खरसिया के कार्बन प्लांट हादसे ने उजाड़ दिया पूरा परिवार, चार की मौत के बाद NH-49 पर चक्काजाम

Raigarh Carbon Plant Accident: रायगढ़ जिले के खरसिया थाना क्षेत्र के बानीपाथर गांव स्थित श्री मंगल कार्बन प्लांट में 5 फरवरी को हुए भीषण हादसे ने एक पूरे परिवार को तबाह कर दिया है। इस घटना में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें एक ही परिवार के तीन सदस्य शामिल हैं। हादसे के बाद जहां अस्पताल में मातम पसरा है, वहीं सड़क पर आक्रोश उबल पड़ा है। परिजनों और ग्रामीणों ने मृतकों के शव रखकर राष्ट्रीय राजमार्ग-49 पर चक्काजाम कर दिया, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई और यातायात पूरी तरह ठप हो गया। अस्पताल के वार्ड में गूंजती एक मां की चीखें हर किसी का दिल दहला रही थीं। 25 साल की उदासिनी खड़िया ने इस हादसे में अपनी 9 महीने की दूधमुंही बच्ची भूमि खड़िया और पति शिव खड़िया को खो दिया।
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बुधवार दोपहर उसके ससुर साहेब लाल खड़िया ने भी वेंटिलेटर पर इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। परिवार पहले से ही दुखों से जूझ रहा था। परिजनों के मुताबिक तीन महीने पहले ही उदासिनी की तीन साल की बेटी सृष्टि की भी मौत हो चुकी थी। अब चार बच्चों में से दो इस दुनिया में नहीं रहे, जबकि एक बेटा और एक बेटी घर पर हैं। दरअसल, 5 फरवरी को प्लांट में काम के दौरान बड़ा हादसा हुआ। बताया जा रहा है कि फर्नेस को खोलते ही तेज आग और प्रेशर का गुबार बाहर निकला, जिसकी चपेट में वहां काम कर रहे आठ मजदूर आ गए। इस प्लांट में पुराने टायरों को पिघलाकर काला तेल निकाला जाता है, जिसका उपयोग सड़क निर्माण में किया जाता है। आरोप है कि फर्नेस को पूरी तरह ठंडा किए बिना ही खोल दिया गया था और मजदूरों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
अचानक हुए ब्लास्ट जैसे हालात में मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और वे गंभीर रूप से झुलस गए। इस हादसे में भूमि खड़िया (9 माह), उसके पिता शिव खड़िया (27 साल), दादा साहेब लाल खड़िया (46 साल) और एक अन्य मजदूर इंदीवर की मौत हो चुकी है। भूमि ने इलाज के दौरान सोमवार को दम तोड़ा था। मंगलवार देर रात पिता शिव खड़िया की मौत हुई और बुधवार दोपहर साहेब लाल भी जिंदगी की जंग हार गए। इंदीवर की भी इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं उदासिनी खड़िया 30 से 40 प्रतिशत तक झुलसी हैं, जबकि कौशल (25 साल) और प्रिया (32 साल) 70 से 80 प्रतिशत तक झुलसे हुए हैं। सभी घायलों का इलाज रायपुर में जारी है और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। (Raigarh Carbon Plant Accident)

FIR वापस लेने का दबाव: परिजन
परिजनों का आरोप है कि हादसे के बाद प्लांट प्रबंधन के खिलाफ खरसिया थाने में FIR दर्ज की गई, लेकिन अब प्रबंधन की ओर से शिकायत वापस लेने और बयान बदलने का दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि प्लांट में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही थी। मजदूरों को सेफ्टी गियर नहीं दिए जाते थे और काम के दौरान लापरवाही बरती जा रही थी। यही लापरवाही इतने बड़े हादसे का कारण बनी। चार मौतों के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। खरसिया के पास ग्रामीणों और परिजनों ने मृतकों के शव सड़क पर रखकर NH-49 को जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि प्रत्येक मृतक के परिजनों को 50 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए, परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए। (Raigarh Carbon Plant Accident)
मौके पर पहुंचे कांग्रेस विधायक उमेश पटेल
परिजनों की मांग है कि घायलों के इलाज का पूरा खर्च कंपनी वहन करे और पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही दोषी प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों की तत्काल गिरफ्तारी की भी मांग की जा रही है। कंपनी प्रबंधन ने 12-12 लाख रुपए मुआवजे की घोषणा की है, लेकिन परिजन इसे नाकाफी बता रहे हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए औद्योगिक स्वास्थ्य और सुरक्षा विभाग ने प्लांट को सील कर दिया है। खरसिया पुलिस ने उद्योग प्रबंधन के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात है और प्रशासन प्रदर्शनकारियों को समझाने में जुटा हुआ है। (Raigarh Carbon Plant Accident)

मजदूरों की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा ?
पूर्व मंत्री और खरसिया विधायक उमेश पटेल भी मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवारों के समर्थन में खड़े रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की मांगों को शासन स्तर तक पहुंचाया जाएगा और न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। गरीबी और मजबूरी में मजदूरी करने वाला यह परिवार अपने छोटे-छोटे बच्चों को प्लांट परिसर में साथ लेकर काम करता था। अब वही प्लांट उनके लिए जिंदगी का सबसे बड़ा दुख बन गया। एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत और दो मासूम बेटियों को खो देने के बाद पूरा गांव शोक और आक्रोश में डूबा हुआ है। अब सबकी नजरें जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या इस हादसे के जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी और क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाएगा।



