रविवार 19 सितम्बर के वैदिक उपाय : आज ग्रह जन्य अनिष्ट नाशक एवं सफलता के लिए वैदिक उपाय, मनोकामना होगी पूरी

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अनमोल न्यूज 24 

19 सितम्बर 2021, दिन – रविवार। रोजगार,व्यापर या कार्य विशेष हेतु प्रस्थान के पूर्व : गुड, या आम रस, पदार्थ कच्ची केरी चटनी आम का रस आदि ग्रहण करना चाहिए। ग्रहण कर प्रस्थान करना चाहिए।  

भोजन (ग्रहण या उपयोग करना चाहिए) : जो barly, भात। 

दान पदार्थ– भोजन पात्र। 

तिल का तेल लाल रंग (चुकंदर,लाल पत्ते की भाजी,कोई भी लाल रंग की सब्जी )। काँसे के बर्तन में भोजन करना निषिद्ध है।

कार्य के पूर्व : देवदेवेश्वर सदाशिव की पूजा करके मनुष्य समस्त ऐश्वर्यों से समन्वित हो जाता है तथा बहुत से पुत्रों एवं धन संपन्न होता है।

ॐ विष्णवे नम:। ॐ देव देवेश्वराय नम:।

तुला, मकर राशी वाले बाधा नाश के लिए अवश्य मंत्र का जाप करे।

 सुख, सौभाग्य वृद्धिके लिए : कुंडली में, दशा –अन्तर्दशा में होने पर,अशुभ भाव में होने पर दोष के अनिष्ट नाश हेतु अथवा सूर्य ग्रह की प्रसन्नता/कृपा के लिए उपाय : किसी भी मन्त्र के अंत में अवश्य कहे, 

सर्व सिद्धिम, सफलताम च सर्व वान्छाम पूरय पूरय में नम:/स्वाहा। 

स्नान जल मे कनेर पुष्प ,केसर,खसइलायची मिला कर स्नान करें। 

सूर्य देव को जल अर्पण करे। 

मंत्र – खखोलकाय नमः।

बाधा मुक्ति के लिए दान :-

गुड, लाल वस्त्र, पुष्प तांबा नारंगी वस्तु, लाल चन्दन कनेर लाल पुष्प। 

दान :- लाल गाय, सूर्य मंदिर, 10 वर्ष तक के बच्चे, विष्णु, कृष्ण मंदिर मे दे सकते है। 

दिन दोष आपत्ति निराककरण के लिए घर से प्रस्थान पूर्व क्या खाएं :–

(What to take Before Departure from Home for Redressal of Day Blame Objection)

रसाल, आम, घी, पान में से कोई भी पदार्थ। 

सफलता के लिए आज के मंत्र :-

सूर्य देव का गायत्री पंचपाद मंत्र

ओम सप्त तुरंगाय विद्महे सहस्त्र किरणाय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्। आपो ज्योति रस अमृतम। परो रजसे सावादोंम। 

प्रत्येक गायत्री मन्त्र के बाद अवश्य पठनीय (त्रिपद मन्त्र गृहस्थ हेतु अशुभ )

आपो ज्योति रस अमृतं। परो रजसे सावदोम। 

सूर्य गायत्री मन्त्र –

1. सूर्य ॐ भूर्भुवः स्वः तत सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
2. ॐ आदित्याय विद्महे सहस्रकिरणाय धीमहि तन्नो भानुः प्रचोदयात् ॥
3. ॐ प्रभाकराय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात् ॥
4. ॐ अश्वध्वजाय विद्महे पाशहस्ताय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात् ॥
5. ॐ भास्कराय विद्महे महद्द्युतिकराय धीमहि तन्न आदित्यः प्रचोदयात् ॥
6. ॐ आदित्याय विद्महे सहस्रकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात् ॥
7. ॐ भास्कराय विद्महे महातेजाय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात् ॥
8. ॐ भास्कराय विद्महे महाद्द्युतिकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात् ॥
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥

जैन मंत्र :-

ऊँ ह्रीं अर्हं सूर्य ग्रहारिष्ट निवारक।
श्री पद्म प्रभु जिनेन्द्राय नमः सर्वशांतिं कुरू कुरू स्वाहा।
मम (अपना नाम) दुष्ट ग्रह रोग कष्टनिवारणं सर्वशांतिं कुरू कुरू हूँ फट् स्वाहा।
1.  ग्रहाणामाआदिरात्यो लोकरक्षणकारक:।
विषमस्थानसम्भूतां पीडां हरतु मे रवि:।।
ग्रहों में प्रथम परिगणितअदिति के पुत्र तथा विश्व की रक्षा करने वाले, भगवान सूर्य विषम स्थानजनित मेरी पीड़ा का हरण करें।। (ब्रह्माण्डपुराण के अनुसार)
2. ॐ आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च। हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन्। (यजु. 33। 4334। 31)

शाबर मन्त्र (श्रद्धा आवश्यक,शुद्धता सामान्य) :

ओम गुरूजी दीत दीत महादीत।दूत सिमरू दसो द्वार।
घट मे राखे घेघट पार तो गुरू पावूं दीतवार।।
दीतवार कश्यप गोत्र,रक्त वर्ण जाप सात हजार कलिंग देश मध्य स्थान वर्तुलाकार मंडल १२ अंगुल सिंह राशि के गुरू को नमस्कार। सत फिरे तो वाचा फिरे,पीन फूल वासना सिंहासनधरेतो इतरो काम दीतवार जी महाराज करेओम फट् स्वाहा।