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ऑनलाइन फार्मेसी के विरोध में देशभर में मेडिकल स्टोर बंद, जानिए मेडिकल व्यवसायियों के क्या-क्या मांगें ?

Chemists Protest Against E Pharmacy: देशभर में आज दवाइयों की दुकानें बंद रहीं। ऑनलाइन फार्मेसी और ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म के विरोध में मेडिकल व्यवसायियों ने 24 घंटे की राष्ट्रव्यापी हड़ताल की। यह बंद ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर किया गया। छत्तीसगढ़ समेत देश के कई राज्यों में मेडिकल स्टोरों के शटर गिरे रहे। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और जांजगीर-चांपा समेत कई जिलों में मेडिकल व्यवसायियों ने प्रदर्शन किया, बाइक रैली निकाली और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। मेडिकल व्यवसायियों का आरोप है कि ऑनलाइन दवा कंपनियां नियमों का उल्लंघन करते हुए बिना वैध डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन के दवाइयों की बिक्री कर रही हैं। उनका कहना है कि इससे न सिर्फ छोटे मेडिकल व्यापारियों का कारोबार प्रभावित हो रहा है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है।

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AIOCD के आह्वान पर देशभर के लाखों मेडिकल स्टोर संचालकों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। मेडिकल संगठनों का कहना है कि ई-फार्मेसी कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर पारंपरिक मेडिकल दुकानों को नुकसान पहुंचा रही हैं। इसके साथ ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिना पर्ची दवा बिक्री, प्रतिबंधित और नशीली दवाओं की उपलब्धता जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।बिलासपुर में लगभग सभी निजी मेडिकल दुकानें सुबह से बंद रहीं। दवा दुकानों के बंद रहने से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि मरीजों की सुविधा को देखते हुए सरकारी दवा दुकानों को खुला रखा गया। मेडिकल व्यवसायियों ने शहर में बाइक रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। व्यवसायियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री से छोटे व्यापारियों का रोजगार प्रभावित हो रहा है। साथ ही दवाओं की गुणवत्ता और बिना डॉक्टर की पर्ची दवा बिक्री को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

दुर्ग में 1700 मेडिकल दुकानें बंद

दुर्ग जिले में करीब 1700 मेडिकल दुकानों के संचालकों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। छत्तीसगढ़ केमिस्ट और ड्रगिस्ट एसोसिएशनके पदाधिकारियों का कहना है कि कोविड काल में जरूरी दवाओं की उपलब्धता के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की भूमिका अहम थी, लेकिन अब इसका दुरुपयोग हो रहा है। व्यापारियों का आरोप है कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन के प्रतिबंधित और नशीली दवाइयां बेच रहे हैं। इससे लोगों की सेहत पर खतरा बढ़ रहा है। जांजगीर-चांपा में भी मेडिकल दुकानें बंद रहीं। ऑनलाइन दवा बिक्री और भारी डिस्काउंट के विरोध में केमिस्ट संघों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान नकली दवाइयों की बिक्री पर रोक लगाने की मांग भी उठाई गई। राजधानी रायपुर में भी जिला दवा विक्रेता संघ ने AIOCD के समर्थन में एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी बंद का समर्थन किया। हालांकि प्रशासन के निर्देश पर शासकीय अस्पतालों और जनऔषधि केंद्रों में जरूरी दवाइयों की व्यवस्था जारी रही, ताकि मरीजों को परेशानी न हो।

क्या हैं मेडिकल व्यवसायियों की प्रमुख मांगें ?

  • GSR 817(E) अधिसूचना रद्द करने की मांग- मेडिकल व्यवसायियों की मांग है कि सरकार ऑनलाइन दवाओं की बिक्री को लेकर जारी GSR 817(E) अधिसूचना को वापस ले और नया नियामकीय ढांचा तैयार करे।
  • GSR 220(E) खत्म करने की मांग- कोविड-19 महामारी के दौरान लागू की गई GSR 220(E) अधिसूचना को पूरी तरह समाप्त करने की मांग की गई है।
  • डीप डिस्काउंटिंग पर रोक की मांग- ऑनलाइन कंपनियों द्वारा दिए जा रहे भारी डिस्काउंट पर रोक लगाने या ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर में संशोधन कर खुदरा दुकानदारों का मार्जिन बढ़ाने की मांग की गई है।

क्या है GSR 817(E)?

GSR 817(E) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा साल 2018 में जारी किया गया एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन है। इसका उद्देश्य भारत में ई-फार्मेसी के लिए रेगुलेटरी ढांचा तैयार करना था। इसमें ऑनलाइन फार्मेसी का रजिस्ट्रेशन, डॉक्टर के पर्चे की जांच, ग्राहकों की सुरक्षा और नियमों के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई जैसे प्रावधान प्रस्तावित किए गए थे। हालांकि इसे अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है।

क्या है GSR 220(E) ?

कोविड-19 महामारी के दौरान GSR 220(E) को आपातकालीन व्यवस्था के रूप में लागू किया गया था। इसके तहत रजिस्टर्ड मेडिकल स्टोर को होम डिलीवरी के जरिए दवाइयां पहुंचाने की अनुमति दी गई थी। केमिस्ट संगठनों का आरोप है कि ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियां इसी नियम का फायदा उठाकर इंटरनेट पर दवाओं की बिक्री कर रही हैं। (Chemists Protest Against E Pharmacy)

सरकार के अगले कदम पर टिकी नजरें

देशभर में हुई हड़ताल ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि तकनीक और ऑनलाइन कारोबार के बढ़ते प्रभाव के बीच छोटे व्यापारियों का भविष्य कितना सुरक्षित है। सालों से लोगों की जरूरत के समय दवाइयां उपलब्ध कराने वाले मेडिकल दुकानदार अब खुद अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ते नजर आ रहे हैं। केमिस्ट संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा। तकनीक और ऑनलाइन कारोबार के तेजी से बढ़ते दौर में अब छोटे मेडिकल व्यापारियों का अस्तित्व बड़ा सवाल बनता जा रहा है। केमिस्ट संगठनों का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ठोस नियम और नियंत्रण लागू नहीं किए तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा। फिलहाल देशभर में हुई इस हड़ताल के बाद अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है।

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