चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग से बोले ट्रंप…आपका दोस्त होना सम्मान की बात, रिश्ते पहले से बेहतर होंगे, जिनपिंग ने कहा- ट्रेड वॉर में कोई नहीं जीतता

Trump Meet Jinping: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की, जिसने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में दोनों नेताओं की करीब दो घंटे तक बंद कमरे में बातचीत हुई, जिसमें व्यापार, टैरिफ, ताइवान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रेयर अर्थ मिनरल्स, ईरान युद्ध और यूक्रेन संकट जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक की शुरुआत में जिनपिंग ने कहा कि अमेरिका और चीन को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार बनना चाहिए, क्योंकि ट्रेड वॉर में कोई विजेता नहीं होता। वहीं ट्रम्प ने जिनपिंग की तारीफ करते हुए कहा कि आपका दोस्त होना सम्मान की बात है और दावा किया कि अमेरिका-चीन रिश्ते अब पहले से बेहतर होने वाले हैं।
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बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में ट्रम्प का औपचारिक स्वागत किया गया। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और दोनों नेताओं ने हाथ मिलाकर वार्ता की शुरुआत की। इस दौरान सैकड़ों स्कूली बच्चे अमेरिका और चीन के झंडे लहराते नजर आए। ट्रम्प के साथ दुनिया की बड़ी अमेरिकी कंपनियों के शीर्ष कारोबारी भी चीन पहुंचे, जिनमें एलोन मस्क, टिम कुक और जेन्सेन हुआंग जैसे नाम शामिल रहे। खास बात यह रही कि एनवीडिया CEO जेनसन हुआंग आखिरी समय में ट्रम्प के प्रतिनिधिमंडल में शामिल हुए, जिससे AI चिप्स और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी पर संभावित बातचीत की अटकलें तेज हो गईं। बैठक के दौरान जिनपिंग ने कहा कि पूरी दुनिया इस वार्ता पर नजर लगाए हुए हैं और दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ अमेरिका और चीन ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी बेहद अहम हैं। (Trump Meet Jinping)

उन्होंने कहा कि दोनों देशों को टकराव से बचकर सहयोग का रास्ता अपनाना चाहिए। जिनपिंग ने यह भी कहा कि चीन अमेरिकी कंपनियों के लिए अपने दरवाजे और ज्यादा खोलेगा और अमेरिकी उद्योग लंबे समय से चीन के आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक दोनों देशों ने रिश्तों को रचनात्मक, रणनीतिक और स्थिर दिशा देने पर सहमति जताई है। वार्ता में ताइवान मुद्दा भी प्रमुख रूप से उठा। जिनपिंग ने चेतावनी दी कि अगर ताइवान मामले को सही तरीके से नहीं संभाला गया तो अमेरिका-चीन रिश्ते खतरनाक मोड़ पर पहुंच सकते हैं। चीन ने एक बार फिर साफ किया कि वह ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और अमेरिकी हथियार बिक्री का विरोध करता है। इसके जवाब में ताइवान सरकार ने चीन को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अस्थिरता की सबसे बड़ी वजह बताया।

ताइवान कैबिनेट की प्रवक्ता मिशेल ली ने कहा कि क्षेत्र में तनाव का मुख्य कारण चीन की सैन्य गतिविधियां हैं। ट्रम्प और जिनपिंग के बीच व्यापारिक रिश्तों को लेकर भी अहम बातचीत हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन अमेरिकी कंपनी बोइंगसे करीब 9 लाख करोड़ रुपए के विमानों की खरीद का बड़ा समझौता कर सकता है। इसे दुनिया की सबसे बड़ी एविएशन डील्स में से एक माना जा रहा है। इसी बीच चीन ने 15 महीने बाद अमेरिकी बीफ आयात को फिर मंजूरी दे दी है और सैकड़ों अमेरिकी मीट प्रोसेसिंग कंपनियों को निर्यात लाइसेंस दोबारा जारी किए हैं। इसे ट्रम्प-जिनपिंग बैठक से पहले रिश्तों में नरमी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। ट्रेड टैरिफ, सोयाबीन निर्यात और कृषि व्यापार भी बैठक के केंद्र में रहे। अमेरिकी किसान लंबे समय से चीन के साथ स्थिर ट्रेड डील की मांग कर रहे हैं। ट्रम्प प्रशासन चाहता है कि चीन अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद बढ़ाए, जबकि चीन टैरिफ और टेक्नोलॉजी प्रतिबंधों में नरमी चाहता है।

रेयर अर्थ मिनरल्स और AI टेक्नोलॉजी पर भी दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज होती दिखी। अमेरिका चीन पर तकनीकी निर्भरता कम करना चाहता है, जबकि चीन वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी पकड़ बनाए रखना चाहता है। बैठक में ईरान और यूक्रेन युद्ध पर भी चर्चा हुई। अमेरिका चाहता है कि चीन ईरानी तेल की खरीद कम करे ताकि तेहरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जा सके। वहीं चीन ने इसे अपनी ऊर्जा जरूरतों से जुड़ा मामला बताया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट और पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर भी दोनों देशों के बीच रणनीतिक बातचीत हुई है। ट्रम्प ने बैठक के बाद बीजिंग के ऐतिहासिक टेंपल ऑफ हेवन का दौरा भी किया, जहां उन्होंने चीन को बहुत खूबसूरत बताया। (Trump Meet Jinping)

शाम को राष्ट्रपति जिनपिंग ट्रम्प के सम्मान में स्टेट डिनर का आयोजन करेंगे, जिसे चीन की तरफ से बड़े कूटनीतिक सम्मान के तौर पर देखा जा रहा है। 8 साल बाद ट्रम्प के चीन दौरे और दोनों नेताओं की लंबी बैठक को ऐसे समय में बेहद अहम माना जा रहा है, जब दुनिया व्यापारिक तनाव, युद्ध और आर्थिक अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से जारी ट्रेड वॉर, ताइवान तनाव और टेक्नोलॉजी प्रतिस्पर्धा के बीच हुई यह शिखर वार्ता दुनिया के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। ट्रम्प और जिनपिंग की मुलाकात से रिश्तों में नरमी और बड़े आर्थिक समझौतों के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन ताइवान, AI और ईरान जैसे मुद्दों पर मतभेद अब भी कायम हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि दोनों महाशक्तियां प्रतिस्पर्धा से आगे बढ़कर सहयोग का रास्ता कितना अपनाती हैं।



