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नक्सलियों की टूटी रीढ़, कुख्यात नक्सली हिड़मा ने 35 साल में 300 से ज्यादा लोगों का किया था कत्ल 

Chhattisgarh Naxalite Encounter: छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश की सरहद पर सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के माडेडुमल्ली जंगलों में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई जबरदस्त मुठभेड़ में कुख्यात नक्सली कमांडर माड़वी हिड़मा ढेर हो गया। उसके साथ कुल 6 नक्सली मारे गए, जिनमें संगठन के कई बड़े कैडर शामिल बताए जा रहे हैं। पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है। पिछले कुछ हफ्तों से खुफिया एजेंसियों को लगातार जानकारी मिल रही थी कि नक्सली आंध्र-छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर फिर से सक्रिय हो रहे हैं। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर सुरक्षाबलों ने संयुक्त कॉम्बिंग ऑपरेशन तेज किया था।

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मंगलवार सुबह माडेडुमल्ली मंडल में इसी ऑपरेशन के दौरान मुठभेड़ हुई, जिसमें हिड़मा ढेर हो गया। मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने जंगल से भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की है। पूरे इलाके में तलाश अभियान अभी भी जारी है, ताकि किसी भी छिपे या घायल नक्सली को पकड़ा जा सके। हिड़मा का ढेर होना नक्सल संगठन के लिए सालों में सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। (Chhattisgarh Naxalite Encounter)

ये हथियार बरामद

  • AK-47- 02
  • पिस्तौल- 01
  • रिवॉल्वर- 01
  • सिंगल बोर गन- 01

बरामद विस्फोटक

  • इलेक्ट्रिकल डेटोनेटर- 15 × 25
  • नॉन-इलेक्ट्रिकल डेटोनेटर- 150 नग
  • इलेक्ट्रिकल वायर- 01 बंडल
  • मेल-फीमेल क्लिप सेट- 02
  • क्लिप्स- 10 नग
  • टेप- 01
  • कैमरा फ्लैश लाइट- 01
  • कटिंग ब्लेड- 01
  • फ्यूज वायर- 25 मीटर
  • किट बैग- 07

एनकाउंटर से 8 दिन पहले मोस्ट वांटेड नक्सली माड़वी हिड़मा की मां माड़वी पुंजी ने बेटे से सरेंडर करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि हिड़मा बेटा घर लौट आओ, कहां पर हो आ जाओ। नहीं आ रहा है तो मैं कैसे करूं। कहीं आसपास रहता तो ढूंढने लाती और क्या कहूं बेटा आजा। यहीं पूवर्ती में कमाई करके खाएंगे और जिएंगे। जनता के साथ रहकर जी लेना, लेकिन घर लौट आ बेटा। मां ने कहा था कि अब मेरी उम्र चैन के साथ जीने की है। इस उम्र में मैं आराम करना चाहती हूं। तुम घर लौट आओगे तो मैं चैन से जी सकूंगी। मां की अपील पर हिड़मा नहीं लौटा और मारा गया। मोस्ट वांटेड नक्सली हिड़मा ने 15 साल की उम्र में ही हथियार उठा लिया था। इस बीच उसने 35 साल में 300 से ज्यादा लोगों की हत्या की, जिनमें ज्यादातर जवान थे।

27 हमलों का मास्टरमाइंड हिड़मा ढेर

साल 1981 में सुकमा जिले के पुवार्ती गांव में जन्मा माड़वी हिड़मा नक्सली संगठन का सबसे खतरनाक चेहरा था। 1996 में नक्सलियों से जुड़ने के बाद उसने जल्द ही PLGA बटालियन-1 का हेड, DKSZ स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य और 21 सदस्यीय सेंट्रल कमेटी का हिस्सा जैसी ऊंची जिम्मेदारियां संभाली। हिड़मा साल 2004 से अब तक 27 बड़े हमलों में शामिल रहा। इनमें 2010 ताड़मेटला हमला (76 जवान शहीद), 2013 झीरम घाटी हमला (कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की हत्या), 2017 बुरकापाल हमला (24 जवान शहीद), 2021 बीजापुर हमला और 2023 अरनपुर IED ब्लास्ट शामिल हैं। वहीं 31 लोगों को राहत शिविर कैंप में जिंदा जलाकर मार डाला था।

160 से 170 साथियों के साथ घूमता था हिड़मा

घर में मां हिड़मा को देवा नाम से पुकारती थी। हिड़मा अपने करीब 160 से 170 साथियों के साथ जंगल में घूमता था। 8 से 10 महीने पहले कर्रेगुट्टा के जंगल और पहाड़ पर हिड़मा का ठिकाना हुआ करता था। कर्रेगुट्टा के जंगलों में फोर्स के ऑपरेशन के बाद ये पहले छत्तीसगढ़ से तेलंगाना भागा, फिर वहां से आंध्र प्रदेश आया। जंगल में छिपा हुआ था। इसी बीच इंटेलिजेंस की पुख्ता इनपुट के बाद जवानों ने हिड़मा और इसकी पत्नी राजे समेत 6 नक्सलियों को मार गिराया।

नक्सल संगठन को सबसे बड़ी चोट

रावुला रमन्ना की मौत के बाद उसे नक्सलियों का प्रमुख कमांडर बनाया गया था। सरकार ने उसके सिर पर 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। हिड़मा का ढेर होना नक्सलियों के लिए पिछले एक दशक की सबसे बड़ी क्षति है। वह न सिर्फ संगठन का टॉप कमांडर था, बल्कि हमलों की प्लानिंग, संसाधनों का प्रबंधन और गुरिल्ला रणनीति का प्रमुख दिमाग था। सुरक्षाबलों का मानना है कि इस कार्रवाई से नक्सल मोर्चे पर उनकी बढ़त और मजबूत होगी और भविष्य की रणनीतियों पर इसका बड़ा असर पड़ेगा। (Chhattisgarh Naxalite Encounter)

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