच देव सिंह राजपूत का कहना है कि चार साल पहले लगाए गए नल कनेक्शन आज तक सिर्फ दिखावा बनकर रह गए हैं। इसी तरह करंगरा ग्राम पंचायत के बेदखोदरा गांव में भी नल-जल योजना अधूरी है। यहां न तो ओवरहेड टैंक बना और न ही पाइपलाइन से पानी की सप्लाई शुरू हो पाई। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की कार्यपालन अभियंता प्रिया सोनी ने इस स्थिति के लिए ठेकेदारों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि संबंधित ठेकेदारों को नोटिस जारी किए गए हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें हटाया जाएगा। विभाग का कहना है कि 2027 तक लक्ष्य पूरा करने की दिशा में काम किया जा रहा है। (Water Problem in Chhattisgarh)

दावों और हकीकत के बीच फंसे ग्रामीण

चारों जिलों की स्थिति यह दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं के दावे और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है, जहां एक ओर सरकार हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत आज भी सवालों के घेरे में है। अधूरी योजनाएं, खराब हैंडपंप और दूषित पानी ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इन समस्याओं को कितनी गंभीरता से लेता है और कब तक गांवों तक सच में साफ पानी पहुंच पाता है, या फिर ग्रामीण इसी तरह बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करते रहेंगे। (Water Problem in Chhattisgarh)

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