अयोध्या के राम मंदिर में ध्वजारोहण समारोह को लेकर विवाद, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने जताई आपत्ति
Shankaracharya Avimukteshwarananda: अयोध्या के राम मंदिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज पहली बार 191 फीट ऊंचे शिखर पर ध्वज फहराएंगे। समारोह में VVIP और विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया है, लेकिन चारों शंकराचार्यों को निमंत्रण न भेजे जाने पर असंतोष की लहर दिख रही है। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ध्वजारोहण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शास्त्रों में ध्वजारोहण का ऐसा विधान नहीं मिलता। शास्त्रों में शिखर की प्रतिष्ठा का उल्लेख है, लेकिन ध्वजारोहण का नहीं। जब तक शास्त्रानुसार कोई विधि न दिखे, हम उसमें भाग नहीं ले सकते।
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उन्होंने कहा कि जब ध्वज बदला जाता है तो उसे ऊपर ले जाकर वहीं से फहराया जाता है, नीचे से चढ़ाया नहीं जाता। जगन्नाथ धाम और द्वारका में रोज ध्वजा बदली जाती है, लेकिन वहां पहले शिखर की विधिवत प्रतिष्ठा होती है। शंकराचार्य ने कहा कि जब तक किसी कार्य में शास्त्रीय तत्व न दिखे, उसमें भाग लेने का कोई अर्थ नहीं है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि शिखर की प्रतिष्ठा से पहले ध्वज कैसे फहराया जा रहा है। वहीं सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि राम सबके हैं, लेकिन बीजेपी राम के ठेकेदार बन गई है। (Shankaracharya Avimukteshwarananda)
100 दानदाताओं को आमंत्रण
सांसद ने कहा कि अयोध्या के लोगों को इस कार्यक्रम में बुलाया ही नहीं गया। मुझे भी नहीं बुलाया गया, जबकि मैं अयोध्या का सांसद हूं। उन्होंने कहा कि अयोध्या में जनता को कार्यक्रम से दूर रखना उचित नहीं है। बता दें कि ध्वजारोहण में उन 100 विशिष्ट दानदाताओं को बुलाया गया है, जिन्होंने राम मंदिर निर्माण में 2 करोड़ रुपए से ज्यादा का योगदान दिया था। साथ ही अयोध्या, लखनऊ और आसपास के 25 जिलों के प्रमुख लोगों और किसानों को भी विशेष आमंत्रण भेजा गया है। (Shankaracharya Avimukteshwarananda)



