नॉर्वे में PM मोदी का वैश्विक कंपनियों को न्योता, कहा- भारत आइए, अपनी महत्वाकांक्षाओं को विस्तार दीजिए

Norway Business Research Summit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्वे के ओस्लो सिटी हॉल में नॉर्वे-भारत व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि नॉर्वे और इंडिया के बिजनेस और रिसर्च लीडर्स के बीच बातचीत करने का अवसर मिला है। इस समिट के भव्य आयोजन के लिए मैं नॉर्वे के प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करता हूं। नॉर्वे और भारत के बिजनेस और रिसर्च लीडर्स के बीच होना मेरे लिए खुशी की बात है। कुछ साथियों को जो सुना ये सुनकर विश्वास होता है कि हमारी साझेदारी की नींव बहुत ही मजबूत है। ये केवल संभावनाओं की नहीं, ये एक साबित साझेदारी है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज जब फूड, फ्यूल और फर्टिलाइजर सिक्योरिटी एक प्रकार से वैश्विक चुनौती बन गई है तो भारत और नॉर्वे मिलकर इनका समाधान कर रहे हैं। आज एक ऐसा समय है, जिसका सही समय का, सही उपयोग का एक अवसर है। अक्टूबर 2025 में हमने यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन के साथ व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA) लागू किया। ये यूनिक और स्पेशल एग्रीमेंट हमारे बीच टैलेंट, टेक्नोलॉजी और म्युचुअल ट्रस्ट का एग्रीमेंट है। रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म इस मंत्र को लेकर जब हम आगे बढ़ रहे हैं तब, अगर पीछे की तरफ देखें तो पिछले 12 सालों में हमने भारत का इकोनॉमिक डीएनए पूरी तरह चेंज कर दिया है। हाल ही में हमने टैक्सेशन, लेबर कोड और गवर्नेंस जैसे विषयों में नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स किए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नॉर्वे और भारत के व्यापार और अनुसंधान समुदायों के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। यहां उपस्थित कुछ साथियों की बातें सुनने के बाद मुझे पूरा विश्वास हो गया है कि हमारी साझेदारी की नींव अत्यंत सुदृढ़ है। यह केवल संभावनाओं पर आधारित साझेदारी नहीं है, बल्कि एक सिद्ध साझेदारी है। जब भोजन, ईंधन और उर्वरक सुरक्षा एक तरह से वैश्विक चुनौतियां बन गई हैं, तब भारत और नॉर्वे मिलकर इनके समाधान खोजने की दिशा में काम कर रहे हैं। चाहे वह भारत के खाद्य क्षेत्र में ‘ओर्कला’ (Orkla) का निवेश हो, ‘इक्विनोर’ (Equinor) की ओर से भारत को LPG और LNG की आपूर्ति हो या भारत के उर्वरक क्षेत्र में ‘यारा’ (Yara) का योगदान हो। हमारा सहयोग हर क्षेत्र में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। (Norway Business Research Summit)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि आपमें से कई CEO ने भारत के ‘वाइब्रेंट गुजरात’ और अन्य निवेशक शिखर सम्मेलनों में लगातार और बड़े उत्साह के साथ हिस्सा लिया है। अब हमें इस साझेदारी की तीव्रता को बढ़ाकर इसे नई ऊंचाइयों तक ले जाना होगा। हमें अपनी गति को तेज करना होगा और अपने लक्ष्यों को और भी अधिक ऊँचा निर्धारित करना होगा। आपमें से जो लोग पहले से ही भारत से जुड़े हुए हैं, मैं उन्हें यह विश्वास दिलाना चाहता हूं कि यहां जो चर्चाएं और संवाद हो रहे हैं, उनके लिए वर्तमान समय से बेहतर कोई और समय नहीं हो सकता। यह क्षण एक ऐसा अवसर लेकर आया है, जो हमें सही समय का सही उपयोग करने का एक अनूठा मौका देता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अक्टूबर 2025 में हमने यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के साथ ‘व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता’ (TEPA) लागू किया। यह एक अनोखा और विशेष समझौता है, जो हमारे बीच प्रतिभा, प्रौद्योगिकी और आपसी विश्वास पर आधारित है। इस समझौते के माध्यम से हमारा उद्देश्य अगले 15 सालों में EFTA देशों से भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित करना और 10 लाख (एक मिलियन) रोजगार के अवसर पैदा करना है। ये लक्ष्य भले ही महत्वाकांक्षी हों, लेकिन इन्हें हासिल किया जा सकता है। मैं दो ऐसे क्षेत्रों का जिक्र करना चाहूंगा जो आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकते हैं। भारत का तेज़ी से बढ़ता मध्यम वर्ग पोषण और स्वास्थ्य क्षेत्रों में काफी मांग पैदा कर रहा है। नॉर्वे की खाद्य, मत्स्य पालन और स्वास्थ्य सेवा कंपनियां इस मांग को पूरा करने में भारत के लिए मज़बूत साझेदार बनकर उभर सकती हैं। इसी तरह जब स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र की बात आती है, तो भारत की आकांक्षाएं वैश्विक स्तर पर बेजोड़ हैं।

