Google Analytics —— Meta Pixel

RBI ने लगातार चौथी बार ब्याज दरों में की कटौती, लोन होंगे सस्ते, EMI में गिरावट, आम आदमी को बड़ी राहत

RBI Reduced Repo Rate: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आम लोगों को बड़ी राहत देते हुए पॉलिसी रेपो रेट में 0.25% की कटौती की है। तीन दिन चली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक के बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इसकी घोषणा की। नई रेपो रेट अब 5.25% हो गई है। RBI ने कहा कि रेपो रेट में कटौती का फायदा जल्द ही उपभोक्ताओं को मिलेगा। बैंक भी अपने लोन की ब्याज दरें घटाएंगे, जिससे होम लोन, ऑटो लोन और अन्य कर्ज सस्ते हो जाएंगे। मौजूदा EMI भी कम होंगी। गवर्नर ने बताया कि LAF (लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी) के तहत STF (स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी) रेट 5% और MSF (मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी) और बैंक रेट 5.5% पर एडजस्ट किया जाएगा। MPC ने न्यूट्रल रुख जारी रखने का भी फैसला किया है।

यह भी पढ़ें:- दोस्ती की मिसाल: मोदी ने पुतिन को दी रूसी में श्रीमद्भगवद्गीता

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि रिजर्व बैंक ने सिस्टम में और टिकाऊ लिक्विडिटी डालने के लिए इस महीने दिसंबर में 1 लाख करोड़ रुपए की सरकारी सिक्योरिटीज की OMO (ओपन मार्केट ऑपरेशन्स) खरीद और 5 बिलियन US डॉलर का तीन साल का डॉलर-रुपया बाय-सेल स्वैप करने का फैसला किया है। इससे बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा और बैंकों की उधारी क्षमता मजबूत होगी। रेपो रेट कम होने के बाद बैंक भी ब्याज दरें कम करते हैं। इसका सीधा असर लोन पर पड़ेगा। (RBI Reduced Repo Rate)

पुराने और नए दोनों तरह के ग्राहकों को फायदा

उदाहरण के तौर पर 20 लाख के 20 साल के लोन पर EMI 310 रुपए तक कम, 30 लाख के लोन पर EMI 465 रुपए तक कम यानी पुराने और नए दोनों तरह के ग्राहकों को फायदा मिलेगा। हाउसिंग और ऑटो सेक्टर में मांग भी बढ़ने की उम्मीद है, जिससे रियल एस्टेट सेक्टर को मजबूती मिलेगी। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस साल अर्थव्यवस्था को सहारा देने और बाजार में कैश फ्लो बढ़ाने के लिए ब्याज दरों में कई बार कटौती की है। फरवरी से दिसंबर तक कुल चार बार रेट कम किए गए। फरवरी 2025 में हुई MPC बैठक में RBI ने लगभग 5 साल बाद पहली बार ब्याज दरों को घटाया था। रेपो रेट को 6.50% से घटाकर 6.25% किया गया। यह कटौती संकेत थी कि RBI अब महंगाई से ज्यादा आर्थिक विकास पर ध्यान दे रहा है।

GDP ग्रोथ अनुमान (FY26) बढ़ाकर किया 7.30%

अवधि पहले अब
Q3 FY26 6.40% 7.00%
Q4 FY26 6.20% 6.50%
Q1 FY27 6.40% 6.70%
Q2 FY27 6.80%

महंगाई अनुमान (FY26) घटाकर किया 2.0%

अवधि पहले अब
Q3 FY26 1.80% 0.60%
Q4 FY26 4.00% 2.90%
Q1 FY27 4.50% 3.90%
Q2 FY27 4.00%

अप्रैल 2025 में RBI ने दूसरी बार राहत दी और ब्याज दरों को 0.25% और कम किया। इसका लक्ष्य था-बैंकों को सस्ते में फंड उपलब्ध कराना, ताकि वे ग्राहकों को भी कम ब्याज पर लोन दे सकें। जून की मीटिंग में RBI ने और बड़ा कदम उठाते हुए 0.50% की कटौती की। यह इस साल की सबसे बड़ी एकमुश्त रेट कट थी। इसका सीधा असर होम लोन, ऑटो लोन और बिज़नेस लोन पर दिखा क्योंकि कई बैंकों ने तुरंत अपनी ब्याज दरें घटा दी। सबसे ताजा बैठक (3-5 दिसंबर) में RBI ने फिर से 0.25% रेट कम की। इससे रेपो रेट 5.25% पर आ गई। यह इस साल की चौथी राहत है। चारों बैठकों को मिलाकर RBI ने 2025 में अब तक कुल 1.25% ब्याज दरें कम कर दी हैं। इसका मतलब है कि कर्ज सस्ता हुआ, EMI कम हुई और लोगों-उद्योगों को खर्च और निवेश के लिए प्रोत्साहन मिला।

क्यों घटती और बढ़ती है रेपो रेट ?

RBI रेपो रेट को बदलकर अर्थव्यवस्था में पैसे के प्रवाह (Money Flow) को नियंत्रित करता है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है तो RBI रेपो रेट बढ़ाता है। रेपो रेट बढ़ती है तो बैंकों को RBI से महंगा कर्ज मिलता है। बैंक ग्राहकों को महंगे लोन देते हैं। लोग कम कर्ज लेते हैं और कम खर्च करते हैं। खर्च कम होने से मांग घटती है और महंगाई नीचे आती है। यह तरीका महंगाई पर नियंत्रण रखने का सबसे प्रभावी साधन माना जाता है। वहीं जब अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ती है और विकास धीमा होता है, तब RBI रेपो रेट घटाता है। रेपो रेट घटती है तो बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है। बैंक भी लोन की ब्याज दरें कम करते हैं। लोग ज्यादा खर्च और निवेश करते हैं। बिजनेस को बढ़ावा मिलता है, रोजगार पैदा होता है और इकोनॉमी बेहतर होती है। इसी वजह से दिसंबर 2025 में RBI ने फिर रेट घटाकर अर्थव्यवस्था को तेज करने की कोशिश की है।

कैसे होती है और कौन लेता है फैसला ?

भारत में ब्याज दरें तय करने की जिम्मेदारी मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की होती है। MPC में कुल 6 सदस्य होते हैं, जिसमें 3 सदस्य RBI के, 3 सदस्य केंद्र सरकार की ओर से नियुक्त यानी यह समिति पूरी तरह संतुलित तरीके से बनी होती है, जिससे फैसले स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से लिए जा सकें। MPC की बैठक हर दो महीने होती है, जिसमें ब्याज दरें, महंगाई, लिक्विडिटी और आर्थिक वृद्धि से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लिए जाते हैं। बीते दिनों रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग का शेड्यूल जारी किया था। इस वित्तीय वर्ष में 6 बैठकें होंगी। पहली बैठक 7-9 अप्रैल 2025 को हुई थी। इसके बाद हर दो महीने के अंतराल में बाकी बैठकें हुई। बता दें कि बैठकों में रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, बैंक रेट, महंगाई के अनुमान और GDP ग्रोथ जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है।

Back to top button
error: Content is protected !!