Emergency 50 Years : ‘लोकतंत्र को खा गई कांग्रेस’, आपातकाल पर अमित शाह का तीखा हमला
Emergency 50 Years : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘आपातकाल के 50 वर्ष’ (Emergency 50 Years) कार्यक्रम को संबोधित करते हुए 1975 में लगे आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र पर एक काले अध्याय के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि यह घटना केवल इतिहास नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए चेतावनी है कि यदि हम सतर्क नहीं रहे तो लोकतंत्र को खतरे में डालने वाली ताकतें फिर सक्रिय हो सकती हैं।
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कार्यक्रम में शाह ने कहा, “यह सवाल उठ सकता है कि आज हम 50 साल पुरानी घटना (Emergency 50 Years) की चर्चा क्यों कर रहे हैं? इसका उत्तर साफ है — जब लोकतंत्र को हिला देने वाली घटनाएं भूलने लगती हैं, तब राष्ट्र की चेतना कमजोर होती है।” उन्होंने कहा कि 1975 में लगाया गया आपातकाल भारत के लोकतंत्र के इतिहास में सबसे काला दिन था।
गृह मंत्री ने इसे “एक लोकतांत्रिक देश के बहुदलीय ढांचे को तानाशाही में बदलने की साजिश” बताते हुए कहा कि यह तानाशाही केवल एक नेता या पार्टी की नहीं थी, बल्कि उस मानसिकता की थी जो लोकतंत्र को चुनौती देती है।
उन्होंने याद किया कि जब वह 11 साल के थे, तब गुजरात के उनके गांव से 184 लोगों को जेल में डाला गया था। “मैं उन दिनों और उन दृश्यों को कभी नहीं भूल सकता,” उन्होंने कहा।
शाह ने आरोप लगाया कि आपातकाल की घोषणा बिना कैबिनेट की बैठक, संसद की मंजूरी या विपक्ष को विश्वास में लिए बिना की गई थी। “प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राष्ट्र के नाम संदेश में रेडियो से आपातकाल की घोषणा कर दी, लेकिन इसकी आड़ में उनका असली उद्देश्य सत्ता की रक्षा करना था, न कि देश की सुरक्षा।”
उन्होंने यह भी कहा कि उस समय की जनता ने तानाशाही को बर्दाश्त नहीं किया और जब पहली बार आपातकाल के बाद चुनाव हुआ, तो देश ने पहली गैर-कांग्रेसी सरकार चुनी।



