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बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- लंबे समय तक सहमति से चला रिश्ता दुष्कर्म नहीं

HC on Rape Case: बिलासपुर हाईकोर्ट ने सहमति से चले लंबे रिश्तों और उनसे जुड़े आपराधिक मामलों को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि दो वयस्कों के बीच लंबे समय तक सहमति से बना रिश्ता, बाद में टूट जाने की स्थिति में अपने आप दुष्कर्म का मामला नहीं बन जाता। इसके साथ ही कोर्ट ने इसे कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग और न्याय का उल्लंघन बताते हुए याचिकाकर्ता के खिलाफ दायर आरोप पत्र को निरस्त कर दिया है। मामला भिलाई की रहने वाली महिला की शिकायत से जुड़ा है। महिला ने मार्च 2020 में थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।

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शिकायत में यह भी कहा गया कि दोनों के बीच साल 2005 से संबंध थे और विरोध करने पर आरोपी ने उसे धमकी दी थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे ट्रायल कोर्ट में पेश किया था। पुलिस की इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए आरोपी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शिकायत, उपलब्ध तथ्यों और दोनों पक्षों के तर्कों पर विचार किया। हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता महिला खुद यह स्वीकार करती है कि वह आरोपी के साथ करीब 15 सालों तक रिश्ते में रही। इस दौरान वह नियमित रूप से आरोपी के संपर्क में रही और दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बने। (HC on Rape Case)

आरोपी के खिलाफ दाखिल आरोप पत्र निरस्त

कोर्ट ने यह भी माना कि महिला को रिश्ते के दौरान जातिगत अंतर और आरोपी की वैवाहिक स्थिति जैसी सामाजिक और निजी परिस्थितियों की जानकारी थी। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में जब रिश्ता लंबे समय तक आपसी सहमति से चला हो और शुरुआत में किसी प्रकार का धोखा साबित न हो तो सिर्फ शादी का वादा पूरा न होने के आधार पर दुष्कर्म का अपराध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि दो वयस्कों के बीच लंबे समय तक सहमति से चले रिश्ते को बाद में रिश्ता टूट जाने मात्र से दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि इतने लंबे समय तक किसी प्रकार की शिकायत न होना, यह दर्शाता है कि संबंध सहमति पर आधारित था। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि इस तरह की परिस्थितियों में आपराधिक कार्रवाई को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा और इससे न्याय प्रभावित होगा। इन्हीं आधारों पर कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ दाखिल आरोप पत्र को निरस्त कर दिया। (HC on Rape Case)

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