बंगाल के आसनसोल में लाउडस्पीकर विवाद के बाद बवाल, पुलिस चौकी में तोड़फोड़ और पथराव

Unrest in Asansol: पश्चिम बंगाल के आसनसोल में शुक्रवार रात लाउडस्पीकर की आवाज कम करने के प्रशासनिक निर्देश के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। शहर के रेलपार इलाके में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ पुलिस चौकी के बाहर जमा हो गई और देखते ही देखते स्थिति हिंसक हो गई। उग्र भीड़ ने पुलिस चौकी पर पथराव किया, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और कई वाहनों में तोड़फोड़ की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
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जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार के निर्देश पर प्रशासन ने आसनसोल के अलग-अलग इलाकों में धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक आयोजनों में लाउडस्पीकर की आवाज निर्धारित सीमा में रखने के निर्देश दिए थे। इसी कड़ी में दिन के समय रेलपार इलाके में पुलिस अधिकारियों और स्थानीय लोगों के बीच बातचीत भी हुई थी। हालांकि शाम होते-होते माहौल बिगड़ गया और बड़ी संख्या में लोग पुलिस चौकी पहुंच गए। आरोप है कि भीड़ ने चौकी पर पथराव शुरू कर दिया, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। (Unrest in Asansol)
हिंसा के दौरान पुलिस चौकी के अंदर रखे कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य सामान को नुकसान पहुंचाया गया। चौकी परिसर में ईंट-पत्थरों के टुकड़े बिखरे मिले और CCTV कैमरे भी क्षतिग्रस्त हो गए। भीड़ ने सड़क किनारे खड़ी कई बाइक, ऑटो और कारों में भी तोड़फोड़ की। वाहनों के शीशे तोड़ दिए गए और कई निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा। घटना में कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। स्थिति लगातार बिगड़ती देख पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए बल प्रयोग किया। पुलिस ने पहले लाठीचार्ज किया और बाद में आंसू गैस के गोले छोड़े। काफी देर तक इलाके में तनाव बना रहा। (Unrest in Asansol)

हालात काबू में आने के बाद पुलिस और सुरक्षाबलों ने इलाके में फ्लैग मार्च भी निकाला, ताकि लोगों में भरोसा कायम किया जा सके और किसी नई घटना को रोका जा सके। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अतिरिक्त पुलिस बल और पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती की गई है। डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस वीजी सतीश पसुमार्थी ने कहा कि स्थिति अब नियंत्रण में है और इलाके में शांति बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने बताया कि CCTV फुटेज की जांच की जा रही है और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बंगाल में चुनाव के बाद हुई थी हिंसा
पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं। आसनसोल की घटना के बाद एक बार फिर राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। 6 मई को भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ की नॉर्थ 24 परगना में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना उस समय हुई जब वे अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी से घर लौट रहे थे। 5 मई को कोलकाता के न्यू मार्केट इलाके में भाजपा समर्थकों पर दुकानों और TMC कार्यालय में तोड़फोड़ का आरोप लगा। मुर्शिदाबाद जिले के जियागंज में रूसी क्रांतिकारी नेता व्लादमीर लेनिन की प्रतिमा तोड़ दी गई। आमतला में TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी के कार्यालय में भी तोड़फोड़ और पत्थरबाजी की घटना सामने आई। जगतबल्लभपुर में TMC कार्यालय में आगजनी की घटना भी हुई थी।
23 अप्रैल को मतदान के दौरान कई जगह हंगामा
राज्य में पहले चरण के मतदान के दौरान भी कई इलाकों से हिंसा, झड़प और हंगामे की खबरें सामने आई थीं। राजनीतिक दलों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए थे। बता दें कि राज्य सरकार और प्रशासन की ओर से हाल में लिए गए कुछ फैसलों को लेकर भी राजनीतिक माहौल गर्म है। इनमें धार्मिक स्थलों पर तेज आवाज वाले लाउडस्पीकरों पर नियंत्रण, स्कूलों में वंदे मातरम को अनिवार्य करना, सीमा क्षेत्र में फेंसिंग के लिए जमीन ट्रांसफर और नए आपराधिक कानूनों को लागू करने जैसे फैसले शामिल हैं। इसी बीच आसनसोल की घटना ने राज्य में कानून-व्यवस्था और सामाजिक तनाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है।



