Bhaktin Rajim Mata Jayanti : राजिम भक्तिन माता जयंती आज, लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुँचेंगे राजिम, जानिए क्या है इतिहास
Rajim Bhaktin Mata Jayanti: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों को राजिम भक्तिन माता जयंती की बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। CM बघेल ने कहा है कि धर्मनिष्ठा और कर्मठता की प्रतीक राजिम माता के नाम पर छत्तीसगढ़ की धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी राजिम का नाम पड़ा है। छत्तीसगढ़ का राजिम अब सिर्फ धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि तीन नदियों के साथ विभिन्न संस्कृतियों, सम्प्रदायों का संगम स्थल बन गया है। उन्होंने कहा कि भक्तिन तेलिन माता का त्याग, तपस्या और सत्कर्म हमें हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।
यह भी पढ़ें:- पटेल-मरार समाज बाड़ी योजना का लाभ उठाकर बन सकते हैं आर्थिक रूप से सशक्त: CM बघेल
बता दें कि राजिम में नदियों के संगम स्थल पर कुलेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर का संबंध राजिम की भक्तिन माता से है। छत्तीसगढ़ के राजिम क्षेत्र में राजिम माता के त्याग की कथा प्रचलित है। भगवान कुलेश्वर महादेव का आशीर्वाद इस क्षेत्र को प्राप्त है। इसी कारण राजिम भक्तिन माता जयंती 7 जनवरी को राजिम भक्तिन माता की याद में मनाई जाती है। छत्तीसगढ़ के लाखों श्रद्धालु यहां इकट्ठा होकर माता की पूजा करते हैं। (Rajim Bhaktin Mata Jayanti)
भक्तिन तेलिन माता का त्याग, तपस्या और सत्कर्म हमें हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।
— Bhupesh Baghel (@bhupeshbaghel) January 7, 2023
जानकारी के लिए बता दें कि राजिवलोचन मंदिर में लगे शिलालेख के मुताबिक कलचुरी राजा जगपाल देव के शिलालेख में माता का उल्लेख मिलता है। 3 जनवरी 1145 को शिलालेख लगाया गया था। कहा जाता है कि यहां साहू समाज के लोग एकत्र होते हैं। एक स्थानीय दंतकथा में बताया गया है कि इस स्थान का नाम ‘राजीव’ या ‘राजिम’ नामक एक तैलिक स्त्री के नाम से हुआ था। कुलेश्वर मंदिर के अंदर ‘सतीचैरा’ है, जिसका संबंध इसी स्त्री से हो सकता है। यहां भगवान रामचंद्र और कुलेश्वर महादेव के मंदिर के अलावा जगन्नाथ मंदिर, भक्तमाता राजिम मंदिर और सोमेश्वर महादेव मंदिर भी मौजूद है। (Rajim Bhaktin Mata Jayanti)
भगवान श्री राजीवलोचन की अनन्य भक्त, राजिम भक्तिन तेलिन माता की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन एवं समस्त छत्तीसगढ़ वासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। pic.twitter.com/J6RPaFZwl5
— Governor Chhattisgarh (@GovernorCG) January 7, 2023
बताया जाता है कि इस जगह का नाम राजिम तेलिन के नाम पर इसलिए पड़ा क्योंकि यहां के तैलिय वंश लोग तिलहन की खेती करते थे। इन्हीं तैलिन लोगों में एक धर्मदास भी था, जिसकी पत्नी का नाम शांतिदेवी था। दोनों विष्णु के भक्त थे और उनकी बेटी का नाम राजिम था। राजिम का विवाह अमरदास नामक व्यक्ति से हुआ। राजिम भी विष्णु की भक्त थी, जो मूर्ति विहीन राजीवलोचन मंदिर में जाकर पूजा करती थी। राजिम की भक्ति, त्याग और तपस्या के चलते ही वे पूरे क्षेत्र में माता की तरह प्रसिद्ध हो गई। भगवान के प्रति अपार सेवाभाव रखने और पुण्य प्रताप के कारण ही आज पूरे देश में राजिम भक्तिन माता की अलग पहचान है, जिनकी लाखों भक्त पूजा करते हैं। (Rajim Bhaktin Mata Jayanti)
सभी प्रदेश वासियों को अपार श्रद्धा एवं भक्ति की प्रतीक राजिम भक्तिन माता की जयंती पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। pic.twitter.com/XpJeM2qnyq
— Tamradhwaj Sahu (@tamradhwajsahu0) January 7, 2023



