नवरात्रि के 9 दिनों तक पहने माता के पसंदीदा रंग के कपड़े, जानिए माता को क्या कलर हैं पसंद

Whatsaap Strip

Navratri: नवरात्रि के 9 दिनों तक मां दुर्गा के 9 रूपों की पूजा होती है। नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित है, जिनका प्रिय रंग सफेद है। सोमवार को सफेद रंग अति शुभ माना जाता है। मां शैलपुत्री को सफेद रंग बहुत प्रिय है। श्वेत रंग शुद्धता और शांति का प्रतीक माना जाता है। इसे धारण करने से आत्मविश्वास में बढ़ोतरी भी होती है। नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी। इस दिन लाल रंग का उपयोग करना बेहद शुभ माना गया है। लाल रंग साहस, पराक्रम और प्रेम का प्रतीक होता है।

यह भी पढ़ें:- नवरात्रि के पहले दिन घर लाए ये सामान, माना जाता है शुभ

वहीं शारदीय नवरात्रि का तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। मां चंद्रघंटा की आराधना में नारंगी रंग के वस्त्र धारण कर पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। नवरात्रि का चौथा दिन गुरुवार को मां कूष्मांडा की पूजा होती है। इस दिन पीला रंग का वस्त्र धारण करना चाहिए, पीला रंग उमंग का प्रतीक है। शारदीय नवरात्रि मे पांचवा दिन शुक्रवार को मां स्कंदमाता की आराधना की जाती है। इस दिन हरे रंग का प्रयोग करने से ऊर्जावान रहने में मदद मिलेता है। हरा रंग कुछ नया करने के लिए हमेशा प्रेरित करता है। नवरात्रि के छठे दिन यानी शनिवार को मां कात्यानी की पूजा की जाएगी। (Navratri)

नवरात्रि में ग्रे यानी स्लेटी रंग के बुराईयों को नष्ट करने वाला माना गया है। नवरात्रि के सातवें दिन यानी रविवार को मां कालरात्रि को समर्पित किया गया है। मां काली की पूजा में नीलें रंग का उपयोग शुभ माना गया है, नीला रंग निडरता का प्रतिक है। नवरात्रि के आठवें दिन यानी सोमवार को महाअष्टमी पर मां महागौरी की पूजा की जाती है। माता महागौरी को जामुनी रंग अतिप्रिय है। इस दिन कन्या पूजन का भी विधान है। नवरात्रि का आखिरी दिन मंगलवार को मां सिद्धिदात्री की उपासना की जाएगी। सिद्धिदात्री देवी को ज्ञान प्रदान करने वाली देवी माना गया है। इस दिन गुलाबी रंग का इस्तेमाल करें। गुलाबी रंग प्रेम और नारीत्व का सूचक है। (Navratri)

बता दें कि नवरात्रि के दिन कलश स्थापना के बाद मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस दिन स्थापना के बाद दुर्गासप्तशती का पाठ किया जाता है। धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक कलश को भगवान गणेश का स्वरूप माना गया है। जैसे किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश जी से होती है वैसे ही पूजा में कलश पूजा से ही शुरुआत होती है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के बाद मां शैलपुत्री की ये कथा श्रवण करने या सुनने से घर में सुख-समृद्धि आती है और मां शैलपुत्री का आशीर्वाद प्राप्त होता है। (Navratri)

Related Articles