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रामकृष्ण केयर अस्पताल में सुरक्षा मानकों की अनदेखी, तीन मजदूरों की मौत मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान

Ramakrishna Care Hospital Case: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 17 मार्च को पचपेड़ी नाका स्थित रामकृष्ण केयर अस्पताल में सेप्टिक टैंक की सफाई करते समय तीन मजदूरों की मौत ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया है और जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। दरअसल, गोविंद सेंद्रे (35), अनमोल मांझी (25) और प्रशांत कुमार (22) को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के टैंक के अंदर उतारा गया, जिसमें जहरीली गैस जमा होने के कारण तीनों का दम घुट गया और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

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मृतकों के परिजनों ने आरोप लगाया कि न तो अस्पताल प्रबंधन और न ही ठेकेदार ने मजदूरों को कोई सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराया। इस हादसे ने स्थानीय लोगों और परिजनों में गुस्सा भड़का दिया और अस्पताल परिसर में जमकर विरोध किया गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन और प्रबंधन से कड़ी कार्रवाई की मांग की। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस घटना की गंभीरता को देखते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने जिला मजिस्ट्रेट और रायपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर दो हफ्ते के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में जांच की वर्तमान स्थिति, दोषियों की पहचान और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय बताने को कहा गया है।

Death in Sewage Tank

पुलिस ने हादसे के तुरंत बाद ठेकेदार किशन सोनी के खिलाफ लापरवाही बरतने की धाराओं में FIR दर्ज की। जांच में यह सामने आया कि मुख्य जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन की भी थी। इसके बाद प्रबंधन को भी आरोपी बनाया गया और दोनों पर एट्रोसिटी एक्ट यानी SC/ST एक्ट की धारा जोड़ी गई। सहायक पुलिस आयुक्त नवनीत पाटिल ने बताया कि मामले में मैनुअल स्कैवेंजिंग एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा रही है। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि मजदूरों को टैंक में मैन्युअल तरीके से उतारा गया, जबकि मैनुअल स्कैवेंजिंग पर पूरी तरह रोक है। टैंक में गैस टेस्टिंग नहीं की गई, वेंटिलेशन या रेस्क्यू सिस्टम नहीं था और सुरक्षा उपकरण जैसे मास्क, बेल्ट या ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध नहीं थे। इस वजह से तीनों मजदूरों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला।

हरदीप सिंह गिल ने भी कही थी कार्रवाई की बात

राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष हरदीप सिंह गिल भी रायपुर पहुंचे और मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मामले में SC/ST एक्ट और मैनुअल स्कैवेंजिंग एक्ट के तहत FIR दर्ज की जाए और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। घटना के दूसरे दिन नगर निगम रायपुर ने मैनुअल स्कैवेंजिंग पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश जारी किए। निगम ने रायपुरवासियों से अपील की कि वे इस प्रथा को रोकने में सहयोग करें और किसी भी उल्लंघन की सूचना तुरंत निगम या कलेक्टर कॉल सेंटर पर दें। (Ramakrishna Care Hospital Case)

अनदेखी और जिम्मेदारी की कमी उजागर

इस हादसे ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी और जिम्मेदारी की कमी को उजागर किया है। मामले की जांच अभी भी जारी है और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग इस पर कड़ी निगरानी रखेगा। प्रशासन और पुलिस के समन्वित प्रयासों से उम्मीद की जा रही है कि दोषियों को जल्द सजा मिले और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके। यह हादसा सिर्फ तीन मजदूरों की जान लेने वाली त्रासदी ही नहीं है, बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और मानवाधिकारों के उल्लंघन का प्रतीक भी है। अस्पताल प्रबंधन और ठेकेदार की लापरवाही ने इन परिवारों की खुशियों को हमेशा के लिए छीन लिया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, पुलिस और जिला प्रशासन की जांच अब यह सुनिश्चित करेगी कि दोषियों को कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़े और भविष्य में किसी और मजदूर की जान जोखिम में न पड़े।

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