Google Analytics —— Meta Pixel

प्रेमिका और मासूम बेटी की हत्या, शादी से बचने युवक ने किया डबल मर्डर, हाईकोर्ट ने उम्रकैद रखी बरकरार 

HC on Double Murder: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सामने आए दोहरे हत्याकांड मामले में आरोपी को हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। बिलासपुर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने आरोपी की अपील खारिज करते हुए उसकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने इस घटना को बेहद क्रूर और बर्बर करार दिया है। मामला रायपुर के रायपुर के तेलीबांधा क्षेत्र का है। आरोपी विक्की उर्फ सुखीराम यादव का पहले पीड़िता के साथ विवाद चल रहा था। पीड़िता ने उसके खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था, जिसके बाद आरोपी जेल भी गया था।

यह भी पढ़ें:- छत्तीसगढ़ में साय मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की चर्चा तेज, 3 से 4 मंत्रियों की हो सकती है छुट्टी

जमानत पर बाहर आने के बाद पीड़िता उस पर लगातार शादी का दबाव बना रही थी और यह भी कहा जा रहा था कि शादी नहीं करने पर वह कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाएगी। इसी दबाव और विवाद ने आगे चलकर खौफनाक रूप ले लिया। 22 जनवरी 2021 की रात आरोपी ने पीड़िता को जोरा मैदान के पास मिलने के लिए बुलाया। मुलाकात के दौरान उसने चाकू से पीड़िता का गला रेतकर हत्या कर दी। इसके बाद आरोपी ने सबूत मिटाने और पकड़े जाने के डर से पीड़िता की छोटी बेटी को पास के रेलवे ट्रैक पर ले जाकर छोड़ दिया। कुछ ही देर बाद मालगाड़ी की चपेट में आने से मासूम बच्ची की भी मौत हो गई। (HC on Double Murder)

खुद कबूल किया जुर्म, पुलिस ने किया गिरफ्तार

घटना के अगले दिन आरोपी ने गांव के पूर्व सरपंच रिखीराम साहू के पास जाकर अपना जुर्म कबूल किया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। ट्रायल कोर्ट ने 19 जुलाई 2022 को आरोपी को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से यह दलील दी गई कि घटना अचानक गुस्से में हुई और वह मानसिक रूप से अस्थिर था, लेकिन कोर्ट ने इन सभी तर्कों को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि पहले से दी गई धमकियां, चाकू लेकर मौके पर पहुंचना और घटना का तरीका यह स्पष्ट करता है कि यह एक पूर्व नियोजित हत्या थी, न कि अचानक हुई घटना।

FSL और DNA रिपोर्ट बनी अहम सबूत

कोर्ट ने फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) और DNA रिपोर्ट को महत्वपूर्ण आधार माना। रिपोर्ट में चाकू और आरोपी के कपड़ों पर मिले मानव रक्त ने उसकी संलिप्तता को प्रमाणित किया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह मामला अत्यंत क्रूरता और अमानवीयता का उदाहरण है, जिसमें न सिर्फ एक महिला की हत्या की गई, बल्कि एक मासूम बच्ची की भी जान ले ली गई। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए आरोपी की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी। इस फैसले के साथ ही यह स्पष्ट हो गया कि हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीर और सुनियोजित अपराध माना है। आरोपी को अब उम्रकैद की सजा भुगतनी होगी। (HC on Double Murder)

Back to top button
error: Content is protected !!