BRICS मंच पर दिखी भारत-ईरान की करीबी, अराघची बोले- ईरान किसी दबाव या धमकी के आगे कभी नहीं झुकेगा

India and Iran Relations: BRICS के विदेश मंत्रियों की बैठक के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच मुलाकात हुई। इसे लेकर ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि मैं भारत सरकार और मेरे बहुत अच्छे दोस्त मंत्री जयशंकर के मुझे और मेरे प्रतिनिधिमंडल को दिए गए गर्मजोशी भरे आतिथ्य की सराहना करना चाहूंगा, जिनके साथ मेरे बहुत अच्छे निजी और कामकाजी संबंध हैं। पिछले दो महीनों में जब युद्ध चल रहा था या जैसा कि मैं कहना पसंद करूंगा, जब मेरे देश के खिलाफ आक्रामकता की कार्रवाई चल रही थी तब हम लगातार संपर्क में रहे हैं। हम भारत के साथ अपने संबंधों को बहुत महत्व देते हैं।
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अराघची ने कहा कि मेरा देश अमेरिका और इजराइली शासन द्वारा की गई एक अकारण आक्रामकता का शिकार हुआ है और यह ठीक उस समय हुआ, जब हम अमेरिकियों के साथ बातचीत कर रहे थे। कूटनीति के बीच ही उन्होंने हम पर हमला करने का फैसला कर लिया। हम उन सभी देशों की सराहना करते हैं, जिन्होंने इस हमले की निंदा की। हम भारत की सरकार और वहां के लोगों की सराहना करते हैं, जिन्होंने ईरानी लोगों के प्रति एकजुटता और सहानुभूति व्यक्त की। हम भारत सरकार द्वारा एकजुटता के प्रतीक के तौर पर हमें दी गई मानवीय सहायता की भी सराहना करते हैं। हम अभी युद्धविराम की स्थिति में हैं, हालांकि यह बहुत अस्थिर है, लेकिन हम इसे बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि कूटनीति को एक मौका मिल सके। (India and Iran Relations)

विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान से जुड़ी किसी भी चीज़ का कोई सैन्य समाधान नहीं है। उन्होंने बार-बार हमारी परीक्षा ली है। हम कभी भी किसी दबाव या धमकी के आगे नहीं झुकते। हम किसी भी प्रतिबंध का भी विरोध करते हैं। ईरानी लोग केवल सम्मान की भाषा ही समझते हैं। अब 40 दिनों के वॉर के बाद जब अमेरिका को ईरान के खिलाफ अपनी आक्रामकता में कोई भी लक्ष्य हासिल करने की उम्मीद खत्म हो गई तो उन्होंने बातचीत का प्रस्ताव दिया। हमें अमेरिकियों पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। किसी भी कूटनीतिक प्रयास की राह में यही सबसे बड़ी बाधा है। हमारे पास अमेरिकियों पर भरोसा न करने के हर कारण मौजूद हैं, जबकि उनके पास हम पर भरोसा न करने का कोई कारण नहीं है।

ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत के कई देशों के साथ संबंध हैं। अपने संबंधों को लेकर फैसला करना भारत का काम है। हमारे लिए जो बात मायने रखती है, वह है हमारे और भारत के बीच मौजूद अच्छे संबंध। हम भारत के साथ अपने अच्छे संबंधों को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से लगातार दूसरे दिन मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि हमने कुछ शानदार व्यापारिक समझौते किए हैं, जो दोनों देशों के लिए बहुत अच्छे हैं। वे एक महान व्यक्ति हैं, जिनका मैं बहुत सम्मान करता हूं। हमने कई ऐसी समस्याओं का समाधान किया है, जिन्हें बहुत से लोग हल नहीं कर पाते। हमने ईरान के बारे में चर्चा की और हम चाहते हैं कि यह संकट समाप्त हो। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति शी 24 सितंबर को आ रहे हैं। यह मुलाकात पारस्परिक होगी और वे चीन से मेरी तरह ही बहुत प्रभावित होकर लौटेंगे।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और चीन ईरान को परमाणु हथियार रखने देना नहीं चाहते और होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखना चाहते हैं। इस पर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास ने कहा कि हम भी यही राय रखते हैं। ईरान ने कभी परमाणु हथियार नहीं चाहे। हमने 2015 में समझौते पर हस्ताक्षर करते समय यह साबित कर दिया था कि हम परमाणु हथियार नहीं चाहते और यह हमारी नीति नहीं है। हमारा परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और हम हमेशा से यह विश्वास दिलाने के लिए तत्पर रहे हैं कि यह कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और शांतिपूर्ण ही रहेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य के संबंध में भी हमारी यही इच्छा है कि इसे पूरी तरह से फिर से खोल दिया जाए, जहां तक हमारा सवाल है, होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है और हमारे साथ युद्ध कर रहे देशों के जहाजों को छोड़कर सभी जहाज वहां से गुजर सकते हैं। अमेरिकी आक्रामकता के कारण क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल है। यह जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जल में स्थित है। सब कुछ ईरान और ओमान द्वारा प्रबंधित किया जाना चाहिए। हम अब आपस में इस बारे में परामर्श कर रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि व्यवस्थाएं सुचारू रूप से हों और भविष्य में होर्मुज जलडमरूमध्य में एक अच्छा प्रशासन हो, जो सभी जहाजों के सुरक्षित आवागमन की गारंटी दे सके।



