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भोजशाला फैसले से हिंदू और भाजपा खुश, विपक्ष और मुस्लिम संगठन नाराज, सुप्रीम कोर्ट जाने तक की तैयारी

Politics on Bhojshala Decision: धार के भोजशाला मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच के फैसले के बाद प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव समेत भाजपा और हिंदू संगठनों ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया। वहीं AIMIM, कांग्रेस और मुस्लिम संगठनों ने फैसले पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है। विवाद अब कोर्ट से निकलकर राजनीतिक और वैचारिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जो कोर्ट ने निर्णय दिया है और मैं प्रसन्नता भी व्यक्त करता हूं कि कोर्ट ने माना कि ये भोजशाला का स्थान था। मैं अपनी ओर से इस निर्णय का स्वागत करता हूं और देशवासियों को बधाई देता हूं।

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वहीं जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदानी ने कहा कि फैसला पढ़ने के बाद हम अगला कदम उठाएंगे। जरूरत पड़ने पर हम सुप्रीम कोर्ट तक भी जाएंगे। यह फैसला डेढ़ से लगभग दो साल की कड़ी मेहनत के बाद आया है। यह फैसला ‘पूजा स्थल अधिनियम’ के मौजूद होने के बावजूद सुनाया गया है। इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद ही हम आगे कोई टिप्पणी करेंगे। ‘वैकल्पिक जगह’ जैसी कोई अवधारणा नहीं है। यह केवल मस्जिद से जुड़ा मामला नहीं है। यह संविधान से जुड़ा मामला है। AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह फैसला संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद को लेकर दिए गए फैसले में एक ही धर्म को प्राथमिकता दी गई, जबकि दूसरों की आराधना को आप खत्म कर रहे हैं। इस फैसले ने एक दरवाजा खोल दिया है। अब कल कोई भी जाएगा, क्योंकि ‘पूजा स्थल अधिनियम’ की अहमियत खत्म होती जा रही है। ‘पूजा स्थल अधिनियम’ का अब एक मजाक बनकर रह गया है।

 

AIMIM नेता वारिस पठान ने कहा कि मैं मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले से पूरी विनम्रता के साथ असहमत हूं। मेरा मानना है कि यह फ़ैसला कई अहम बातों पर विचार किए बिना सुनाया गया है। ‘पूजा स्थल अधिनियम, 1991’ को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया। इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि किसी भी स्मारक की प्रकृति और स्वरूप जैसा कि वह 15 अगस्त, 1947 को था उसे बदला नहीं जा सकता। लोग यहां जुमे की नमाज अदा करते थे, फिर भी आपने उसे रोक दिया। बाबरी मस्जिद मामले में आपने कहा था कि वैकल्पिक जमीन दी जाएगी। अब इस मामले में भी आप कह रहे हैं कि वैकल्पिक जमीन दी जाएगी तो यह क्या है? इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी और हमें उम्मीद है कि न्याय होगा। कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि मुस्लिम पक्ष निश्चित तौर पर सुप्रीम कोर्ट जाएगा। 

उदित राज ने आगे कहा कि इस तरह के तमाम मामले इस देश में उखाड़े जा रहे हैं इसका कोई अंत नहीं है। जनता को सरकार ने इसी में उलझा रखा है। VHP, बजरंग दल, RSS के लोग उकसाते हैं और माहौल बनाते हैं जिससे ये नैरेटिव बना रहे और देश की मूलभूत समस्याओं पर चर्चा ही न हो। कांग्रेस नेता आरिफ मसूद ने कहा कि हम फैसले से सहमत नहीं हैं, क्योंकि यह एएसआई रिपोर्ट के आधार पर सुनाया गया है, जिस रिपोर्ट पर हमें पहले से ही संदेह था और जिसके खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने पहले ही आपत्तियां दर्ज कराई थीं। अदालत ने इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर अपना फैसला सुनाया है। हमने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है। शिवसेना(UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कह कि जो इंदौर हाईकोर्ट से फैसला आया है मैं मानती हूं कि इसको सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी, लेकिन साथ ही साथ 11वें सदी का ये जो मंदिर है इसके मेन मूर्ति को ब्रिटिश लेकर गए थे मूर्ति अभी भी ब्रिटिश संग्रहालय में है। तो उसके अनुसार जो अभी रिपोर्ट आई है उसके हिसाब निर्णय लिया गया है। (Politics on Bhojshala Decision)

