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राहुल गांधी का दावा- अरुण जेटली ने धमकाया, बेटे रोहन का तीखा जवाब- “दिवंगत पिता कैसे धमका सकते हैं? पढ़े पूरी खबर

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक हालिया बयान ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। राहुल गांधी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. अरुण जेटली पर धमकाने का आरोप लगाया है, जिसके बाद जेटली के बेटे रोहन जेटली ने पलटवार करते हुए इसे “तथ्यहीन और अपमानजनक” बताया है।

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राहुल गांधी का बयान—”अरुण जेटली को मुझे धमकाने भेजा गया”

2025 के वार्षिक कानूनी सम्मेलन में अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने दावा किया कि 2020 में जब वे कृषि कानूनों का विरोध कर रहे थे, तब तत्कालीन सरकार ने उन्हें डराने के लिए अरुण जेटली को भेजा था।

राहुल ने कहा— “मुझे याद है, जब मैं कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ रहा था, तो अरुण जेटली जी को मुझे धमकाने के लिए भेजा गया। उन्होंने मुझसे कहा कि अगर तुम सरकार का विरोध करोगे, तो तुम्हारे खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी पड़ेगी। मैंने उनकी ओर देखा और कहा—मुझे नहीं लगता कि तुम्हें पता है कि तुम किससे बात कर रहे हो।”

रोहन जेटली का जवाब—”ऐसा कहना मृतकों का अपमान”

अरुण जेटली के बेटे और दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहन जेटली ने राहुल गांधी के दावे को सिरे से खारिज करते हुए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:

“मैं राहुल गांधी को याद दिलाना चाहता हूं कि मेरे पिता का निधन 2019 में हो गया था, जबकि कृषि कानून 2020 में लाए गए थे। वे किसी को उनके विचारों के लिए धमकाने वाले नहीं थे। वे लोकतंत्र में विश्वास रखते थे और हमेशा विचार-विमर्श और सहमति को प्राथमिकता देते थे।”

उन्होंने आगे कहा:- “दुर्भाग्यपूर्ण है कि राहुल गांधी बार-बार उन व्यक्तियों के बारे में भ्रामक बातें करते हैं जो अब हमारे बीच नहीं हैं। उन्होंने ऐसा ही प्रयास मनोहर पर्रिकर जी के अंतिम दिनों में भी किया था। कृपया मृतकों को शांति से रहने दें।”

भाजपा और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया

राहुल गांधी के इस बयान पर भाजपा ने कड़ा रुख अपनाया है।
भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने राहुल को “झूठा” करार देते हुए कहा कि “यह बयान न सिर्फ झूठा है बल्कि जानबूझकर किया गया राजनीतिक हमला है, जो बुनियादी तथ्यों की भी परवाह नहीं करता।”

भाजपा और जेटली परिवार का कहना है कि राहुल गांधी को राजनीतिक बयानबाजी के दौरान संयम और संवेदनशीलता बरतनी चाहिए, खासकर उन लोगों को लेकर जो अब जीवित नहीं हैं।

निष्कर्ष:

राहुल गांधी के बयान ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में भूतकाल की घटनाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सवाल यह भी उठता है कि सार्वजनिक मंचों से ऐसे दावे करने से पहले तथ्यों की जांच जरूरी है या नहीं। रोहन जेटली का पलटवार इस बहस को और तीखा बना रहा है।

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