उन्होंने कहा कि साल 2030 तक, हमने 500 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा और 5 मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करने का लक्ष्य रखा है। स्वच्छ ऊर्जा में निवेश नॉर्वे के वेल्थ फंड की भी प्राथमिकता है। मैं नॉर्वे को भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य में एक प्रमुख हितधारक बनने के लिए आमंत्रित करता हूं। जैसे-जैसे हम ‘सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन’ के मंत्र से निर्देशित होकर आगे बढ़ रहे हैं, अगर हम पीछे मुड़कर देखें, तो हमने पिछले 12 सालों में भारत के आर्थिक DNA को पूरी तरह से बदल दिया है। हम अनुपालन आवश्यकताओं को सुव्यवस्थित करने पर लगातार काम कर रहे हैं, और सरकार ‘व्यापार करने में आसानी’ (Ease of Doing Business) को और बढ़ाने के लिए बेहद सक्रिय कदम उठा रही है। हाल ही में, हमने कराधान, श्रम संहिता और शासन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में ‘अगली पीढ़ी के सुधार’ लागू किए हैं। (Norway Business Research Summit)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेरा मानना है कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग को अगले स्तर पर ले जाने के लिए, हम इस समय उपलब्ध सबसे बेहतरीन अवसर दे रहे हैं। हम कई प्रमुख क्षेत्रों में प्रोत्साहन दे रहे हैं। इसका एक शानदार उदाहरण हमारा जहाज़ निर्माण क्षेत्र है। हम इस क्षेत्र को तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं, और इसे एक रणनीतिक मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के रूप में स्थापित कर रहे हैं। हम जहाज़ निर्माण क्लस्टर विकसित कर रहे हैं और एक संपूर्ण इकोसिस्टम बना रहे हैं। जहाज निर्माण के साथ-साथ, भारत MRO, ग्रीन शिपिंग और समुद्री सेवाओं के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है। आज नॉर्वे के लगभग 10% जहाज भारत में बनते हैं। क्या हम अगले पांच सालों में इस आंकड़े को बढ़ाकर 25% तक पहुंचा सकते हैं? मेरा मानना है कि यह कोई मुश्किल काम नहीं है। हमने अब गति पकड़ ली है। अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को पाने के लिए, अब हमें साहसी कदम उठाने की जरूरत है। मैं आप सभी को आमंत्रित करता हूँ कि आप भारत की नीतियों, स्थिरता और प्रोत्साहनों का लाभ उठाकर इस क्षेत्र में प्रमुख भागीदार बनें।

PM मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री और मैंने भारत-नॉर्वे संबंधों को ‘हरित रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक पहुंचाया है। इस रणनीतिक साझेदारी के माध्यम से, नॉर्वे की कंपनियों को महत्वपूर्ण खनिजों, AI, साइबर प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और रक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में पूरा सहयोग मिलेगा। इन सभी क्षेत्रों में, मैं आपको भारत को नवाचार और विनिर्माण का केंद्र बनाने में मदद करने के लिए आमंत्रित करता हूँ। आज, हम ‘लैब-टू-लैब’, ‘विश्वविद्यालय-टू-विश्वविद्यालय’ और ‘वैज्ञानिक-टू-वैज्ञानिक’ साझेदारियों के माध्यम से भी भारत-नॉर्वे संबंधों को बढ़ावा दे रहे हैं। भारत का CSIR, उसके स्टार्टअप फंड और नॉर्वे के अनुसंधान संस्थान सक्रिय रूप से अपने आपसी सहयोग को बढ़ा रहे हैं। इससे दोनों देशों के अनुसंधान और स्टार्टअप इकोसिस्टम को आपस में जोड़ने में मदद मिलेगी। विशेष रूप से नॉर्वे के लिए, हमने भारत की ‘इन्वेस्ट इंडिया’ पहल के तहत एक समर्पित ‘व्यापार सुविधा डेस्क’ स्थापित किया है और औपचारिक रूप से उसका उद्घाटन किया है, ताकि हम आपकी विशिष्ट आवश्यकताओं पर विशेष ध्यान दे सकें।

PM ने कहा कि यह डेस्क भारत में आपकी निवेश यात्रा को अधिक सुगम, तीव्र और प्रभावी बनाएगा। आप सभी के लिए मेरा मुख्य संदेश यह है कि भारत आइए, यहां अपने कार्यक्षेत्र और अपनी महत्वाकांक्षाओं, दोनों का विस्तार कीजिए। मैं आपको भारत आने और हमारे साथ जुड़ने के लिए हार्दिक निमंत्रण देता हूं। मैंने भी अपनी ओर से आपको अपना आश्वासन दिया है और एक तरह से अब गेंद आपके पाले में है। नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर ने कहा कि एक बात जिस पर मैंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ चर्चा की, वह यह है कि जो देश नियम-आधारित व्यवस्था में विश्वास रखते हैं, जो स्थिर नहीं है, बल्कि हमेशा विकसित होती रहती है और अपने आस-पास हो रही घटनाओं के प्रति प्रतिक्रिया देती रहती है और जो देश व्यापार, भू-राजनीति और देशों के आपसी व्यवहार में कुछ निश्चित मानकों और स्थिरता में विश्वास रखते हैं, उन्हें एक-दूसरे के और करीब आना होगा।
अकरशस कैसल का किया दौरा
उन्होंने कहा कि वैश्विक समुदाय में कुछ ऐसे प्रमुख खिलाड़ी मौजूद हैं, जो कुछ महत्वपूर्ण श्रृंखलाओं को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। वे कुछ हद तक कूटनीति, व्यापार, मूल्य श्रृंखलाओं और महत्वपूर्ण दुर्लभ खनिजों को हथियार बना रहे हैं। इस यात्रा के बारे में जिस बात की मैं सराहना करता हूं, वह यह है कि हमने आज कई समझौतों को अंतिम रूप दिया है। नॉर्वे की तरफ से कई प्रमुख खिलाड़ी अब इसमें शामिल हो चुके हैं। नॉर्वे की सरकार इन समझौतों को आगे बढ़ाने और राजनीतिक संपर्कों को और गहरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आज हमारा एक नॉर्डिक-भारत शिखर सम्मेलन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्वे के ओस्लो में अकरशस कैसल का दौरा किया। नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर भी इस दौरान मौजूद रहे। (Norway Business Research Summit)



