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नरक चतुर्दशी बुधवार 3 नवम्बर 2021 : नरक चतुर्दशी को यह अवश्य करें, 14 दीप का क्या हैं महत्व, जानें सही विधि

नरक चतुर्दशी बुधवार 3 नवम्बर 2021 :

संध्या काल के समय दक्षिण दिशा की ओर मुंह कर हथेली में जल ,तिल( काले तथा सफेद दोनों प्रकार के तिलों का प्रयोग करे, क्योकि धर्म राज देव एवम यमराज पितृ स्वरूप है।) और कुश लेकर देव तीर्थ अर्थात हथेली के अग्र भाग से निम्न मंत्र बोलते हुए-

मंत्र : यमाय नमः नमः। धर्मराजाय नमः। मृत्युवे नमः । अनंताय नम:।वैवस्वताय नमः। कालाय नमः ।सर्व भूते क्षयाय। नमः ओदुम्बराय नमः । नीलाय नमः ।परमेष्ठीने नम: वृकोदराय नमः चित्राय नमः चित्रगुप्ताय नमः ।

दक्षिण दिशा में पृथ्वी पर जल हथेली का छोड़ दें।

इस समय यज्ञोपवीत धारक यज्ञोपवीत को कंठी की तरह रखें।

प्रदोष काल :17:35 मिनट से 20:07मिनट तक।

वृषभ काल :18:18 मिनट से 20:10: मिनट तक।

 2- यम की कृपा हेतु-‘ दीप दान –

आकस्मिक चोट अमृत यू से सुरक्षा हेतु समय- तर्पण उपरांत ।

14दीपक मे तिल तैल भरे। तिल डाले दीपक मे। रुई की सफेद बत्ती लंबी लेकर प्लस के आकार में रखें। दीप वर्तिका श्वेत रंग की आवश्यक।वर्तिका जलाते समय उत्तर दिशा मे मुह हो। 14दीपक की वती को अग्नि से प्रज्वालित कर। हथेली मे जल लेकर निम्न मंत्र बोल कर पृथ्वी पर छोड़ दे।

मंत्र : यम मार्ग अंधकार निवारण अर्थे चतुर्दश दीपा नाम दानम करिष्ये।

घर के पूजा कक्ष मे, शिव मंदिर, द्वार, बाउंड्री, घर के बगीचे, गली या घर के द्वार के बाहर, कोनो मे, पशु पालक पशु बांधने के स्थान मे रखे। दीप रखते समय ध्यान रखे कि,दीपक का मुह दक्षिण दिशा मे ही हो। यमराज की दिशा दक्षिण है, उनकी प्रसंन्ता के लिए दीपक दान करते है।

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3- चतुर्मुखी दीप दान(लिंग पुराण) 

उक्त कार्य के उपरांत एक दीपक मे, जिसमें तिल ,सरसों ,मूहुआ में से किसी का भी तेल प्रयोग भरे। दीपक मे प्लस आकार की चार बत्तियां लगाएं। यह सभी श्वेत रंग की होना चाहिए। इन चारों बच्चियों को प्रज्वलित करें। प्रज्वलित करते समय मुंह पूर्व(East) दिशा में हो।

मंत्रदत्तो दीप चतुर्दश्याम नरक प्रीतिये मया।चतुर वर्ती समायुक्त: सर्व पाप अनूत्तये। 

चतुर नरक चतुर्दशी को चार बत्ती युक्त दीपक समस्त पापों के नाश के लिए मैं दान करता हूं।

4- अग्नि से मृत पूर्वजो की सद्गति के लिए – 

आकाशीय बिजली उल्का आदि से मृत पूर्वजों के लिए आकाश गामी( राकेट आदि )पटाखे दक्षिण दिशा की ओर मुंह कर छोड़ना चाहिए ।

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आकाश गामी आतिशबाजी या पटाखे छोड़ने के पूर्व कहना चाहिए कि :

“अग्नि से जिन पूर्वज की मृत्यु हुई हो अथवा बिजली गिरने से या आकाशीय अग्नि से जिनकी मृत्यु हुई हो, ऐसे समस्त पूर्वजों की को परम गति प्राप्त हो, इसलिए यह प्रकाश युक्त आकाश गामी आतिशबाजी छोड़ रहा हूं।                            इससे उल्का से मृत पूर्वजों को सद्गति प्राप्त होती है ।

मंत्र भी बोल सकते हैं-

अग्नि दग्धशच ये जीवा येप्य दग्धा कुले मम। उज्जवल ज्योतिषा दग्ध अस्ते यान्तु परमाम गतिम्।

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