मैं सीना तानकर कह सकता हूं कि भारत अब नक्सल-मुक्त हो चुका है: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह

Shah on Naxalism Ending: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जगदलपुर में शहीदों के परिजनों, CAPFs और नक्सल पीड़ितों के साथ मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं सीना तानकर कह सकता हूं कि भारत नक्सल मुक्त हो चुका है। यह ऐसा सपना था, जिसे साकार करने के लिए हजारों जवानों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि 6 दशकों तक नक्सलवाद को देश की जनता ने एक दुःस्वप्न की तरह झेला है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र के लिए तो यह भीषण रक्तपात, विकास का अंधेरा और युवाओं के सामने अंधकारमय भविष्य था ही, लेकिन जिन राज्यों में नक्सलवाद नहीं था, वहां के लोग भी संवेदनशीलता के साथ इस क्षेत्र की चिंता करते थे। उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि तीन पीढ़ियों तक जिस नक्सलवाद को समाप्त नहीं किया जा सका, उसे हमारे वीर जवानों ने मात्र तीन सालों में समाप्त कर दिखाया।
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शाह ने कहा कि 21 जनवरी 2024, 24 अगस्त 2024 और 31 मार्च 2026 की तीन तारीखें नक्सल उन्मूलन के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों से लिखी जाएंगी। छत्तीसगढ़ में हमारी सरकार बनने के बाद नक्सलवाद पर 21 जनवरी 2024 को नक्सलवाद पर पहली बैठक हुई, 24 अगस्त 2024 को 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प और 31 मार्च 2026 को इस संकल्प की पूर्ति – ये तीन तिथियां नक्सलमुक्त भारत अभियान के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित होंगे। मां दंतेश्वरी की कृपा है कि 31 मार्च 2026 को नक्सल मुक्त बस्तर बनाने का हमारा लक्ष्य आखिरकार पूरा हो गया। गृहमंत्री ने कहा कि बस्तर में शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा प्रकल्प की शुरुआत हुई। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में हमारे लगभग 200 CAPF कैंप हैं। (Shah on Naxalism Ending)

अमित शाह ने कहा कि ये 200 कैंप अब तक यहां के आदिवासियों, किसानों, बच्चों और महिलाओं की नक्सलियों से सुरक्षा का काम करते थे। इन 200 में से 70 कैंप शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा के नाम से जाने जाएंगे और इस क्षेत्र को विकसित करने का मॉडल बनेंगे। यहां से 371 योजनाओं का काम ऑनलाइन हो सकेगा। राशन कार्ड और आधार कार्ड जन सेवा केंद्र से बन सकेगा, साथ ही सस्ता अनाज नहीं मिलने की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है, बैंक अकाउंट भी इस केंद्र से ऑपरेट हो सकेगा। स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। यह डेयरी मिल्क कलेक्शन सेंटर का भी काम करेगा।

उन्होंने कहा कि अच्छी खेती करने के लिए कृषि विभाग का मार्गदर्शन भी मिलेगा। यहां कौशल विकास केंद्र ग्रामीणों के रोजगार का केंद्र बनेगा और वहीं प्रौढ़ शिक्षा का काम शुरू होगा। उन्होंने कहा कि तीन माह के भीतर हम एनआईडी के सहयोग से इसका पूरा नक्शा तैयार कर एक सम्पूर्ण विकास परियोजना शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा के नाम से जमीन पर उतारने का काम करेंगे। इससे नक्सलियों के समर्थक बुद्धिजीवियों को संदेश मिलेगा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद इसलिए नहीं फैला था कि यहां विकास नहीं था, बल्कि यहां विकास नहीं होने का कारण ही हथियारबंद नक्सल अभियान था। अब हथियारबंद नक्सल अभियान समाप्त हो गया है।

गृहमंत्री अमित शाह ने विश्वास जताया कि देश के सभी आदिवासी संभागों में बस्तर सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इस देश के गरीब, पिछड़े, दलित, आदिवासियों के लिए ढेर सारी योजनाएं बनाई हैं। किसानों का धान 3100 क्विंटल की दर से खरीदने की योजना मौजूद है, मगर बस्तर के किसान कभी बेच नहीं पाए। हर आदिवासी को घर में प्रति व्यक्ति प्रति माह 7 किलो धान-चावल मिलता है, मगर यहां के लोगों को हमारी सरकार आने से पहले नहीं मिला। भर्तियों में बस्तर के युवाओं को मौका ही नहीं मिला। (Shah on Naxalism Ending)

उन्होंने कहा कि बस्तर के व्यंजन जितने स्वादिष्ट व्यंजन उन्होंने भारत भर में कहीं नहीं खाए। यहां की कला, खेल, संगीत, नृत्य और यहां की परंपराओं को नक्सलियों ने नष्ट कर दिया था। उन्होंने हजारों लोगों के जीवन को रौंदने का काम किया, लेकिन आज बस्तर एक नया सवेरा देख रहा है और विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए संकल्पबद्ध है। यह ऐतिहासिक पल ऐसे ही नहीं आया। आज कार्यक्रम में मौजूद कुछ लोगों ने अपने परिजनों का खून बहते देखा है। अपने प्रियजनों को गंवाया है। शहीद सुरक्षाकर्मियों के परिजन भी यहां हैं। निर्दोष आदिवासी परिवारों के लोगों को निर्ममता से मार दिया गया। ऐसे भी लोग कार्यक्रम में हैं, जो नक्सलियों का साथ छोड़कर डीआरजी जॉइन कर इस अभियान को सफल बनाने में लगे हैं। (Shah on Naxalism Ending)

केंद्रीय अमित शाह ने कहा कि नक्सलियों के खिलाफ अभियान की सफलता में डीआरजी के सिपाहियों और कोबरा के जवानों का बड़ा योगदान है। नक्सलियों के खिलाफ वे सबसे बहादुरी से लड़े। सुरक्षाबलों के सामूहिक प्रयास से ही हम यह शुभ दिन देख रहे। सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, छत्तीसगढ़ पुलिस, डीआरजी, एसटीएफ, बस्तर फाइटर, सभी राज्यों के पुलिस फोर्स, सबके संयुक्त अभियान से ही हम सफलता प्राप्त कर पाए। उन्होंने कहा कि सरेंडर करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के अभियान में समाज के प्रमुख लोगों का बहुत बड़ा योगदान रहा। बस्तर के पत्रकारों और विभिन्न जनप्रतिनिधियों का बहुत बड़ा योगदान रहा। गृहमंत्री ने उनके प्रति आभार प्रकट किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, डिप्टी CM विजय शर्मा, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, आसूचना ब्यूरो के निदेशक तपन डेका, नक्सलमुक्त राज्यों के पुलिस महानिदेशक समेत कई लोग उपस्थित थे।



