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ऑनलाइन फार्मेसी के विरोध में छत्तीसगढ़ बंद, प्रदेशभर में बंद रही दवा दुकानें, जानिए कहां-कहां दिखा असर

Medicine Traders Protest: ऑनलाइन दवा बिक्री, अवैध ई-फार्मेसी संचालन और कॉर्पोरेट कंपनियों की मनमानी के विरोध में बुधवार को राजधानी रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में दवा दुकानों पर ताले लटके रहे। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के आह्वान पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी बंद का व्यापक असर प्रदेश के लगभग सभी जिलों में देखने को मिला। दवा व्यापारियों ने ऑनलाइन फार्मेसी को जन-स्वास्थ्य और पारंपरिक मेडिकल व्यवसाय दोनों के लिए बड़ा खतरा बताते हुए केंद्र सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है। दवा विक्रेताओं का कहना है कि अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री, डीप डिस्काउंट और कॉर्पोरेट कंपनियों के बढ़ते हस्तक्षेप से छोटे और पारंपरिक मेडिकल स्टोर्स का कारोबार प्रभावित हो रहा है।

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व्यापारियों ने केंद्र सरकार से जीएसआर 220 और जीएसआर 817 जैसी अधिसूचनाएं वापस लेने की मांग भी उठाई है। इस बंद को चेंबर ऑफ कॉमर्स का भी समर्थन मिला। हालांकि खाद्य और औषधि प्रशासन ने दावा किया कि आम लोगों को दवाओं की कमी नहीं होने दी गई। प्रशासन के निर्देश पर शासकीय अस्पतालों, जनऔषधि केंद्रों, धनवंतरी मेडिकल स्टोर्स और अन्य वैकल्पिक केंद्रों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई थी। सरगुजा जिले में भी बंद का व्यापक असर देखने को मिला। औषधि विक्रेता संघ के आह्वान पर जिले की दवा दुकानें पूरी तरह बंद रहीं। संघ ने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री आज जन-स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। उनका कहना है कि लोग अन्य सामान ऑनलाइन खरीद सकते हैं, लेकिन स्वास्थ्य के साथ समझौता नहीं किया जा सकता।

दुर्ग जिले की 1700 मेडिकल दुकानें बंद

संघ ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन मिलने वाली दवाओं की गुणवत्ता, स्रोत और सत्यता का कोई ठोस रिकॉर्ड नहीं होता, जिससे इनके दुरुपयोग और नशे की प्रवृत्ति बढ़ने का खतरा पैदा हो रहा है। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने ऑनलाइन दवाओं की अनियंत्रित बिक्री पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो भविष्य में अनिश्चितकालीन हड़ताल भी की जा सकती है। दुर्ग जिले में भी मेडिकल व्यापारियों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल को समर्थन दिया। जिले की करीब 1700 मेडिकल दुकानें बंद रहीं। छत्तीसगढ़ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के सचिव अविनाश अग्रवाल ने कहा कि कोविड काल में लोगों तक जरूरी दवाएं पहुंचाने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग शुरू हुआ था, लेकिन अब इसका गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन दवाओं को मेडिकल स्टोर से बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के नहीं दिया जा सकता, वे ऑनलाइन आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। इससे प्रतिबंधित और नशीली दवाओं का दुरुपयोग बढ़ रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म निम्न गुणवत्ता वाली दवाएं बेच रहे हैं, जिससे लोगों की सेहत खतरे में पड़ रही है और अपराध भी बढ़ रहे हैं। संघ ने बताया कि छत्तीसगढ़ में करीब 8500 दवा दुकानें हैं, जिनमें से अधिकांश इस बंद में शामिल रहीं। उन्होंने कहा कि लंबे समय से फार्मासिस्ट अपनी मांगें स्वास्थ्य मंत्रालय तक पहुंचाते रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बिलासपुर में भी ऑनलाइन मेडिकल कारोबार के विरोध में मेडिकल व्यवसायियों ने प्रदर्शन किया। शहर की लगभग सभी निजी मेडिकल दुकानें बंद रहीं। हालांकि मरीजों की सुविधा को देखते हुए सरकारी दवा दुकानों को खुला रखा गया। मेडिकल व्यवसायियों ने बाइक रैली निकालकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री से छोटे व्यापारियों का कारोबार प्रभावित हो रहा है और दवाओं की गुणवत्ता तथा नियमों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने ऑनलाइन मेडिकल कारोबार पर नियंत्रण लगाने की मांग की।

बस्तर में 300 मेडिकल दुकानें बंद

बस्तर जिले में कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर जिलेभर की करीब 300 मेडिकल दुकानें बंद रहीं। जगदलपुर स्थित महारानी अस्पताल के सामने दवा व्यापारियों ने एक दिवसीय सांकेतिक धरना देकर विरोध प्रदर्शन किया। हालांकि मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आपातकालीन सेवाएं जारी रखी गईं। दवा व्यापारियों ने कहा कि अवैध दवा बिक्री, बिना लाइसेंस संचालित मेडिकल स्टोर्स और तेजी से बढ़ते ऑनलाइन दवा कारोबार से लाइसेंसधारी मेडिकल संचालकों का व्यापार प्रभावित हो रहा है। उनका आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पर्याप्त निगरानी के बिना दवाएं बेची जा रही हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।

राजनांदगांव में पोस्टर-बैनर लगाकर विरोध

राजनांदगांव जिले में जिला दवा विक्रेता संघ ने ऑनलाइन नकली और नशीली दवाओं की बिक्री के विरोध में अभियान चलाया। शहर में विभिन्न स्थानों पर लगाए गए पोस्टर और बैनरों के जरिए ऑनलाइन फार्मेसी व्यवस्था का विरोध किया गया। दवा विक्रेताओं ने बिना प्रिस्क्रिप्शन दवाइयों की ऑनलाइन बिक्री बंद करने, छोटे मेडिकल स्टोर संचालकों को सुरक्षा देने और नकली दवाओं पर रोक लगाने की मांग की। संघ का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बिना पर्याप्त जांच के दवाइयों की बिक्री हो रही है, जिससे नकली और नशीली दवाओं का खतरा बढ़ गया है। संघ के पदाधिकारियों ने दावा किया कि देशभर में करीब 12.5 लाख दवा विक्रेताओं के रोजगार पर संकट मंडरा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्री बोले-सरकार पूरी तरह अलर्ट

प्रदेश में दवा विक्रेताओं की हड़ताल को लेकर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है और दवा विक्रेता अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। मनेंद्रगढ़ पहुंचे मंत्री ने कहा कि कोरोना काल के दौरान भी ऑनलाइन दवा बिक्री का मुद्दा उठाया गया था और दवा विक्रेताओं ने अपनी चिंताएं भारत सरकार के सामने रखी थी। उन्होंने कहा कि यह विषय केंद्र सरकार से जुड़ा है, इसलिए अंतिम निर्णय भी भारत सरकार स्तर पर ही लिया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है और दवा दुकानों के बंद रहने के बावजूद मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी गई। उन्होंने बताया कि अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि लोगों को आवश्यक दवाएं और उपचार समय पर उपलब्ध हो सके। (Medicine Traders Protest)

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