पत्नी के कर्ज का दबाव बना काल, कारीगर ने की आत्महत्या, पढ़े पूरी खबर
उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। कर्ज के दबाव और लगातार बढ़ते आर्थिक तनाव से परेशान एक टाइल्स कारीगर ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान चकेरी कैंट क्षेत्र के मैकूपुरवा निवासी 45 वर्षीय बाबूराम निषाद के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पत्नी द्वारा लिए गए कर्ज और आर्थिक दबाव के कारण बाबूराम लंबे समय से मानसिक तनाव में थे।
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घर में मिला शव, काम पर न पहुंचने पर हुआ खुलासा
घटना शुक्रवार दोपहर की बताई जा रही है। बाबूराम रोज की तरह काम पर नहीं पहुंचे तो उनके कार्यस्थल से घर पर फोन किया गया। इसके बाद उनके भतीजे रवि निषाद सहित अन्य परिजन घर पहुंचे।
घर का दरवाजा अंदर से बंद नहीं था। जब परिजन अंदर गए तो नीचे के कमरे में पंखे से साड़ी के सहारे बाबूराम का शव लटका मिला। घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई।
मौके पर पहुंची पुलिस, शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा
सूचना मिलते ही चकेरी कैंट पुलिस मौके पर पहुंची। जांच-पड़ताल के बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
थाना प्रभारी अरविंद राय ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।
तीन साल से मायके में रह रही थी पत्नी
परिजनों के अनुसार, बाबूराम निषाद टाइल्स लगाने का काम कर मेहनत-मजदूरी से परिवार का खर्च चलाते थे। उनकी पत्नी अनीता पिछले करीब तीन साल से मायके (चकेरी के घाऊखेड़ा) में रह रही थीं। दंपति की कोई संतान नहीं थी।
भतीजे रवि निषाद ने बताया कि उनकी चाची ने कई संस्थाओं और मोहल्ले के लोगों से लाखों रुपये का कर्ज ले रखा था। उनका कहना था कि होटल और रेस्टोरेंट के कारोबार में नुकसान होने के कारण उन्हें कर्ज लेना पड़ा।
कर्ज चुकाते-चुकाते टूट गए बाबूराम
परिजनों का आरोप है कि पत्नी के अलग रहने के कारण कर्ज देने वाले लोग बाबूराम से ही पैसे की मांग करते थे। बाबूराम अपनी कमाई से कर्ज चुकाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन लगातार तगादे और आर्थिक दबाव के चलते वे पूरी तरह टूट चुके थे।
परिजनों के मुताबिक, उनकी हालत ऐसी हो गई थी कि जेब तक खाली हो चुकी थी, और मानसिक तनाव के कारण उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठा लिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है और मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। यह घटना एक बार फिर कर्ज और पारिवारिक तनाव के गंभीर सामाजिक प्रभाव को उजागर करती है।



