छत्तीसगढ़ में कोल माइंस को लेकर विरोध जारी, सड़कों पर 14 गांवों के लोग

Protests Over Coal Mines: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में कोल माइंस को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है। तमनार ब्लॉक में जिंदल पावर लिमिटेड (JPL) की प्रस्तावित गारे-पेलमा सेक्टर-1 कोल माइंस के खिलाफ 14 गांवों के हजारों ग्रामीण पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। जनसुनवाई को रोकने के लिए ग्रामीणों ने मानव श्रृंखला बनाई, स्कूल मैदान को घेरकर धरना शुरू किया और साफ चेतावनी दी कि जमीन नहीं देंगे, खदान नहीं बनने देंगे। तमनार ब्लॉक के झरना, आमगांव, कोसमपाली, पतरापाली, जांजगीर, गोढ़ी, कसडोल, महलोई, सरसमाल समेत 14 गांवों के ग्रामीण 5 दिसंबर से धौराभांठा स्कूल मैदान में डटे हुए हैं। जनसुनवाई की तैयारी होते देख ग्रामीणों ने सुबह से ही मैदान में टेंट नहीं लगने दिया और मानव श्रृंखला बनाकर विरोध जताया।
यह भी पढ़ें:- शादी का झांसा देकर 8 साल बड़ी सब इंजीनियर से दुष्कर्म, धोखेबाज सहायक पोस्टमास्टर गिरफ्तार
लैलूंगा की कांग्रेस विधायक विद्यावती सिदार भी मौके पर पहुंची और ग्रामीणों के साथ जनसुनवाई रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की सहमति के बिना खदान किसी भी हालत में मंजूर नहीं होनी चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि पब्लिक हियरिंग स्कूल मैदान में होनी थी, लेकिन प्रशासन ने चुपके से मार्केट कॉम्प्लेक्स के एक कमरे में करा दी। इलाके में पहले से ही प्रदूषण और भारी वाहनों का दबाव बढ़ा है। विस्थापन, पर्यावरणीय नुकसान और आजीविका पर संकट सबसे बड़ी चिंता है। महिला प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उन्होंने बाहरी लोगों की एंट्री रोकने के लिए इलाके की घेराबंदी कर दी है। एक ग्रामीण ने कहा कि हम 5 नवंबर से विरोध कर रहे हैं, जब तक जनसुनवाई निरस्त नहीं होगी, आंदोलन जारी रहेगा। (Protests Over Coal Mines)

एक अन्य आंदोलनकारी के मुताबिक इस बार 25 हजार से ज्यादा ग्रामीण विरोध में उतरे, लेकिन प्रशासन आदिवासी क्षेत्रों में ग्रामसभा की सहमति को नजरअंदाज कर रहा है। वहीं सरगुजा जिले के अमेरा ओपनकास्ट कोल माइंस विस्तार का ग्रामीणों ने 3 दिसंबर को विरोध किया। स्थिति बिगड़ते ही पुलिस और ग्रामीणों में पथराव शुरू हो गया, जिसमें ASP और थाना प्रभारी समेत 25 पुलिसकर्मी घायल हो गए। 12 से ज्यादा ग्रामीण भी घायल हो गए। भीड़ नियंत्रण के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए थे। इस दौरान पुलिस और ग्रामीण दोनों तरफ से पथराव हुआ था। SECL यहां 2001 में अधिग्रहित जमीन पर विस्तार करना चाहता है, लेकिन ग्रामीण जमीन सौंपने से इनकार कर रहे हैं। (Protests Over Coal Mines)
300 ग्रामीण पहुंचे थे कलेक्ट्रेट
वहीं रायगढ़ के छाल क्षेत्र के पुरूंगा, साम्हरसिंघा और तेंदूमुड़ी गांव के ग्रामीण भी कोल माइंस के खिलाफ आंदोलनरत हैं। 6 नवंबर को 300 ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे, लेकिन कलेक्टर से मुलाकात नहीं होने पर वे रातभर धरने पर बैठे रहे। ग्रामीण 11 नवंबर की प्रस्तावित जनसुनवाई को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। कोरबा के SECL की गेवरा खदान में भू-विस्थापितों के प्रदर्शन के दौरान CISF ने लाठीचार्ज किया। इस लाठीचार्ज में किसान सभा के जिला सचिव दीपक साहू समेत कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। ग्रामीण यहां रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास की मांग कर रहे थे। रायगढ़ से शुरू हुआ कोल माइंस विरोध अब पूरे छत्तीसगढ़ में फैल चुका है। रायगढ़ में 14 गांव, सरगुजा में हिंसक झड़प और कोरबा में लाठीचार्ज…तीनों घटनाएं बताती हैं कि खदान विस्तार और नई परियोजनाओं के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश तेजी से बढ़ रहा है।



