बेटी की जान बचाई, तो डॉक्टर को मान लिया भोलेनाथ, 31 लीटर गंगाजल से करेगा जलाभिषेक, पढ़े पूरी खबर
कांवड़िए ने गंगाजल अर्पित करने के लिए चुना भगवान के रूप में डॉक्टर को
बागपत (उत्तर प्रदेश)। शिवभक्ति का महीना श्रावण अपने साथ भावनाओं, आस्था और अद्भुत कथाओं को लेकर आता है। ऐसा ही एक मानवता से भरा वाकया बागपत जिले के बड़ौत से सामने आया है, जहां एक कांवड़िए ने अपनी श्रद्धा का केंद्र किसी मंदिर को नहीं, बल्कि एक डॉक्टर को बनाया — जिसने उसकी नवजात बेटी की जान बचाई।
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बड़ौत निवासी विशाल भारद्वाज इस बार हरिद्वार से 31 लीटर गंगाजल लेकर लौट रहे हैं। मगर यह गंगाजल किसी शिव मंदिर में अर्पित नहीं किया जाएगा, बल्कि वह इसे अपनी बेटी की जान बचाने वाले डॉक्टर के चरणों में चढ़ाएंगे।
प्रीमैच्योर बेटी को मिला जीवन, डॉक्टर बने देवता
विशाल की बेटी समय से पहले (प्रीमैच्योर) पैदा हुई थी और उसकी हालत बेहद नाजुक थी। परिवार पर जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इसी दौरान बड़ौत के प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिनव तोमर ने बच्ची को अपने निगरानी में रखा। करीब डेढ़ महीने की सतत देखभाल के बाद बच्ची की हालत में सुधार आया और वह स्वस्थ हो गई।
“डॉक्टर में देखा भोलेनाथ का रूप” , भावुक होकर विशाल ने कहा – “मैंने साक्षात भोलेनाथ को डॉक्टर के रूप में देखा है। उन्होंने मेरी बेटी को जीवनदान दिया।
विशाल ने अपनी कांवड़ पर डॉ. अभिनव तोमर की तस्वीर भी लगाई है। उनका कहना है कि वे पहले इस गंगाजल को भगवान शिव के चरणों में अर्पित करेंगे और फिर डॉक्टर के क्लीनिक जाकर उनके चरणों में भी यह जल समर्पित करेंगे।
श्रद्धा, आभार और इंसानियत का अद्वितीय संगम
इस पूरी घटना ने न सिर्फ डॉक्टरों के प्रति सम्मान को बढ़ाया है, बल्कि यह भी दर्शाया है कि सच्चे सेवा भाव से किया गया कार्य किसी ईश्वर की पूजा से कम नहीं होता। विशाल का यह कदम कांवड़ यात्रा की परंपरा को एक नवीन, मानवीय अर्थ देता है — जिसमें भक्ति के साथ कृतज्ञता भी झलकती है।



