महंगाई रोकने के लिए बड़ा फैसला, अब विदेश नहीं जाएगी भारतीय चीनी, पढ़े पूरी खबर
Government Bans Sugar Export : केंद्र सरकार ने चीनी निर्यात को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए कच्ची, सफेद और रिफाइंड चीनी के एक्सपोर्ट पर तत्काल प्रभाव से 30 सितंबर 2026 तक प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों और सप्लाई चेन पर असर देखने को मिल रहा है।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की ओर से बुधवार देर रात जारी अधिसूचना में कहा गया कि यह प्रतिबंध 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा। इससे पहले सरकार ने अधिशेष उत्पादन की संभावना को देखते हुए सीमित मात्रा में चीनी निर्यात की अनुमति दी थी।
क्यों लिया गया फैसला?
सरकार को आशंका है कि यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहता है या भू-राजनीतिक तनाव के चलते उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो देश में चीनी उत्पादन पर असर पड़ सकता है। 2026-27 सीजन में कम बारिश और खाद की संभावित कमी के कारण उत्पादन घटने की संभावना जताई जा रही है। (Government Bans Sugar Export)
अनुमान के मुताबिक, 2025-26 सीजन में देश का चीनी उत्पादन 275 लाख टन रह सकता है। पुराने 50 लाख टन स्टॉक को मिलाकर कुल उपलब्धता 325 लाख टन होगी, जबकि घरेलू खपत 280 लाख टन रहने का अनुमान है। ऐसे में सीजन के अंत तक केवल 45 लाख टन स्टॉक बचने की संभावना है, जो 2016-17 के बाद सबसे कम स्तर माना जा रहा है। इसी कमजोर बफर स्टॉक को देखते हुए सरकार ने एहतियाती कदम उठाया है।
दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी निर्यातक भारत
ब्राजील के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक और निर्यातक देश है। सरकार ने पहले चीनी मिलों को 15.9 लाख मीट्रिक टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी। हालांकि, प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में कमजोर पैदावार के चलते उत्पादन लगातार दूसरे साल घरेलू खपत से कम रहने की आशंका है। (Government Bans Sugar Export)
किन मामलों में मिलेगी छूट?
DGFT ने स्पष्ट किया है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा-
- यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका को ‘तरजीही कोटा’ के तहत निर्यात जारी रहेगा।
- अन्य देशों की खाद्य सुरक्षा जरूरतों के लिए भारत सरकार के विशेष अनुरोध पर निर्यात की अनुमति दी जा सकती है।
- जिन खेपों की लोडिंग 13 मई से पहले शुरू हो चुकी थी या माल कस्टम विभाग को सौंपा जा चुका था, उन्हें रोका नहीं जाएगा।
व्यापारियों और मिलों पर असर
सरकार की ओर से पहले 15.9 लाख टन निर्यात की मंजूरी दी गई थी। इनमें से करीब 8 लाख टन के सौदे हो चुके थे, लेकिन केवल 6 लाख टन चीनी की ही शिपमेंट हो पाई थी। ऐसे में अचानक लगाए गए प्रतिबंध से चीनी मिलों और व्यापारियों के सामने कानूनी और वित्तीय चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
भारत के इस फैसले का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी देखने को मिला है। न्यूयॉर्क में कच्ची चीनी के वायदा भाव में करीब 2 प्रतिशत और लंदन में सफेद चीनी की कीमतों में लगभग 3 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई।



