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सब्जी बेचने वाला निकला करोड़ों के IPL सट्टा रैकेट का मास्टरमाइंड

‘सेट स्पोर्ट बुक’ और ‘लोटस एप’ से चलता था ऑनलाइन जुए का खेल, गरीबों के बैंक खातों से घूम रहे थे करोड़ों रुपये, दुर्ग पुलिस की रेड में 13 आरोपी गिरफ्तार, मास्टरमाइंड कुणाल वर्मा बेनकाब

दुर्ग (छत्तीसगढ़)। आईपीएल 2026 के रोमांच के बीच दुर्ग पुलिस ने ऑनलाइन सट्टेबाजी के एक ऐसे बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। इस हाईटेक सट्टा गिरोह का मास्टरमाइंड बताया जा रहा कुणाल वर्मा कभी सब्जी बेचने का काम करता था, लेकिन कुछ ही वर्षों में वह करोड़ों रुपये के ऑनलाइन सट्टा कारोबार का बड़ा खिलाड़ी बन गया।

पुलिस कार्रवाई में कुल 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया कि गिरोह ‘सेट स्पोर्ट बुक’ और ‘लोटस एप’ जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए आईपीएल मैचों पर बड़े स्तर पर सट्टा संचालित कर रहा था। पूरा नेटवर्क बेहद सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा था, मानो कोई कॉर्पोरेट कंपनी ऑपरेट हो रही हो।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक गिरोह का सबसे खतरनाक हिस्सा था “म्यूल अकाउंट सिस्टम”। आरोपी स्लम एरिया और गरीब परिवारों के लोगों को लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद पासबुक, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और चेकबुक अपने कब्जे में ले लेते थे। एक बैंक पासबुक के बदले करीब 25 हजार रुपये तक दिए जाते थे।

इन्हीं खातों के जरिए करोड़ों रुपये का लेन-देन किया जा रहा था। अब तक की जांच में करीब 5 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन का खुलासा हुआ है, जबकि पुलिस को आशंका है कि वास्तविक रकम इससे कहीं ज्यादा हो सकती है।

पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब पुलिस को समन्वय पोर्टल के जरिए संदिग्ध ट्रांजेक्शन और ऑनलाइन गतिविधियों की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने सबसे पहले चरोदा निवासी जावेद अख्तर और आभास जायसवाल को हिरासत में लिया। पूछताछ में दोनों ने कई अहम खुलासे किए, जिसके बाद धीरे-धीरे पूरा नेटवर्क पुलिस के सामने खुलता चला गया।

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह का नेटवर्क सिर्फ दुर्ग-भिलाई तक सीमित नहीं था, बल्कि हैदराबाद तक फैला हुआ था। आरोपियों को भिलाई से हैदराबाद ले जाकर वहां से ऑनलाइन पैनल ऑपरेट कराया जाता था। आईपीएल मैच शुरू होते ही करोड़ों रुपये का दांव लगाया जाता था और हर मैच के साथ नेटवर्क और सक्रिय हो जाता था।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक दस्तावेज, नगदी और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से जुड़े कई रिकॉर्ड जब्त किए हैं। इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों की जांच में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

दुर्ग पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। जांच आगे बढ़ने के साथ कई और नाम सामने आ सकते हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क के फाइनेंसर, तकनीकी मददगार और दूसरे राज्यों से जुड़े लिंक की भी जांच कर रही है।

आईपीएल के बढ़ते क्रेज के बीच ऑनलाइन सट्टेबाजी का यह खेल युवाओं और आम लोगों को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहा है। दुर्ग पुलिस की यह कार्रवाई ऐसे नेटवर्क चलाने वालों के लिए बड़ा संदेश मानी जा रही है।

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