बलौदाबाजार: श्री गणपति महायज्ञ में महंत रामरूप दास महाराज का आगमन, विश्व शांति और कल्याण की कामना

Shri Ganpati Mahayagya: बलौदाबाजार नगर में चल रहे श्री गणपति महायज्ञ के चौथे दिन मदकू द्वीप के महंत रामरूप दास महाराज का आगमन हुआ। महंत ने महायज्ञ में सम्मिलित होकर यज्ञ भगवान की परिक्रमा की और विश्व कल्याण, सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। इसके बाद उन्होंने यज्ञ स्थल पर उपस्थित धर्मप्रेमियों को अपने आशीर्वचन से कृतार्थ किया। यज्ञ के चौथे दिन की संध्या में नित्य पूजन और हवन के बाद धमतरी से आए पंडित अशोक शास्त्री ने परम शिवभक्त श्रृंगी ऋषि की कथा सुनाई। उनकी कथा और भजनों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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महंत रामरूप दास ने मदकू द्वीप के धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए वहां निर्माणाधीन देवी शक्ति मंदिर के विषय में विस्तृत जानकारी साझा की। महायज्ञ में यज्ञाचार्य पंडित द्वारिका प्रसाद शास्त्री, पंडित अशोक शास्त्री, पंडित पुरणेंद्र पांडेय, और पंडित बद्रीप्रसाद तिवारी समेत कई विद्वानों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। मुख्य यजमान पंडित ताराचंद शर्मा और उनकी पत्नी लक्ष्मी शर्मा, पंडित शिवप्रकाश तिवारी, सविता तिवारी समेत कई श्रद्धालुओं ने महायज्ञ में अपनी सहभागिता निभाई। यज्ञ समिति के प्रमुख सदस्य महेंद्र वर्मा, मोतीराम वर्मा, सुरेंद्र जायसवाल, प्रमोद शुक्ल, प्यारेलाल सेन, वरूमल केशरवानी, राजेश केशरवानी, आयुष गुप्ता, रवि यादव, आशीष मिश्रा, और अन्य श्रद्धालुओं ने महंत का स्वागत करते हुए स्मृति चिन्ह भेंट किया। (Shri Ganpati Mahayagya)
गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति
महायज्ञ में पूर्व पाठ्यपुस्तक निगम अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी, पूर्व कृषक कल्याण आयोग अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा, नगर के प्रमुख नागरिकों, माताओं और बहनों ने दर्शनलाभ लिया और महंत जी से आशीर्वाद प्राप्त किया। श्री गणपति महायज्ञ के आयोजन में श्रद्धालुओं का उत्साह और महंत जी के मार्गदर्शन ने कार्यक्रम को और भी ज्यादा पवित्र और प्रेरणादायक बना दिया। बता दें कि श्री गणपति महायज्ञ की शुरुआत 16 जनवरी से हुई है, जो 26 जनवरी 2025 तक जारी रहेगी। अंतिम दिन आरती, विसर्जन के बाद भंडारा और प्रसाद वितरण का कार्यक्रम होगा, जिसमें यज्ञ समिति के सदस्यों ने श्रद्धालुओं से सहभागिता के लिए आह्वान किया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस आध्यात्मिक आयोजन से लाभान्वित हो सकें। (Shri Ganpati Mahayagya)



