Google Analytics —— Meta Pixel

ऑनलाइन ठगी का अड्डा बनी राजधानी रायपुर, एक साल में ठगों ने उड़ाए 60 करोड़, 8680 मामलों में सिर्फ 15 को सजा

Cyber Crime in Raipur: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में साइबर अपराध लगातार बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के मोर्चे पर पुलिस की सुस्ती साफ नजर आ रही है। पिछले एक साल के भीतर राजधानी में 8680 से ज्यादा लोग साइबर ठगी का शिकार हुए हैं। इन पीड़ितों से 60 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम ठग ली गई, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से सिर्फ 210 मामलों में ही FIR दर्ज की गई है। बाकी 8470 शिकायतें जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में पड़ी हुई हैं। इन मामलों में न तो आरोपियों की गिरफ्तारी की ठोस कोशिश हो रही है और न ही ठगी गई रकम की रिकवरी। नतीजतन सैकड़ों पीड़ित आज भी थानों और साइबर सेल के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

यह भी पढ़ें:- आज देशभर में सरकारी बैंक कर्मचारियों की हड़ताल, आम लोगों को हो सकती है भारी परेशानी

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता पीड़ित का पैसा वापस दिलाना होता है। कोई भी पीड़ित जब थाना या साइबर सेल पहुंचता है तो उसके खाते की जानकारी लेकर संबंधित बैंक को मेल कर रकम होल्ड कराने का प्रयास किया जाता है। इसके बाद शिकायत की जांच होती है और फिर FIR दर्ज की जाती है। हालांकि हकीकत यह है कि रोजाना हर थाने में साइबर फ्रॉड की शिकायतें आने के बावजूद ज्यादातर मामलों में FIR दर्ज नहीं हो पा रही है। पीड़ितों का कहना है कि वे आरोपियों की गिरफ्तारी से ज्यादा अपनी मेहनत की कमाई वापस चाहते हैं, लेकिन उन्हें वह भी नहीं मिल रही। (Cyber Crime in Raipur)

60 करोड़ की ठगी में सिर्फ डेढ़ प्रतिशत की वापसी

आंकड़े और भी चौंकाने वाले हैं। पिछले साल हुई 60 करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी में से पुलिस ने करीब 11 करोड़ 25 लाख रुपए ही खातों में होल्ड कराए हैं, लेकिन इसमें से भी सिर्फ 90 लाख रुपए ही पीड़ितों को वापस मिल सके हैं। यानी कुल ठगी की रकम का सिर्फ करीब डेढ़ प्रतिशत ही पीड़ितों तक पहुंच पाया है, जबकि लगभग 18 प्रतिशत रकम ही खातों में होल्ड हो सकी है। शेष रकम को निकालने के लिए पीड़ित आज भी थानों के चक्कर लगा रहे हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक कुल शिकायतों में से महज 2.41 प्रतिशत मामलों में ही FIR दर्ज हुई है। इनमें भी सजा की दर बेहद कम है। 210 FIR में से सिर्फ 15 मामलों में ही सजा हो पाई है।

साइबर पोर्टल पर शिकायत, फिर भी FIR नहीं

अधिकांश मामलों में आरोपी और पीड़ित के बीच समझौता हो जाता है। कई बार ठग पकड़े जाने के बाद पीड़ित को रकम लौटाकर केस वापस करा लिया जाता है, जबकि कई मामले अदालतों में लंबे समय तक विचाराधीन रहते हैं। केंद्र सरकार के साइबर क्राइम पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1930 पर बड़ी संख्या में लोग सीधे शिकायत दर्ज करा रहे हैं। पिछले साल साइबर पोर्टल पर 8680 शिकायतें दर्ज हुई, जिन्हें कार्रवाई के लिए रायपुर पुलिस को भेजा गया। इसके बावजूद अधिकांश मामलों में FIR दर्ज नहीं की गई। आरोप है कि पुलिस सिर्फ 5 लाख रुपए से ज्यादा की ठगी के मामलों में ही FIR कर रही है। साइबर रेंज थाने में तो 10 से 20 लाख रुपए से ऊपर के मामलों में ही केस दर्ज हो रहे हैं।

साइबर एक्सपर्ट्स की चेतावनी

10-20 हजार रुपए की ठगी के मामलों में सुनवाई तक नहीं हो रही, जबकि ऐसे मामले सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं। साइबर क्राइम एक्सपर्ट्स का कहना है कि हर मामले में FIR दर्ज करना जरूरी है। FIR होने पर ही ठगों का सिम और बैंक खाता ब्लॉक कराया जा सकता है और उनकी पहचान कर पूरे गिरोह तक पहुंचा जा सकता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक FIR नहीं होने की वजह से देशभर में साइबर फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पुलिस अक्सर सिर्फ उस व्यक्ति तक पहुंच पाती है, जिसके नाम पर सिम या खाता होता है, लेकिन ठगी के असली सरगना तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। कुल मिलाकर साइबर ठगी के बढ़ते मामलों ने राजधानी में आम लोगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Back to top button
error: Content is protected !!