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छत्तीसगढ़ में ऐतिहासिक सरेंडर, नक्सली प्रवक्ता रूपेश समेत 200 नक्सलियों ने डाले हथियार, 1 करोड़ के इनामी समेत शीर्ष कैडर हुए मुख्यधारा में शामिल

Naxalite Surrender in Bastar: छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सल उन्मूलन नीति का बड़ा परिणाम सामने आया है। दरअसल, दंडकारण्य क्षेत्र में सक्रिय 200 नक्सली कैडरों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया है, जिसमें नक्सली प्रवक्ता और सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) सतीश उर्फ टी. वासुदेव राव उर्फ रूपेश समेत कई वरिष्ठ नक्सली शामिल हैं। यह छत्तीसगढ़ में अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक नक्सल आत्मसमर्पण माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक कदम को सरकार, पुलिस, सुरक्षा बल, स्थानीय प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयासों की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

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आत्मसमर्पण करने वालों में 1 करोड़ का इनामी सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) और नक्सल संगठन के प्रवक्ता सतीश उर्फ टी. वासुदेव राव उर्फ रूपेश शामिल है। रूपेश माड़ डिवीजन और इंद्रावती एरिया कमेटी इलाके में सक्रिय था। उसके अलावा 10 सीनियर नक्सली कैडर ने भी सरेंडर किया है, जिनमें रनिता (SZCM, माड़ DVC सचिव), भास्कर (DVCM, पीएल 32), नीला उर्फ नंदे (DVCM, आईसी और नेलनार एरिया कमेटी सचिव), दीपक पालो (DVCM, आईसी और इंद्रावती एरिया कमेटी सचिव) शामिल हैं, जिन पर 5 लाख से 25 लाख रुपए तक के इनाम थे। सरेंडर के दौरान नक्सलियों ने एके-47, इंसास, SLR और .303 राइफलें समेत बड़ी मात्रा में हथियार सुरक्षाबलों को सौंपे। (Naxalite Surrender in Bastar)

सभी नक्सली अपने हथियारों के साथ इंद्रावती नदी के उस पार पहुंचे, जहां से उन्हें नांव के जरिए बीजापुर पुलिस के पास लाया गया। सुरक्षा कारणों से पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। डिप्टी CM और गृहमंत्री विजय शर्मा जगदलपुर पहुंच चुके हैं। वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कल बस्तर जाएंगे, जिनकी मौजूदगी में सुबह 11 बजे रिजर्व पुलिस लाइन जगदलपुर में इन सभी 200 नक्सलियों का औपचारिक पुनर्समावेशन समारोह आयोजित किया जाएगा। राज्य सरकार ने इस पहल को शांति, संवाद और विकास पर आधारित नीति की बड़ी सफलता बताया है। सरकार ने जनप्रतिनिधियों, मीडिया और नागरिक समाज का आभार जताते हुए कहा कि उनके सहयोग से ही शांतिपूर्ण और समृद्ध बस्तर का सपना साकार हो रहा है।

सरेंडर समारोह के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृहमंत्री विजय शर्मा संयुक्त पत्रकार वार्ता करेंगे, जिसमें वे सरकार की नक्सल पुनर्वास नीति और भविष्य की रणनीति पर जानकारी देंगे। सरेंडर के बाद सीसी मेंबर रूपेश का वीडियो सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि नक्सल संगठन का एक गुट परिस्थितियों को समझने को तैयार नहीं है और हमसे नाराज है। हमने किन परिस्थितियों में सरेंडर किया है, यह उन्हें समझना होगा। हमें उनकी जान की फिक्र है। उन्होंने आगे कहा कि हम सिर्फ सशस्त्र आंदोलन छोड़ रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर हमारी विचारधारा अब भी कायम है। रूपेश ने बचे नक्सलियों से भी मुख्यधारा में लौटने की अपील की है और बताया कि सरकार ने इसके लिए संपर्क नंबर जारी किया है, जिससे कोई भी नक्सली कभी भी जुड़ सकता है।

नक्सल संगठन में दो फाड़ की पुष्टि

रूपेश के बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि नक्सल संगठन के अंदर विचारधारा को लेकर मतभेद और विभाजन हो चुका है। कई कैडर अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के पक्ष में हैं। जबकि एक हिस्सा अब भी हिंसा के रास्ते पर अड़ा हुआ है। यह सामूहिक आत्मसमर्पण बस्तर और दंडकारण्य क्षेत्र में शांति स्थापना की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह कदम छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक साबित हो सकता है। इससे पहले 6 करोड़ से ज्यादा के इनामी पोलित ब्यूरो मेंबर मोजुल्ला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति ने हिंसा का रास्ता छोड़कर अपने 60 साथियों के साथ महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में सरेंडर किया था, जिसके बाद से छत्तीसगढ़ में भी सरेंडर का सिलसिला लगातार जारी है। (Naxalite Surrender in Bastar)

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