PM मोदी की अपील का छत्तीसगढ़ समेत देशभर में असर, काफिले घटे, वर्क फ्रॉम होम बढ़ा

VIP Movement Control: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल बचत, संसाधन संरक्षण और सार्वजनिक परिवहन के ज्यादा उपयोग की अपील का असर अब देशभर की सरकारों और प्रशासन में साफ दिखाई देने लगा है। 12 से ज्यादा राज्यों में वीआईपी काफिले, सरकारी बैठकों और कार्यालय व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं। कई मुख्यमंत्री और मंत्री खुद सड़क पर कम गाड़ियों या सार्वजनिक परिवहन में नजर आने लगे हैं। जानकारी के मुताबिक यह बदलाव सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि प्रशासनिक नीति में धीरे-धीरे शामिल किया जा रहा है, ताकि ईंधन खर्च कम किया जा सके और डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा मिले।
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस गुरुवार को एमएलसी शपथ ग्रहण समारोह में बाइक से विधानभवन पहुंचे। उनके साथ सुरक्षा कर्मी भी बाइक पर नजर आए। यह कदम ईंधन बचत और सादगी संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इस घटना के बाद राज्य प्रशासन में भी सरकारी वाहनों के सीमित उपयोग पर चर्चा तेज हो गई है। दिल्ली सरकार ने पेट्रोल-डीजल बचत को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है, जिसमें सरकारी कर्मचारियों को सप्ताह में 2 दिन वर्क फ्रॉम होम, 50% सरकारी बैठकें ऑनलाइन, मंत्रियों के 1 साल तक विदेश यात्रा पर रोक, दफ्तरों का समय सुबह 10:30 से शाम 7 बजे तक और 6 महीने तक नई सरकारी गाड़ियों की खरीद बंद करना शामिल हैं। (VIP Movement Control)
त्रिपुरा में रोटेशन सिस्टम लागू
त्रिपुरा सरकार ने ग्रुप C और D कर्मचारियों में रोटेशन सिस्टम लागू किया है। 50% कर्मचारी रोज ऑफिस आएंगे। बाकी कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम करेंगे। जरूरी सेवाओं को छूट दी गई है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाने का निर्णय लिया है। वे हफ्ते में एक दिन बिना गाड़ी के चलेंगे। बता दें कि PM मोदी भी बुधवार को काफिला छोड़ सिर्फ 2 गाड़ियों के साथ निकले थे। वहीं गृहमंत्री अमित शाह के काफिले में 4 गाड़ियां नजर आई थी। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन माझी ने अपने काफिले को घटाकर सिर्फ 4 गाड़ियों तक सीमित कर दिया है, जिसमें पुलिस वाहन भी शामिल हैं।
चार पहिया वाहन का उपयोग नहीं करेंगे कर्मचारी
पंजाब में राज्यपाल के निर्देश के बाद हर बुधवार सरकारी अधिकारी चार पहिया वाहन का उपयोग नहीं करेंगे। यह व्यवस्था ईंधन बचत अभियान के तहत लागू की गई है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने जिला दौरों में अपने काफिले को 50% कम करने का निर्णय लिया है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के काफिले में अब सिर्फ 5 गाड़ियां रह गई हैं, जबकि पहले 14-16 वाहन चलते थे। बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इलेक्ट्रिक वाहन से सचिवालय पहुंचे। कई मंत्री अब सिर्फ 1-2 गाड़ियों के साथ यात्रा कर रहे हैं, हालांकि कुछ दौरों में अभी भी बड़ा काफिला देखा गया। मध्य प्रदेश में VIP मूवमेंट को नियंत्रित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। (VIP Movement Control)
MP-UP में कई बदलाव
मध्य प्रदेश में अब मंत्रियों और VIP काफिलों में गाड़ियों की संख्या सीमित की जाएगी। साथ ही सरकारी दौरों और भ्रमण के दौरान रैलियों पर भी रोक लगाई गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव को Z+ कैटेगरी की सिक्योरिटी मिली है। इस वजह से उनके काफिले में कुल 13 वाहन शामिल रहते थे, लेकिन नए आदेश के बाद भोपाल में स्थानीय दौरे के दौरान मुख्यमंत्री के काफिले में अब सिर्फ 8 वाहन शामिल होंगे। इधर, मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर भोपाल में सरकारी आवास से ई-स्कूटर से पंचानन भवन पहुंचे। वहीं जस्टिस डीडी बंसल भी करीब 3 किलोमीटर साइकिल चलाकर हाईकोर्ट पहुंचे। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने 7 बड़े फैसले लिए, जिसके तहत मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और अफसरों का काफिला 50% घटेगा। हफ्ते में एक दिन इन्हें सार्वजनिक परिवहन या बस-मेट्रो से चलना होगा। अधिकतर बैठकें वर्चुअल मोड में ली जाएंगी।
छत्तीसगढ़ में भी दिखा असर
PM नरेंद्र मोदी की अपील का असर छत्तीसगढ़ में भी दिखा। राज्य में कई मंत्रियों ने काफिले कम किए। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ई-रिक्शा से कार्यक्रम में पहुंचे। रायपुर से विधायक पुरंदर मिश्रा ने ई-रिक्शा खरीदकर क्षेत्रीय यात्राएं शुरू की। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी काफिले में गाड़ियां कम करने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी कहा कि केंद्र की अपील का राज्य में सकारात्मक असर हो रहा है। देशभर में शुरू हुआ यह बदलाव अब सिर्फ एक राजनीतिक संदेश नहीं, बल्कि प्रशासनिक अभ्यास में बदलता दिख रहा है। काफिले घटाने से लेकर वर्क फ्रॉम होम और ई-गवर्नेंस तक, कई राज्य धीरे-धीरे लो फ्यूल, हाई एफिशिएंसी मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं।
PM नरेंद्र मोदी ने 2 बार की अपील
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या 6 से घटाकर 3 कर दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने 10 और 11 मई को दो अलग-अलग कार्यक्रमों में कहा था कि पेट्रोल-डीजल का उपयोग कम किया जाए। मेट्रो, इलेक्ट्रिक बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाया जाए। अनावश्यक विदेशी यात्राएं टाली जाएं। सोने और ऊर्जा संसाधनों की खपत पर संयम रखा जाए। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाए। सरकारी विश्लेषण के मुताबिक इस अपील के बाद कई राज्यों ने इसे ग्रीन गवर्नेंस मॉडल के रूप में अपनाना शुरू किया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह व्यवस्था स्थायी रूप से लागू होती है तो इससे हर साल करोड़ों लीटर ईंधन की बचत और सरकारी खर्च में बड़ी कमी संभव है।



