छत्तीसगढ़ में हिड़मा के ढेर होते ही क्रेडिट वार शुरू, कांग्रेस ने कहा- हिड़मा का खात्मा 5 साल की हमारी तैयारी का परिणाम
Credit War on Hidma: छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश बॉर्डर पर सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई में नक्सली कमांडरों में शामिल हिड़मा के ढेर होने के बाद सियासत भी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि हिड़मा जैसे खूंखार नक्सली का मारा जाना सुरक्षाबलों के मनोबल को बढ़ाने वाली बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि हिड़मा का मारा जाना नक्सलियों की कमर तोड़ने वाली बात है। जवानों को यह बड़ी सफलता मिली है और यह नक्सलियों के लिए भारी नुकसान है, लेकिन पूर्व CM ने मौजूदा सरकार पर आरोप लगाया कि उसने आदिवासी विकास की नीतियों को कमजोर कर दिया है। बघेल ने कहा कि उनकी सरकार में आदिवासियों को रोजगार देना और बस्तर समेत पूरे आदिवासी अंचल का विकास प्राथमिकता थी, लेकिन वर्तमान सरकार उस रास्ते पर चलने में विफल रही है।
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उन्होंने कहा कि हमारी नीति आदिवासियों को रोजगार देना और उनके विकास को आगे बढ़ाना रही है, लेकिन अब वह नहीं हो पा रहा है। यह इस सरकार की विफलता है। पूर्व डिप्टी CM टीएस सिंहदेव ने इस सफलता को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि नक्सल मोर्चे पर यह सिर्फ एक दिन का काम नहीं, बल्कि सालों की लगातार कार्रवाई का परिणाम है। सिंहदेव ने कहा कि हिड़मा नक्सलियों का बड़ा लीडर था। इसकी मौत एक अहम उपलब्धि है। लगातार कार्रवाई चल रही है और कई नक्सली हथियार डाल रहे हैं। हिंसा का रास्ता अपनाने वालों का अंत भी हिंसक ही होता है। उन्होंने झीरम घाटी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि हिड़मा का नाम वहां आया जरूर, लेकिन उस घटना की सच्चाई आज भी पूरी तरह सामने नहीं आई।
झीरम घाटी हमले को लेकर TS सिंहदेव ने कहा कि अभी बहुत कुछ बाकी है। जांच तो हुई ही नहीं। हिड़मा का नाम किस बिंदु पर आया ? झीरम नक्सली घटना नहीं, प्रायोजित घटना थी। जब तक पूरी बात सामने नहीं आएगी, न्याय नहीं मिलेगा। सिंहदेव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर दो साल में कार्रवाई तेज हुई है तो उसके प्रमाण सामने हैं, लेकिन नक्सलवाद खत्म करने की प्रक्रिया पिछले एक दशक से चल रही है। कांग्रेस सरकार में भी कई बड़े एनकाउंटर हुए। सिल्गेर की घटना उसी समय की है। श्रेय लेने की राजनीति नहीं होनी चाहिए। (Credit War on Hidma)
2026 से पहले भी खत्म हो सकता है नक्सलवाद: टीएस सिंहदेव
राज्य और केंद्र सरकार की ओर से बताए गए लक्ष्य पर उन्होंने कहा कि संयुक्त कार्रवाई जारी है। मार्च 2026 से पहले भी नक्सलवाद खत्म हो सकता है, बशर्ते जमीनी स्तर के लोग कहें कि गतिविधियां समाप्त हो चुकी हैं। पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने भी हिड़मा के मारे जाने पर सुरक्षाबलों को बधाई दी, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि नक्सल मोर्चे पर कांग्रेस सरकार की नींव मजबूत थी। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ और जवानों को बधाई। 5 साल की कांग्रेस सरकार को भी धन्यवाद। सुरक्षा और शिक्षा के स्तर पर जो काम कांग्रेस ने किया, उसी का नतीजा आज दिख रहा है। उपाध्याय ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने बस्तर में भरोसा पैदा किया। कांग्रेस ने रोजगार और शिक्षा के लिए काम किया। यही वह दौर था, जिसने नक्सलियों के मनोबल को सबसे ज्यादा तोड़ा। आज की सरकार उन्हीं नीतियों को आगे बढ़ा रही है।



