कन्वर्टेड ईसाइयों ने की कब्रिस्तान के लिए जमीन की मांग, विश्व हिंदू परिषद ने खोला मोर्चा

Demands of Converted Christians: बालोद जिले में एक बार फिर धर्मांतरण और धार्मिक अधिकारों को लेकर विवाद गहराता दिख रहा है। जिले के मसीही समाज ने सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर कफन-दफन के लिए अलग कब्रिस्तान की जमीन उपलब्ध कराने की मांग की। समाज का आरोप है कि धर्म परिवर्तन करने के बाद उन्हें लगातार प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है और मौत के बाद अंतिम संस्कार में भी बाधाएं खड़ी की जा रही है। मसीही समाज ने मांग के पीछे गुरूर ब्लॉक के जवरतला गांव में हुई हाल ही की घटना का उल्लेख किया, जहां एक धर्मांतरण कर चुके व्यक्ति की मौत के बाद ग्रामीणों ने दफनाने के लिए जमीन नहीं दी। इस वजह से तनाव की स्थिति बनी थी और विवाद बढ़ गया था।
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समाज का कहना है कि प्रशासन ने तब उन्हें नई जमीन देने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक कोई व्यवस्था नहीं की गई। मसीही समाज की ओर से मांग पत्र सौंपने वाले तोमर राम ने कहा कि हर बार हमें प्रताड़ित किया जाता है। जवरतला में एक व्यक्ति की मौत के बाद उसे दफनाने के लिए जमीन तक नहीं मिली। मारपीट तक की नौबत आ गई थी। प्रशासन ने आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक जमीन नहीं दी गई। पुनेश्वर कुमार ने भी यही आरोप दोहराया। उन्होंने कहा कि हमारे गांव में एक व्यक्ति की मृत्यु होने पर सिर्फ इसलिए विरोध किया गया, क्योंकि वह विश्वासी था। हमारा मौलिक अधिकार कहां गया ? (Demands of Converted Christians)
विहिप ने मांग को बताया निराधार
दूसरी ओर विश्व हिंदू परिषद ने इस मांग का विरोध किया है। विहिप पदाधिकारियों के मुताबिक मसीही समाज के लिए पहले से ही जिले में कई जगहों पर कब्रिस्तान मौजूद हैं। विहिप के कोषाध्यक्ष राज्य सोनी ने कहा कि यह मांग पूरी तरह निराधार है। कुछ कन्वर्टेड क्रिश्चियन झूठा प्रोपेगेंडा फैला रहे हैं। उनके लिए पहले से ही बालोद जिले में कब्रिस्तान बने हुए हैं। यह मामला भटकाने वाला है और धर्मांतरण बढ़ाने का प्रयास है। वहीं विहिप पदाधिकारी उमेश सेन ने कहा कि जो लोग खुद को कन्वर्टेड बता रहे हैं, वे दस्तावेजों में आज भी हिंदू जाति और धर्म लिखते हैं। उनकी मांग गलत है। अगर प्रशासन इसे स्वीकार करता है तो विहिप सड़क पर उतरकर विरोध करेगी।
पहले भी उठा है मुद्दा
बालोद जिले में यह विवाद नया नहीं है। इससे पहले हीरापुर गांव में भी कुछ परिवारों ने अलग कब्रिस्तान की मांग की थी, जिसके विरोध में हजारों हिंदुओं ने विशाल प्रदर्शन किया था। बाद में मामला शांत हो गया, लेकिन अब दोबारा यह मुद्दा गर्मा गया है। मसीही समाज के समर्थन में सैकड़ों लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे। अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि प्रशासन इस पूरे विवाद पर क्या रुख अपनाता है। क्या नई जमीन उपलब्ध कराई जाएगी या विहिप के विरोध के चलते फिर विवाद बढ़ेगा। (Demands of Converted Christians)



