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दुनिया पर नया वायरस खतरा? खांसी-बुखार से शुरू होकर मौत तक पहुंचता है हंता वायरस, WHO की चेतावनी के बाद बढ़ी चिंता

Hanta Virus Alert: स्पेन के कैनरी द्वीप स्थित टेनेरिफ एयरपोर्ट पर हंता वायरस प्रभावित क्रूज शिप ‘MV होंडियस’ से लौटे यात्रियों में संक्रमण के नए मामले सामने आने के बाद वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। अब अमेरिका, फ्रांस और स्पेन के तीन और यात्रियों में हंता वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनमें एक अमेरिकी और एक फ्रांसीसी नागरिक अपने-अपने देश लौट चुके हैं, जबकि मैड्रिड में क्वारैंटाइन किए गए एक स्पेनिश नागरिक की शुरुआती रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। इसके साथ ही इस जहाज से जुड़े कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है। अब तक 3 यात्रियों की मौत हो चुकी है।

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बताया जा रहा है कि ये सभी यात्री ‘MV होंडियस’ नाम के क्रूज शिप में सफर कर चुके थे, जहां सबसे पहले वायरस के मामले सामने आए थे। जहाज स्पेन के कैनरी आइलैंड्स में रुका था। संक्रमण फैलने के बाद स्पेनिश अधिकारियों ने टेनेरिफ एयरपोर्ट पर यात्रियों को विमान में बैठाने से पहले डिसइन्फेक्टेंट स्प्रे किया और स्वास्थ्य जांच की प्रक्रिया अपनाई। इस मामले में पहली मौत 11 अप्रैल को जहाज पर यात्रा कर रहे एक बुजुर्ग डच यात्री की हुई थी। बाद में उनकी पत्नी दक्षिण अफ्रीका में मृत मिली। इसके बाद 2 मई को एक जर्मन महिला की भी जहाज पर मौत हो गई। (Hanta Virus Alert)

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अब तक जहाज से जुड़े 9 मामलों की पुष्टि की है और सभी संपर्क में आए लोगों के लिए 42 दिनों तक आइसोलेशन और निगरानी की सिफारिश की है। हालांकि अमेरिकी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) ने स्पष्ट किया है कि हंतावायरस कोविड-19 की तरह तेजी से फैलने वाला वायरस नहीं है और इंसान से इंसान में संक्रमण के मामले बेहद दुर्लभ हैं। इसके बावजूद एहतियात के तौर पर अमेरिका के 17 यात्रियों को नेब्रास्का मेडिकल सेंटर लाकर विशेष क्वारैंटाइन यूनिट में रखा गया है। यहां उन्हें 42 दिनों तक निगरानी में रखा जाएगा।

1 से 8 हफ्ते बाद दिखते हैं लक्षण, तेजी से बिगड़ती है हालत

विशेषज्ञों के मुताबिक हंता वायरस के लक्षण संक्रमण के 1 से 8 हफ्तों के भीतर दिखाई दे सकते हैं। शुरुआती दौर में तेज बुखार, थकान, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, उल्टी और कमजोरी जैसे लक्षण सामने आते हैं। बाद में मरीज को खांसी, सीने में जकड़न और सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगती है। गंभीर स्थिति में फेफड़ों में पानी भर सकता है और किडनी फेल होने का खतरा भी बढ़ जाता है। WHO के मुताबिक हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS) की मृत्यु दर 35 से 40 प्रतिशत तक हो सकती है। कई मामलों में मरीज की हालत बेहद तेजी से बिगड़ती है और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत पड़ती है। फिलहाल इस वायरस का कोई निश्चित इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर मरीज के लक्षणों के आधार पर इलाज करते हैं।

