दुनिया पर गहराया ईरान जंग का असर, तेल 105 डॉलर के पार, होर्मुज संकट से महंगाई और फूड क्राइसिस का खतरा

Hormuz Crisis Hits World: ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी संघर्ष अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर डालने लगा है। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, शिपिंग नेटवर्क, खाद्य आपूर्ति और कई देशों के व्यापार पर गंभीर दबाव पैदा कर दिया है। गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। दो दिन की गिरावट के बाद तेल कीमतों में फिर तेजी दर्ज की गई। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड भी लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में सबसे बड़ी चिंता होर्मुज स्ट्रेट को लेकर है।
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दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यहां हालात और बिगड़ते हैं तो वैश्विक तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया है कि पिछले 24 घंटे में 26 जहाज ईरानी मंजूरी के बाद होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे। इनमें तेल टैंकर और कॉमर्शियल जहाज शामिल थे। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि ईरान अब इस समुद्री रास्ते पर अपनी पकड़ और प्रभाव दिखाने की कोशिश कर रहा है। इसी खतरे को देखते हुए UAE की सरकारी तेल कंपनी ADNOC ने होर्मुज स्ट्रेट को बायपास करने वाली नई पाइप लाइन परियोजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। कंपनी के मुताबिक इस पाइप लाइन का लगभग 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। माना जा रहा है कि अगर होर्मुज में संकट गहराता है तो UAE इसी वैकल्पिक रूट के जरिए तेल निर्यात जारी रख सकेगा।
दुनिया में खाद्य संकट का खतरा
संयुक्त राष्ट्र की फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन ने भी चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज संकट बढ़ा तो दुनिया में खाद्य संकट और महंगाई की नई लहर आ सकती है। एजेंसी के मुताबिक, तेल और शिपिंग लागत बढ़ने का सीधा असर खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा। कई देशों में सप्लाई चेन पहले से दबाव में है और युद्ध लंबा चला तो हालात और बिगड़ सकते हैं। युद्ध का असर अब एशियाई देशों के कारोबार पर भी साफ दिखने लगा है। श्रीलंका के चाय उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बढ़ती ऊर्जा कीमतों और शिपिंग संकट के चलते चाय निर्यात में तेज गिरावट आई है। रिपोर्ट के मुताबिक इराक और UAE जैसे प्रमुख खरीदार देशों में श्रीलंकाई चाय की मांग काफी कम हो गई है। श्रीलंका के चाय उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर युद्ध लंबे समय तक चला तो हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी प्रभावित हो सकती है। (Hormuz Crisis Hits World)
सऊदी अरब में भी ऊर्जा संकट के संकेत
कई कंपनियों ने माना है कि ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स लागत तेजी से बढ़ रही है, जिसका असर सीधे उत्पादों की कीमतों पर पड़ रहा है। वहीं सऊदी अरब में भी ऊर्जा संकट के संकेत मिलने लगे हैं। गैस सप्लाई प्रभावित होने के कारण देश बिजली उत्पादन के लिए ज्यादा फ्यूल ऑयल इस्तेमाल कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अप्रैल महीने में सऊदी अरब ने पिछले साल की तुलना में 86 प्रतिशत ज्यादा फ्यूल ऑयल आयात किया। इधर, अमेरिका में भी ईरान युद्ध को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विरोध बढ़ रहा है। वॉशिंगटन डीसी में पूर्व सैनिकों और युद्ध विरोधी संगठनों ने ट्रंप प्रशासन की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अमेरिका को एक और बड़े युद्ध में नहीं धकेला जाना चाहिए। जानकारों का मानना है कि अगर आने वाले दिनों में तनाव कम नहीं हुआ तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की कीमतों में उछाल, शिपिंग संकट, खाद्य महंगाई और सप्लाई चेन की समस्या पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।



