Google Analytics —— Meta Pixel

छत्तीसगढ़ की 35 युवतियां झारखंड में बंधक, नौकरी और नर्सिंग ट्रेनिंग के नाम पर ले जाकर रोके जाने का आरोप

Chhattisgarh Girls Trapped: छत्तीसगढ़ की बेटियों को नौकरी और नर्सिंग ट्रेनिंग का सपना दिखाकर झारखंड ले जाने और वहां बंधक बनाकर रखने का मामला सामने आया है। कांकेर जिले समेत प्रदेश के अलग-अलग इलाकों की करीब 35 युवतियों के झारखंड के गढ़वा जिले में फंसे होने की सूचना ने प्रशासन से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है। मामला तब सामने आया, जब कांकेर की दुर्गूकोंदल क्षेत्र की एक युवती ने चोरी-छिपे अपने गांव के युवक को वीडियो और मैसेज भेजकर मदद की गुहार लगाई। वायरल वीडियो में धमतरी जिले के कुरूद की एक लड़की रोते हुए कहती दिखाई दे रही है कि उसे वहां अच्छा नहीं लग रहा और वह घर वापस जाना चाहती है, लेकिन उसके पास पैसे नहीं हैं। वीडियो में एक महिला ने कहा कि पैसा नहीं दिया है, इसे नहीं जाने देंगे।

यह भी पढ़ें:- छत्तीसगढ़ में अगले 4 दिन बारिश-आंधी का अलर्ट, 60 किमी रफ्तार से चलेंगी हवाएं

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही प्रशासन हरकत में आया। इसके बाद झारखंड और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों की पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक युवतियों को नर्सिंग कार्य और रोजगार का झांसा देकर झारखंड के गढ़वा जिले ले जाया गया था। वहां उन्हें ट्रेनिंग दिलाने की बात कही गई थी, लेकिन अब आरोप लग रहे हैं कि कई लड़कियों को जबरन रोका गया और उनसे काम कराया जा रहा था। कांकेर कलेक्टर नीलेश कुमार क्षीरसागर ने बताया कि कुछ लड़कियां अपनी इच्छा से काम के लिए गई थी, लेकिन एक युवती ने बंधक बनाए जाने की शिकायत की है। प्रशासन लगातार झारखंड के गढ़वा कलेक्टर और एसपी के संपर्क में है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच जारी है और स्थिति स्पष्ट होते ही टीम भेजकर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

गढ़वा पुलिस की स्पेशल टीम जांच में जुटी

झारखंड के गढ़वा जिले की पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच टीम गठित की है। युवतियों की तलाश और संभावित मानव तस्करी नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है। सामाजिक कार्यकर्ता ललित नरेटी समेत कई संगठनों ने भी रेस्क्यू अभियान शुरू करने की मांग की है। प्रशासनिक स्तर पर दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच समन्वय जारी है। बता दें कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं और लड़कियों के गायब होने का मुद्दा पहले भी विधानसभा में उठ चुका है। बावजूद इसके मानव तस्करी और नौकरी के नाम पर युवतियों को बाहर ले जाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। (Chhattisgarh Girls Trapped)

विशेषज्ञों का कहना है कि बेरोजगारी, गरीबी और बेहतर जिंदगी की चाह का फायदा तस्कर गिरोह उठा रहे हैं। ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में सक्रिय नेटवर्क नौकरी, शादी या अच्छी कमाई का लालच देकर युवतियों को दूसरे राज्यों में ले जाते हैं, जहां कई बार उनका शोषण होता है। इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में मानव तस्करी और महिलाओं के गायब होने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार तत्काल SIT गठित करे और अब तक गायब हुई सभी लड़कियों को खोजकर वापस लाए। साथ ही झारखंड में फंसी युवतियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए। (Chhattisgarh Girls Trapped)

चौंकाने वाले आंकड़े बढ़ा रहे चिंता

वहीं महिला और बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि उन्हें मामले की पूरी जानकारी है और वे कांकेर कलेक्टर के सीधे संपर्क में हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल सिर्फ एक लड़की ने वापस आने की इच्छा जताई है और अभी तक बंधक बनाए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि प्रशासन पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रहा है और जो लड़कियां वापस आना चाहती हैं उन्हें सुरक्षा के साथ छत्तीसगढ़ लाया जाएगा। छत्तीसगढ़ में औसतन रोज 30 महिलाएं और बच्चियां लापता होती हैं। इनमें 10 से 12 नाबालिग लड़कियां शामिल हैं। 2023 से जनवरी 2026 तक 36,662 महिलाएं और बच्चियां लापता हुईं। इनमें से 7,000 से ज्यादा अब तक घर नहीं लौट पाईं। इसी अवधि में 10,753 नाबालिग लड़कियां गायब हुईं। बहला-फुसलाकर ले जाने के 11,825 मामले दर्ज हुए। सरगुजा, जशपुर, बस्तर, कोरबा और बलरामपुर मानव तस्करी के हॉटस्पॉट माने जा रहे हैं। गरीबी, बेरोजगारी और पलायन तस्करों के लिए बड़ा हथियार बन रहे हैं।

कबीरधाम में 13 नाबालिग बच्चों से बंधुआ मजदूरी

इसी बीच कबीरधाम जिले में पुलिस ने बाल तस्करी और बंधुआ मजदूरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बैगा जनजाति के 13 नाबालिग बच्चों को मुक्त कराया है। पुलिस के मुताबिक बच्चों को उनके माता-पिता को पैसों का लालच देकर अलग-अलग गांवों से ले जाया गया था और उनसे जबरन मजदूरी कराई जा रही थी। बच्चों से सुबह से शाम तक मवेशी चराने और कठिन काम कराए जाते थे, जबकि उनके परिवारों को सिर्फ 1000 से 2000 रुपए प्रतिमाह दिए जाते थे। मामले में 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इसे बाल अधिकारों और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया है। SP धर्मेंद्र सिंह ने लोगों से अपील की है कि बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी या मानव तस्करी जैसी गतिविधियों की जानकारी मिलते ही तुरंत पुलिस को सूचना दें। फिलहाल झारखंड में फंसी युवतियों की सुरक्षित वापसी को लेकर परिवारों की चिंता बढ़ी हुई है। पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक रोजगार और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर बेटियों को मानव तस्करी के जाल में फंसाया जाता रहेगा।

Back to top button
error: Content is protected !!