उपभोक्ता ने जमा किया पैसा…लेकिन बैंक बोला ‘नो एंट्री’ !, कवर्धा में बिजली विभाग में 50 लाख रुपए का गबन

Embezzlement in Electricity Department: कवर्धा में बिजली विभाग में 50 लाख रुपए से ज्यादा के गबन का मामला सामने आया है। आरोप है कि विभाग के ही एक कर्मचारी ने उपभोक्ताओं से बिजली बिल की राशि वसूली, लेकिन उसे कंपनी के बैंक खाते में जमा नहीं कराया। हैरानी की बात यह है कि मामले में विभाग ने चार महीने पहले ही पुलिस को आवेदन देकर FIR दर्ज करने की मांग की थी, लेकिन अब तक FIR दर्ज नहीं हुई। ऐसे में अब इस पूरे मामले को लेकर बिजली विभाग की निगरानी व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई दोनों पर सवाल उठने लगे हैं।
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मामला छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के कवर्धा वितरण केंद्र का है, जहां पदस्थ कार्यालय सहायक श्रेणी-3 मनोज कुमार साहू पर उपभोक्ताओं से बिजली बिल की राशि वसूलकर उसे कंपनी के बैंक खाते में जमा न करने का आरोप लगा है। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक उपभोक्ताओं से वसूली गई राशि बैंक में जमा नहीं हुई। बैंक मिलान और लेखा परीक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि उपभोक्ताओं से ली गई रकम और बैंक में जमा की गई राशि में बड़ा अंतर था। दस्तावेजों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2020-21 में लगभग 33,79,723 रुपए, वित्तीय वर्ष 2022-23 में 14,63,239 रुपए और विशेष अभियान के दौरान 4,92,111 रुपए यानी कुल मिलाकर 50 लाख रुपए से ज्यादा का गबन सामने आया है।
अफसरों पर मामला दबाने के प्रयास का आरोप
सूत्रों के मुताबिक अगर इस मामले की पूरी तरह जांच हो तो गबन की राशि करोड़ों तक भी हो सकती है। अफसरों पर आरोप है कि वे मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। आंतरिक जांच के नाम पर इसे ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की जा रही है। हालांकि मामले के सामने आने के बाद सहायक अभियंता ने पिपरिया थाना में लिखित आवेदन देकर आरोपी कर्मचारी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी। आरोपी कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन चार महीने बीत जाने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। (Embezzlement in Electricity Department)
देरी ने सभी को चिंतित किया: तत्कालीन जेई
तत्कालीन रवेली जेई कोमल साहू ने कहा कि हमने मामले को पुलिस तक पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन कार्रवाई में देरी ने सभी को चिंतित किया है। कवर्धा ईई जीएस फ्लोरा ने कहा कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए। विभागीय अधिकारियों की संलिप्ता भी स्पष्ट होनी जरूरी है। इस पर एएसपी पुष्पेंद्र बघेल ने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है, लेकिन FIR नहीं होने की स्थिति को जल्द सुलझाना होगा। अब बड़ा सवाल यह है कि इतने लंबे समय तक लाखों रुपए का गबन कैसे हो गया ? (Embezzlement in Electricity Department)
4 महीने बाद भी FIR क्यों नहीं ?
विभागीय अधिकारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी ?, चार महीने बाद भी FIR न होना और जांच का ठहराव क्यों ? कवर्धा बिजली विभाग का यह गबन मामला न केवल लाखों रुपए के वित्तीय नुकसान को उजागर करता है, बल्कि विभाग की निगरानी और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल भी खड़े करता है। चार महीने बीत जाने के बाद FIR दर्ज न होना और जांच का ठहराव प्रशासन और पुलिस की सक्रियता पर संदेह बढ़ा रहा है। अब देखना होगा कि इस मामले में सख्त और ठोस कार्रवाई कब तक होती है और जनता का विश्वास लौटता है या नहीं।



