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विधानसभा का शीतकालीन सत्र खत्म, 35 घंटे की कार्यवाही, 628 सवाल और तीखी बहसबाजी

CG Winter Session Ended: छत्तीसगढ़ विधानसभा का शीतकालीन सत्र बुधवार को हंगामे और तीखी बहसबाजी के बीच संपन्न हो गया। सत्र के समापन पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि यह सत्र 14 से 17 दिसंबर तक चला, जिसमें कुल 5 बैठकें आयोजित की गई। सत्र के पहले दिन की कार्यवाही पुराने विधानसभा भवन में हुई, जबकि दूसरे दिन से नई विधानसभा भवन में सदन की कार्यवाही शुरू हुई। अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बताया कि एक ही सत्र का दो अलग-अलग भवनों में आयोजन होना छत्तीसगढ़ विधानसभा के इतिहास में पहली बार हुआ है। उन्होंने इसे विधानसभा के इतिहास की एक यादगार और ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।

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डॉ. रमन सिंह ने कहा कि सदन में ‘विजन 2047’ को लेकर सार्थक और व्यापक चर्चा हुई, जिसमें राज्य के भविष्य के रोडमैप पर गंभीर मंथन किया गया। शीतकालीन सत्र होने के बावजूद सदन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर उपयोगी बहस हुई और अनुपूरक बजट समेत अहम विधायी कार्य पूरे किए गए। सत्र की 5 बैठकों में कुल 35 घंटे 33 मिनट तक कार्यवाही चली। इस दौरान तारांकित 333 और अतारांकित 295 समेत कुल 628 प्रश्न प्राप्त हुए, जिनमें 11 प्रश्नों पर अनुपूरक प्रश्न पूछे गए। इसके अलावा 232 ध्यानाकर्षण सूचनाएं प्राप्त हुई, जिनमें से 70 स्वीकार की गई और 20 को शून्यकाल में परिवर्तित किया गया। वहीं 101 स्थगन सूचनाएं और 196 याचिकाएं सदन में प्रस्तुत की गई, जिनमें 36 याचिकाएं स्वीकार की गई।

अंतिम दिन हंगामेदार रहा सदन

सत्र के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरा होने के अवसर पर भी सदन में चर्चा हुई, जिसे अध्यक्ष ने ऐतिहासिक महत्व का बताया। शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन सदन की कार्यवाही नेशनल हेराल्ड मामले को लेकर हंगामेदार रही। सदन शुरू होते ही कांग्रेस विधायकों ने ‘सत्यमेव जयते’ लिखी तख्तियां लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। स्पीकर की ओर से तख्तियों के साथ सदन में बैठने की अनुमति नहीं दिए जाने पर विपक्ष ने विरोध जारी रखा, जिसके चलते सदन की कार्यवाही दो बार 10-10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। (CG Winter Session Ended)

डिप्टी CM का विपक्ष पर हमला

पूर्व CM भूपेश बघेल ने जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए सरकार पर निशाना साधा। वहीं पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई। कांग्रेस के प्रदर्शन पर डिप्टी CM अरुण साव ने कहा कि आसंदी के बार-बार मना करने और चेतावनी के बावजूद विपक्ष का पोस्टर चिपकाकर सदन में प्रवेश करना विधानसभा की मर्यादा और परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि एक परिवार की चाटुकारिता में कांग्रेस सारी सीमाएं लांघ चुकी है। विपक्ष की ओर से जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग को लेकर लाया गया स्थगन प्रस्ताव आसंदी से अस्वीकार किए जाने के बाद सदन का माहौल और गरमा गया। विपक्ष ने ‘सत्यमेव जयते’ के नारे लगाए, जबकि सत्ता पक्ष ने ‘वंदे मातरम्’ के नारों से जवाब दिया।

स्पीकर ने जताई नाराजगी

प्रश्नकाल की कार्यवाही बाधित होने पर स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि लोकहित से जुड़े मुद्दों पर सदन की कार्यवाही को बाधित करना निंदनीय है। विपक्षी सदस्य संसदीय परंपराओं से भली-भांति परिचित हैं, इसके बावजूद उनका आचरण अमर्यादित रहा। उन्होंने आगे ऐसी पुनरावृत्ति न करने की चेतावनी दी। शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने सदन में 35,000 करोड़ रुपए का अनुपूरक बजट पेश किया। वित्तीय वर्ष समाप्त होने से ठीक तीन महीने पहले लाए गए इस बजट को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। (CG Winter Session Ended)

विपक्ष ने बजट पर उठाए सवाल

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि यह अनुपूरक बजट प्रदेश के विकास को गति देगा। विधायक अजय चंद्राकर ने इसे छत्तीसगढ़ के इतिहास का सबसे बड़ा अनुपूरक बजट बताया और कहा कि राजस्व व्यय बढ़ाने की शुरुआत पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने की थी।कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ लगातार कर्ज में डूबता जा रहा है। ऐसे में वित्तीय वर्ष के अंतिम तीन महीनों में 35 हजार करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट लाना समझ से परे है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में कोई ठोस विजन नजर नहीं आता। (CG Winter Session Ended)

बिजली बिल को लेकर वार

राघवेंद्र सिंह ने कहा कि महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को एक हजार रुपए दिए जा रहे हैं, लेकिन बिजली बिल के नाम पर उससे ज्यादा राशि वसूली जा रही है। उन्होंने सरकार पर इवेंट मैनेजमेंट पर ज्यादा और काम पर कम ध्यान देने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि नए पदों पर भर्ती, नियमितीकरण और किसानों को समय पर भुगतान जैसे वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। सड़कों, धान, आदिवासी, किसान, युवा और महिलाओं के विकास के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय कर काम करने की जरूरत है। इस तरह छत्तीसगढ़ विधानसभा का शीतकालीन सत्र उपलब्धियों, बहसों और राजनीतिक टकराव के बीच समाप्त हुआ।

 
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