नारायणपुर में दो गांवों के बीच बढ़ा सीमा विवाद, हथियारों के साथ पहुंचे ग्रामीण, दहशत का माहौल

Border Dispute in Narayanpur: नारायणपुर जिले के एड़का ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम कानागांव और खड़कागांव के बीच पिछले कुछ समय से चला आ रहा सीमा विवाद एक बार फिर गंभीर होता दिखाई दे रहा है। सीमा निर्धारण को लेकर दोनों गांवों के ग्रामीणों के बीच आए दिन बहसबाजी और तनाव की स्थिति बनी रहती है। इस बीच खड़कागांव के कुछ ग्रामीण हथियारों के साथ कानागांव पहुंचे, जिसके बाद क्षेत्र में तनाव के साथ दहशत का माहौल बन गया। कानागांव के ग्रामीणों का कहना है कि वे पीढ़ियों से तय पारंपरिक सीमा के अंदर खेती-किसानी और निवास करते आ रहे हैं, लेकिन ग्राम पंचायत एड़का से खड़कागांव के अलग होने के बाद सीमा को लेकर विवाद तेजी से बढ़ा है।
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ग्रामीणों ने बताया कि इस बार हथियारों के साथ पहुंचने की घटना ने संभावित संघर्ष की आशंका बढ़ा दी है। स्थिति बिगड़ने से पहले समाधान की पहल करते हुए कानागांव के ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और विवाद का शांतिपूर्ण निपटारा करने की मांग की। ग्रामीणों ने प्रशासन से बढ़ते तनाव को नियंत्रित करने और किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए त्वरित कदम उठाने की अपील की है। इधर, कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम को जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद अब दोनों गांवों के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि लंबे समय से चल रहा यह विवाद जल्द खत्म होगा। (Border Dispute in Narayanpur)
धान पंजीयन रद्द करने की मांग
वहीं सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के टेढ़ीभदरा ग्राम पंचायत के सैकड़ों ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने जगदीश नाम के शख्स के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन पर उनके पूर्वज पिछले 70-80 सालों से काबिज होकर रह रहे हैं, उस जमीन को जगदीश अपना बताकर धान पंजीयन करा रहा है और धान बेच भी रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि शासन-प्रशासन की गाइडलाइन के मुताबिक जिस जमीन पर मकान और बाड़ी बनी हो, उसे कृषि भूमि दिखाकर धान का पंजीयन नहीं कराया जा सकता। बावजूद इसके जगदीश पंजीयन कर धान बेच रहा है, जिससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अधिकारियों से सांठगांठ का आरोप
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश शासन के दौरान यह जमीन सिलिंग एक्ट के अंतर्गत थी, जिसे कथित तौर पर अधिकारियों की सांठगांठ से चंदादेवी के नाम कर दिया गया। अब उसी भूमि पर जगदीश भी मालिकाना दावा कर रहा है और पंजीयन करा रहा है। ग्रामीणों ने जगदीश के धान पंजीयन को तत्काल रद्द करने की मांग की है। अब देखना यह है कि ग्रामीणों की शिकायत पर प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और विवादित भूमि पर चल रही प्रक्रिया पर क्या फैसला लेता है।



