Agni 3 Missile का सफल परिक्षण, इससे चंद मिनटों में तबाह हो जाएगा बीजिंग और इस्लामाबाद

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Agni 3 Missile : ओडिशा के अब्दुल कलाम व्हीलर आईलैंड पर Agni 3 Missile का सफल परीक्षण किया गया। 11 साल हो चुके हैं इस मिसाइल को सेना में शामिल किए हुए। यह एक इंटरमीडिएट-रेंज की बैलिस्टिक मिसाइल है। जो परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। हालांकि, पारंपरिक और थर्मोबेरिक हथियारों से भी हमला कर सकती है। इसमें एक साथ कई टारगेट पर हमला करने वाली तकनीक MIRV जैसी ही समान टेक्नोलॉजी है।

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Agni 3 Missile की खासियत

Agni-3 मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत उसकी गति है। लेकिन उससे पहले हम इसकी रेंज की बात करते हैं। इस मिसाइल (Agni 3 Missile) की रेंज 3 से 5 हजार किलोमीटर बताई जाती है। यानी हथियार का वजन कम या ज्यादा करके रेंज को बढ़ाया या कम किया जा सकता है।

Agni-3 मिसाइल की गति मैक 15 है। यानी 18,522 किलोमीटर प्रतिघंटा। यानी 5 से 6 किलोमीटर प्रति सेकेंड की स्पीड। 17 मीटर लंबी इस मिसाइल का वजन 50 हजार किलोग्राम है। कहते हैं कि एक अग्नि-3 मिसाइल बनाने में 25 से 35 करोड़ रुपये की लागत आती है। इसे 8×8 ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर से छोड़ा जाता है।

कुछ ही मिनटों में तबाह हो जाएगा बीजिंग-इस्लामाबाद

चीन की राजधानी बीजिंग की दिल्ली से हवाई दूरी 3791 किलोमीटर है। अग्नि-3 मिसाइल 5-6 किलोमीटर प्रति सेकेंड की स्पीड से चलती है। उस हिसाब से बीजिंग की दूरी 12.63 मिनट में पूरी हो जाएगी। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद की हवाई दूरी 679 किलोमीटर है। यहां तो अग्नि-3 मिसाइल मात्र ढाई मिनट में तबाही मचा देगी।

Agni 3 Missile की सेकेंड स्ट्राइक की क्षमता में इजाफा

अग्नि-3 मिसाइल समेत भारत के पास जितने भी परमाणु हथियार हैं, उनपर नीति एकदम साफ है। अग्नि सीरीज की मिसाइलों से सेकेंड स्ट्राइक की क्षमता बढ़ जाती है। अग्नि-3 मिसाइल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है। यह एक दो स्टेज वाली मिसाइल है, जो सॉलिड ईंधन से उड़ती है।

450 KM की ऊंचाई तक जाने की क्षमता

अग्नि-3 मिसाइल अपने टारगेट से अगर 40 मीटर यानी 130 फीट दूर भी गिरती है। तो तबाही 100 फीसदी पक्की है। इसे सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) कहते हैं। यह मिसाइल आसमान में अधिकतम 450 किलोमीटर की ऊंचाई तक जा सकती है। यानी दुश्मन के सैटेलाइट्स को मारने की क्षमता भी इसमें है।

उड़ान के बीच बदल सकती है अपना रास्ता

Agni-3 मिसाइल में रिंग लेजर गाइरोस्कोप इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम लगा है। यानी यह मिसाइल उड़ते समय बीच में रास्ता बदल सकती है। उड़ते समय ही यह इंफ्रारेड होमिंग, राडार सीन कोरिलेशन और एक्टवि राडार होमिंग की मदद से दुश्मन पर हमला करती है। इस मिसाइल का पहला टेस्ट 9 जुलाई 2006 को हुआ था। लेकिन वह असफल था। मिसाइल टारगेट से पहले गिर गई थी।

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2490 KG वजनी हथियार लगा सकते हैं

अग्नि-3 मिसाइल को सुधारा गया। इसके बाद 2007 में फिर परीक्षण किया गया। टारगेट की धज्जियां उड़ा दी गईं। अग्नि-3 मिसाइल भारत की मिसाइलों में सबसे भरोसेमंद, ताकतवर और तेज गति की मिसाइल है। इसमें परमाणु बम भी लगा सकते हैं। आग उगलने वाले थर्मोबेरिक हथियार भी लगा सकते हैं। साल 2010 में इसका फिर परीक्षण किया गया था। तब भी इसने टारगेट पर सटीकता के साथ हमला किया था। इस मिसाइल पर 2490 किलोग्राम वजनी हथियार तैनात किया जा सकता है। साल 2013, 2015, 2017 में भी इसके सफल परीक्षण हो चुके हैं।

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