जानवरों से फैलता है वायरस

हंता वायरस मुख्य रूप से संक्रमित चूहों, गिलहरियों और अन्य कृन्तकों के मल, पेशाब और लार से फैलता है। दूषित हवा में सांस लेने से भी संक्रमण हो सकता है। वायरस का नाम दक्षिण कोरिया की हंटन नदी के नाम पर रखा गया है। WHO के मुताबिक हंतावायरस की एंडीज स्ट्रेन इंसान से इंसान में भी फैल सकती है। संक्रमित व्यक्ति की लार, थूक, साथ खाना खाने या लंबे समय तक करीबी संपर्क में रहने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। मरीज की देखभाल करने वाले लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की सलाह दी गई है। CDC के कार्यवाहक निदेशक जय भट्टाचार्य ने कहा कि अधिकारियों द्वारा संक्रमित लोगों के करीबी संपर्कों की पहचान की जा रही है और उसी आधार पर उन्हें कम, मध्यम या ज्यादा जोखिम वाली श्रेणी में रखा जाएगा। (Hanta Virus Alert)

RT-PCR से होती है जांच, 4-5 घंटे में आती है रिपोर्ट

उन्होंने कहा कि वायरस कोविड की तरह हवा में तेजी से नहीं फैलता, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। हंता वायरस की जांच के लिए मरीज की नाक या गले से स्वैब सैंपल लिया जाता है। इसके बाद लैब में RT-PCR टेस्ट किया जाता है, जिसकी रिपोर्ट आमतौर पर 4 से 5 घंटे में मिल जाती है। बुखार, सांस लेने में तकलीफ या कमजोरी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत जांच और इलाज की सलाह दी जाती है। नेब्रास्का मेडिकल सेंटर अमेरिका की विशेष फेडरल क्वारंटीन सुविधा है, जहां खतरनाक और संक्रामक बीमारियों के मरीजों के इलाज और निगरानी की व्यवस्था है। यहां के कमरों में नेगेटिव एयर प्रेशर सिस्टम लगाया गया है, जिससे वायरस हवा में बाहर नहीं फैल पाता। (Hanta Virus Alert)

भारत में भी सामने आ चुके हैं हंता वायरस के मामले

डॉक्टर माइकल वाडमैन के मुताबिक यात्रियों को होटल जैसी सुविधाएं दी गई हैं। उन्हें कमरे में भोजन, हल्की एक्सरसाइज और नियमित स्वास्थ्य जांच की सुविधा दी जा रही है। यदि किसी यात्री की तबीयत बिगड़ती है, तो उसे बायोकंटेनमेंट यूनिट में शिफ्ट किया जाएगा। भारत में भी पहले हंतावायरस संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं। 2007 में आंध्र प्रदेश में एक व्यक्ति में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। इसके बाद 2008 में चूहे और सांप पकड़ने वाले 28 लोगों में वायरस मिला था। वहीं 2016 में मुंबई में एक महिला की मौत हंता वायरस संक्रमण से हुई थी। महिला को डिलीवरी के बाद तेज बुखार, पेट दर्द और सांस लेने में दिक्कत हुई थी। बाद में जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई।

क्या है हंता वायरस?

हंतावायरस एक दुर्लभ लेकिन बेहद खतरनाक वायरस है, जो मुख्य रूप से चूहों और कृन्तकों से फैलता है। यह हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS) जैसी गंभीर बीमारी का कारण बनता है। विशेषज्ञों के मुताबिक बुजुर्गों, कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों और पहले से बीमार मरीजों में इसका खतरा ज्यादा होता है। फिलहाल बचाव ही सबसे बड़ा उपाय माना जा रहा है।
स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार यह स्पष्ट कर रही हैं कि हंतावायरस कोविड-19 की तरह तेजी से फैलने वाला वायरस नहीं है, लेकिन इसकी मृत्यु दर काफी अधिक होने के कारण इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। WHO और CDC ने यात्रियों की निगरानी बढ़ा दी है और संक्रमण से जुड़े हर संपर्क की पहचान की जा रही है, ताकि वायरस को फैलने से रोका जा सके।

हंता वायरस के प्रमुख लक्षण

  • तेज बुखार और थकान
  • मांसपेशियों में दर्द
  • सिरदर्द और कंपकंपी
  • जी मचलाना और उल्टी
  • खांसी और सांस लेने में दिक्कत
  • सीने में जकड़न
  • कमजोरी और लो ब्लड प्रेशर
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