उन्होंने कहा कि मैं उम्मीद करती हूं हर पक्ष इस मामले को शांतिपूर्ण तरीके से हल करेगा। इंदौर हाई कोर्ट ने जो निर्णय लिया है वो निर्णय जिस आधार पर लिया है उनके जो कारण रहेंगे होंगे और अगर ये सुप्रीम कोर्ट तक मामला जाता है तो क्या निष्कर्ष निकलेगा वो देश के सामने आएगा। भाजपा नेता आर.पी. सिंह ने कहा कि हाई कार्ट के फैसले का पूरा देश स्वागत कर रहा है और वहां पर एक प्राचीन मंदिर था वहां पर सरस्वती माता का मंदिर था उनकी मूर्तियां वहां पर पाई गईं और ये प्रमाण पुरातन विभाग के ASI ने कोर्ट के सामने पेश की। उसके अनुसार कोर्ट ने फैसला किया। पूरा हिंदू समाज इसका स्वागत करता है। भाजपा नेता आर.पी. सिंह ने AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर कि अब वो अगर ASI के सबूत को नहीं मानते हैं तो उसका कोई रास्ता नहीं है, लेकिन जो मूर्तियां वहां से मिलीं हैं उसके आधार पर ही कोर्ट ने फैसला दिया है अच्छा होगा असदुद्दीन ओवैसी और पूरा मुसलमान समाज इसको माने और आगे बढ़े।

VHP नेता विनोद बंसल ने कहा कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का भोजशाला मामले में निर्णय अभूतपूर्व है। ये सच्चाई, न्याय व्यवस्था, संविधान और सांस्कृतिक मूल्यों की जीत है। इस निर्णय से न केवल एक मंदिर मुक्त हुआ है, बल्कि एक बहुत बड़े संस्कृति के केंद्र को मुक्ति मिली है। दुर्भाग्य है कि जब देश बदल रहा है। ऐसे में आक्रांताओं की विचारधारा से जुड़े हुए लोग अभी भी खुदको उनसे जोड़कर रखना चाहते हैं। कवि कुमार विश्वास ने कहा कि बहुत ही सौभाग्य का पर्व है। महाराज भोज जो भारतीय संस्कृति, साहित्य और भारतीय कला के प्रतिपादक माने जाते थे, जिनके माध्यम से भारतीय मनीषा पूरे विश्व में गूंजी, जिस भगवती का उन्हें साक्षात साक्षात्कार हुआ, वे सरस्वती जहां भोजशाला में विराजमान थीं, आज वहां भारतीय न्याय संहिता से हिसाब से निर्णय प्राप्त हुआ है। मन में बड़ी टीस रहती थी कि कभी वाग्देवी वहां विराजमान हों और हम उनके दर्शन उस भाव से कर सकें और आज ये संभव हो पाया है।

AIMIM अध्यक्ष ओवैसी के बयान पर उन्होंने कहा कि मैं उनसे आशा करता हूं कि वे भारतीय सांस्कृतिक इतिहास भी पढ़ें और अपने कुल वंश का भी इतिहास पढ़ें जिसमें चार पीढ़ी बाद ही उन्हें स्वयं के इसी परंपरा में खड़े रहने का बोध प्राप्त होगा। उत्तर प्रदेश के डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि कोर्ट के फैसले का हम स्वागत करते हैं सदैव सच की जीत होती है और सच की जीत हुई है। भोजशाला को लेकर लंबे समय से लोग संघर्ष कर रहे थे, आंदोलन कर रहे थे। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के माध्यम से जो फैसला आया, उस फैसले से हिंदुओं में खुशी की लहर है और मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले इसका मातम मना रहे हैं। हम इसका स्वागत करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि अगर उच्च न्यायालय के फैसले पर मुस्लिम पक्ष हिंदुओं की भावनाओं का आदर करते हुए, दावा वापस ले लेता और खुशी-खुशी वो स्थान हिंदुओं को सौंपा जाता तो इससे अच्छा संदेश जाता। (Politics on Bhojshala Decision)

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि उच्च न्यायालय ने एएसआई की ओर से किए गए एक वैज्ञानिक अध्ययन का संज्ञान लिया है, जिसमें एएसआई ने 21 पृष्ठों की रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इस रिपोर्ट और माननीय न्यायालय के अनुसार, भोजशाला स्थल एक मंदिर परिसर है। विशेष रूप से, यह देवी सरस्वती का मंदिर परिसर है। हम माननीय उच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं। छत्तीसगढ़ भाजपा ने कहा कि सदियों के इंतजार के बाद भोजशाला को न्याय मिला है। मां सरस्वती की पावन भूमि, हमारी सांस्कृतिक चेतना और भारतीय विरासत से जुड़े सत्य को ऐतिहासिक फैसले ने फिर स्थापित किया है। ASI के साक्ष्य, इतिहास और पुरातात्विक तथ्यों के आधार पर आया यह निर्णय सिर्फ एक स्थल का फैसला नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता, आस्था और अस्मिता के सम्मान का क्षण है। जिन्होंने वर्षों तक हमारी सांस्कृतिक पहचान पर सवाल खड़े किए, उनके लिए यह जवाब है कि सत्य को दबाया जा सकता है, मिटाया नहीं जा सकता। यह सिर्फ न्याय नहीं, भारत की आत्मा का सम्मान है।

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